सिहोरा : करोड़ों खर्च, फिर भी खेत हैं प्यासे

सिहोरा, मध्य प्रदेश : 350 किमी नहर निर्माण से सिंचित होनी थी 34000 हेक्टेयर भूमि। तकनीकी त्रुटि के चलते परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद भी नहरों में पानी नहीं पहुंच पाया है।
सिहोरा : करोड़ों खर्च, फिर भी खेत हैं प्यासे
करोड़ो खर्च, फिर भी खेत हैं प्यासेसांकेतिक चित्र

सिहोरा, मध्य प्रदेश। सिहोरा अनुभाग मे सिंचित भूमि का रकबा बढाने के लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा दाई तट नहर सिंचाई परियोजनाएं द्वारा किसानों को फसल हेतु, भरपूर पानी उपलब्ध कराए जाने का दावा तो किया जा रहा है किंतु किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। खेतों में सिंचाई करने किसान आज भी पानी के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं।

सिहोरा सब डिवीजन क्षेत्र की सूखी जमीन को सिंचित करने शासन ने अब तक करोड़ों रुपए खर्च कर सिंचाई परियोजना एंव डेम बनाए गए हैं। लेकिन विभागीय इंजीनियरों की लापरवाही के कारण इन परियोजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा। तकनीकी त्रुटि के चलते परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद भी नहरों में पानी नहीं पहुंच पाया है। कई जगह नहरें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। निर्माण कार्य विगत कुछ वर्षों पहले कराया था लेकिन आज भी डेमों में उपलब्ध पानी किसानों के खेतों तक नहरों के माध्यम से नहीं पहुंच पाया है।

15 वर्षों में भी निर्माण अधूरा :

उल्लेखनीय है कि वर्ष 03-04 में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा सिहोरा सब डिवीजन में 34 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने 350 किलोमीटर लंबी नहर का जाल बिछाने का कार्य प्रारंभ किया गया था। वर्ष 06-07 में मुख्य केनाल का कार्य पूर्ण भी हुआ किंतु माइनर कैनाल का कार्य पूर्ण ना होने एवं क्षतिग्रस्त कैनाल के मेंटेनेंस का समय से पूर्ण ना होने के कारण नहरों का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण विभागीय मनमानी और इंजीनियरों का मुख्यालय पर न रहना बताया जा रहा है। जबकि नहरों एवं परियोजना के रख-रखाव के नाम पर हर साल मरम्मत की राशि निकाली जा रही है। इस राशि से कितना सुधार होता है, यह तो स्थानीय किसान व विभागीय अधिकारी भलीभांति जानते हैं।

17 ठेकेदार दे रहे निर्माण कार्य को अंजाम :

विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि वर्तमान में सिहोरा सब डिवीजन में अपूर्ण नहरो एवं क्षतिग्रस्त नहरों के सुधार, पुलिया निर्माण, सिल्ट की सफाई सहित अन्य कार्यों को अंजाम देने 17 ठेकेदार निर्माण कार्यों में जुटे हैं गौरतलब है कि जव कोरोना काल में प्रवासी मजदूर बेरोजगारी काट रहे थे तब जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे थे, अब जब किसानों को फसल हेतु पानी की आवश्यकता है तब डिवीजन की मेन कैनाल सहित माइनर के नालों में मेंटेनेंस का कार्य प्रारंभ किया गया है।

नहरें क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र के किसानों को नहीं मिल रहा लाभ :

किसानों में आरोप लगाया है कि नेहरो के क्षतिग्रस्त होने के कारण फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा वही जिम्मेदारों का कहना है कि किसानों ने अधिक पानी प्राप्त करने की प्रत्याशा में जगह जगह नहरों को खोद दिया है। समय पर पानी नहीं मिला तो रबी सीजन में फसलों पर संकट जा जाएगा। कई किसान तो बोवनी ही नहीं कर पाएंगे।

इनका कहना :

वर्तमान में मुख्य नहर सहित माइनर कैनाल मे निर्माण कार्य एवं मेंटेनेंस जारी है। पानी की डिमांड किसानों की तरफ से अभी नहीं आई है, ना ही किसी ने पंप हेतु परमिशन मांगी है। किसानों की मांग के अनुसार नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।

एम.के. ढिमोले, कार्यपालन यंत्री, सिहोरा

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