Shahdol : नियमों को रौंद कर अन्तर्राज्यीय आवाजाही कर रहीं बसें

जिले की सीमा के अंदर से अंतर्राज्यीय बसों का अवैध संचालन हो रहा है लेकिन परिवहन विभाग आंखों में पट्टी बांधे बैठा है। यह खेल कोरोना संकट के समय बंद हो गया था लेकिन फिर चालू कर दिया गया है।
Shahdol : नियमों को रौंद कर अन्तर्राज्यीय आवाजाही कर रहीं बसें
नियमों को रौंद कर अन्तर्राज्यीय आवाजाही कर रहीं बसेंRaj Express

शहडोल, मध्यप्रदेश। जिले की सीमा के अंदर से अंतर्राज्यीय बसों का अवैध संचालन हो रहा है लेकिन परिवहन विभाग आंखों में पट्टी बांधे बैठा है। यह खेल कोरोना संकट के समय बंद हो गया था लेकिन इधर एक अर्से से फिर चालू कर दिया गया है। बस मालिक मनमाना किराया वसूल कर बसें चला रहे हैं। कुछ बसें नेशनल परमिट के नाम पर तो कुछ रिजर्व पार्टी के नाम पर संचालित हो रहीं हैं। इस गोरखधंधे में शहडोल के भी कुछ बस मालिक शामिल हैं। रात के समय शहडोल बस स्टैण्ड से रोजाना लगभग 50 बसोंं की आवाजाही हो रही है। ज्ञातव्य है कि अवैध आवाजाही को रोकने और धरपकड़ करने परिवहन विभाग में उडऩदस्ता भी है लेेकिन उसका भी कोई अतापता नहीं रहता। बताते हैं कि बस मालिकों से सबका कमीशन सेट है,सब अपनी सुविधा अनुसार परमिट बनवा कर एक ओर शासन को चूना लगा रहे हैं और दूसरी ओर यात्री का शोषण करते हैं। लम्बी दूरी की इन अंतर्राज्यीय बसों के लिए बस स्टैण्ड में दलाल भी सक्रिय हैं जो यात्रियों को बसों का पता बताते हैं और सीट दिलाने का जिम्मा भी ले लेते हैं।

उप्र, छत्तीसगढ़, गुजरात की यात्रा :

रात के समय बस स्टैण्ड में लोकल बसें कम अंतर्राज्यीय बसें अधिक खड़ी दिखाई देती हैं। इन बसों में रायपुर से बनारस, रायपुर से इलाहाबाद, कवर्धा से लखनऊ, अम्बिकापुर से सूरत, मनेन्द्रगढ़ से खागा उप्र के लिए आदि के लिए बसें उपलब्ध होती हैं। यह तो कुछ नाम गिनाए गए हैं इनके अलावा भी दर्जनों स्थानेां के लिए बसें चल रहीं हैं। रायपुर बनारस, इलाहाबाद तथा नागपुर के लिए तो एक दर्जन सेे भी अधिक बसें चल रहीं हैं। इनमें पायल ट्रेवल्स, रविराज ट्रेवल्स, नरेश ट्रेवल्स, स्टार, नफीस और पक्षीराज ट्रैवल्स आदि का नाम शामिल है। पक्षीराज की एक बस अम्बिकापुर से इलाहाबाद डबलडेकर चलती है जो कि रीवा की ओर से रात 9 बजे शहडोल पहुंचती है। रेलवे की तरह बस मालिकों ने भी आरटीओ को खुश कर अपनी बसें संचालित कर रखा है।

सड़क पर नहीं होती जांच :

परिवहन विभाग को नियमत: बसों के संचालन की जांच करनी चाहिए और बस स्टैण्ड तथा सड़क पर नाकेबंदी कर बसों की वैधता देखनी चाहिए इसके लिए परिवहन अधिकारी और उडऩदस्ता दोनों ही अधिकृत हैं। लेकिन उड़नदस्ता कभी भी सड़क पर दौड़ती बसों को रोककर उनकी जांच पड़ताल नहीं करते। इसीलिए बसों के अंदर जम कर ओव्हरलोडिंग की जाती है। लम्बी दूरी की बसों में भी लोकल पैसेंजर की तरह यात्री बैठाए जाते हैं। जो कि कंडक्टर की कमाई का जरिया होता है। परिवहन विभाग ने एक तरह से बस मालिकों को छूट दे रखी है। इसका कारण समझा ही जा सकता है। बस मालिक परिवहन विभाग के मुंह में रकम ठूंस रहे हैं और तुम्हारी भी जय जय, हमारी भी जय जय की तर्ज पर काम कर रहे हैं।

रिजर्व पार्टी का परमिट :

बताया जाता है कि बस मालिक प्राय: रिजर्व पार्टी टूर प्रोग्राम के लिए परमिट बनवाते हैं। यह परमिट 4-6 दिन के लिए बनाया जाता है। इसमें कहां से कहां तक कितने सवारी उन सबके नाम और यात्रा करने का कारण आदि सब दर्शाना पड़ता है, लेकिन इन सबकी औपचारिकता भी ढंग से पूरी नहीं की जाती है। एक बार परमिट बनवाकर कई खेप लगा लेने के बाद बस मालिक पुन: यही परमिट संशोधित करवा लेता है और लम्बी दूरी की सेवा देता रहता हैं। हर बार वे रकम देकर मुठ्ठियां गरम कर देते हैं। रकम मिलते ही अधिकारी अपने दायित्व का गला घोट देते हैं और चैन की वंशी बजाते रहते हैं।

इस तरह से भी वसूली :

उड़नदस्ता द्वारा आरटीओ की शह पर रात मे सड़कों पर परिवहन विभाग का वाहन खड़ा कर आते-जाते ट्रकों से वसूली करते हैं। उनके कागजात देखकर उनमें कमियां निकालते हैं कभी कभी तो सीधे ही रकम मांग ली जाती है। इस कार्य में उड़नदस्ता और आरटीओ के चहेते कई दलाल भी शामिल रहते हैं। बसों से अलग तरह से और ट्रकों से अलग तरह से कमाई की जा रही है। रात को कहां क्या हुआ कौन देखता है? बताया गया कि यह गोरखधंधा पूर्व के आरटीओ भी कराते थे और एक गुप्ता नाम का दलाल सक्रिय था। बाद में एक आरटीओ किसी बात पर उससे रुष्ट हो गया और उसे पिटवा दिया था। तब से वह इस काम में पकड़े जाने की डर से अलग हो गया था। अब उसी परंपरा का दूसरे लोग निर्वाह कर रहे हैं।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Related Stories

No stories found.