शहडोल : परमिट की छूट पर छग का ले रहे डबल भाड़ा

शहडोल, मध्य प्रदेश : यात्री बस का एक भी परमिट नहीं, दौड़ रही दर्जनों बसें। परिवहन अधिकारी की नियुक्ति पर उठ रहे सवाल।
शहडोल : परमिट की छूट पर छग का ले रहे डबल भाड़ा
परमिट की छूट पर छग का ले रहे डबल भाड़ाSantosh Tandon

शहडोल, मध्य प्रदेश। जिले में परिवहन विभाग कुछ माहों से भगवान भरोसे चल रहा है, अधिकारी कभी कभार कार्यालय में बैठते हैं, बाकी समय मातहतों के भरोसे रहता है, जिले की सीमा से तीन से चार दर्जन बिना परमिट के यात्री बसें छग व यूपी दौड़ रही हैं। दो से तीन गुना किराया वसूला जा रहा है और जिम्मेदार मौन हैं।

मध्य प्रदेश शासन द्वारा यात्री बसों के किराया निर्धारण के लिए 8 मई 2015 को राजपत्र प्रकाशित हुआ था, जिसमें सामान्य प्रक्रम के वाहनों का प्रति यात्री 1 रूपये प्रति किलोमीटर और प्रथम किलोमीटर 7 रूपये तय किया गया था, रात्रि बस सेवा के वाहनों को 10 प्रतिशत अधिक किराया, डीलक्स बसों को 25 प्रतिशत, स्लीपर बसें यदि स्लीपर दें तब 40 प्रतिशत, डीलक्स एसी 50 प्रतिशत और सुपर लग्जरी एसी कोच वाली बसें 75 प्रतिशत अर्थात 1 रूपये प्रति किलोमीटर की जगह 1 रूपये 75 पैसे प्रति किलोमीटर भाड़ा ले सकती हैं, लेकिन वर्तमान में कोरोना का हवाला देकर यात्रियों की जेब काटी जा रही है। एक तरफ मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ और कटनी सहित रीवा, इलाहाबाद के लिए सीधी ट्रेन न होने के कारण यात्री बसों में यात्रा करने को मजबूर हैं, ऐसी परिस्थितियों में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी जनता के प्रति और बढ़ जाती है, लेकिन शहडोल परिवहन अधिकारी की इस मामले में कार्यवाही तो दूर, एक भी जांच न करना खुद उन्हें कटघरे में खड़ा कर रही है।

परमिट नहीं, फिर भी चिल्ला-चोट :

परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों पर यकीन करें तो, बिलासपुर से शहडोल के लिए शायद एक भी परमिट यहां से जारी नहीं है, जिसके आधार पर यात्री बसें बस स्टैण्ड और हर 10 किलोमीटर पर खड़े होकर सवारियां चढ़ाती और उतारती है, शाम होते ही शहडोल सहित अनूपपुर और अन्य प्रमुख बस अड्डों पर बस मालिकों के नुमाईंदे बिलासपुर, रायपुर, इलाहाबाद, कानपुर, नागपुर आदि क्षेत्रों के लिए चिल्ला-चिल्लाकर सवारियां बुलाते और टिकट काटते नजर आते हैं, लेकिन यह सब विभाग शायद विभाग को नजर नहीं आता।

संक्रमण का बढ़ता खतरा :

बस संचालकों द्वारा कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन न करने एवं मनमाना किराया वसूली से यात्रियों में आक्रोश है। कोविड-19 के गाइडलाइन के साथ बीते माह से बसों के संचालन का आदेश सरकार द्वारा जारी किया गया था। जिसका फायदा उठाते हुए बस संचालकों ने कम यात्रियों को ही बसों में यात्रा कराने के नाम पर किराया बढ़ाकर डेढ़ गुना से भी अधिक कर दिया, लेकिन यात्रियों की संख्या, मास्क व शारीरिक दूरी का पालन कराना भूल गए। जिससे संक्रमण की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

यात्रियों की जेब पर डाका :

कोरोना महामारी में डीजल के दामों में इतनी भी बढ़ोतरी नहीं हुई है कि यात्री किराया भाड़ा में दोगुनी बढ़ोतरी की जाए। इसके बावजूद मनमाना किराया वसूल कर आमजन की जेब पर डाका डाला जा रहा है। वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ के बस मालिकों द्वारा ट्रेनों के न चलने का फायदा उठाते हुए लूट मचाई जा रही है, बस मालिकों द्वारा यात्रियों से मनमाना किराया वसूल कर जेब पर डाका डाला जा रहा है।

दलालों की बोलती तूती :

संभागीय मुख्यालय के जिला परिवहन कार्यालय में अफसरों की हुकूमत नहीं, बल्कि दलालों की फटकार चलती है, परिवहन कार्यालय में आने वाले आवेदकों को बाबू के पहले दलालों के संपर्क करना पड़ता है, यहां ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट, फिटनेस संबंधित काम करवाने के लिए पहुंच रहे आवेदकों से दलालों द्वारा दोगुना पैसा वसूला जा रहा है, वहीं दलालों की इतनी तूती बोलती है कि वे बाबुओं के बाजू में कुर्सी लगाकर बैठे रहते हैं। सूत्रों की मानें तो ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए परिवहन अधिकारी नहीं, दलालों से मिलना पड़ता है।

वर्क फ्रॉम होम :

परिवहन अधिकारी को दलालों की कारगुजारी पता होने के बावजूद इन सबको नजरअंदाज किया जा रहा है, पूर्व में भी कथित अधिकारी पर कई आरोप लग चुके हैं, मजे की बात तो यह इनदिनों कथित अधिकारी द्वारा कार्यालय में न बैठ, वर्क फ्रॉम होम किया जा रहा है, यहांं आने वाले आवदकों का कहना है कि आरटीओ में दलाल भी अब सिस्टम का अंग बनकर काम कर रहे हैं, यहां तक कि सरकारी सीटों पर भी दलालों का कब्जा है।

इनका कहना है :

किराया तो निर्धारित नियमों के अनुरूप लेना चाहिए, बिलासपुर के लिए अधिकतम 250, स्लीपर का 400 रूपये होना चाहिए, अन्य जिलों व प्रदेशों से परमिट लिये जा सकते हैं। फिर भी हम इन बसों की जांच करेंगे।

आशुतोष सिंह भदौरिया, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, शहडोल

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