Shahdol : डीएमएफ से 30 लाख का भ्रष्टाचार, सीएस को नोटिस
डीएमएफ से 30 लाख का भ्रष्टाचार: सीएस को नोटिसराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Shahdol : डीएमएफ से 30 लाख का भ्रष्टाचार, सीएस को नोटिस

शहडोल, मध्यप्रदेश : कलेक्टर ने दिया सिविल सर्जन को कारण बताओ पत्र। करोड़ों के दर्जनों घोटालों में से एक से उठा पर्दा। जनरेटर सहित पलंग खरीदी में हुआ था घोटाला।
Summary

नियुक्ति के दिन से ही विवादों में रहे सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार के द्वारा किये गये 30 लाख के गड़बड़झाले के मामले में कलेक्टर द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, डीएमएफ से आई राशि से जनरेटर और बेड खरीदे गये थे, जिसमें वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है।

शहडोल, मध्यप्रदेश। मैं सेवा के लिये आया हूँ, मुझे पद का मोह नहीं है, मरीजों की सेवा सर्वाेपरि है। पिछले दरवाजे से कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन बने दंत चिकित्सक जी.एस. परिहार के द्वारा नियुक्ति के दिन से ही कुछ इस तरह के जुमले हर मंच से कहे जाते रहे, रोगी कल्याण समिति से लेकर, रेडक्रास तक पूर्व कलेक्टर के कार्यकाल के दौरान फैलाये गये मायाजाल की अब परतें उधड़ने लगी हैं, 21 दिसम्बर को कलेक्टर शहडोल द्वारा जारी हुए विभागीय पत्र क्रमांक 74 के माध्यम से डॉ. जी.एस. परिहार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उक्त पत्र में उन पर आरोप लगाये गये हैं कि उनके द्वारा 30 लाख 82 हजार 600 रूपये की राशि जो डीएमएफ से स्वीकृत की गई थी, उस राशि से डीजल जनरेटर सहित बेड आदि क्रय करने में उनके द्वारा निर्धारित नियमों का पालन न करते हुए वित्तीय अनियमितता की गई है। हालाकि उक्त पत्र को जारी हुए आज चार दिवस बीत चुके हैं, इधर इस मामले में दो दिन के अंदर जवाब मांगा गया था।

यह की गई थी खरीदी :

खनिज कल्याण निधि से वर्ष 2021-22 में कोरोना वॉयरस कोविड-19 से संक्रमण हेतु रोकथाम के नाम पर 30 लाख 82 हजार 600 रूपये स्वीकृत कराये गये, इसमें एक नग डीजल जनरेटर, जिसकी कीमत 9 लाख 75 हजार 400 रूपये, 100 नग बेड जिनकी कीमत 12 लाख 60 हजार रूपये तथा रेग्जीन वाले गद्दे 200 नग जिनकी कीमत 8 लाख 47 हजार 200 रूपये बताई गई, क्रय की गई। अन्य आरोपों के साथ ही यह बात भी सामने आई कि जिला चिकित्सालय में 100 नग बेड रखने का स्थान ही नहीं था, महज जुगाड़ के फेर में की गई खरीदी में कोरोना की आड़ तो ले ली गई और इन बेडो को जिले के अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों में भेज दिया गया।

इस आदेश से हुई खरीदी :

प्रशासकीय स्वीकृति की 30 लाख 82 हजार 600 रूपये प्रदाय की गई प्रशासकीय स्वीकृति आदेश के विरूद्व सिविल सर्जन द्वारा उपरोक्त सामग्री क्रय किया जाकर पत्र क्रमांक/भण्डार/ 2021-22/2733 दिनांक 27 अक्टूबर के माध्यम से देयकों की प्रति उपलब्ध कराया जाकर राशि की मांग की गई। सिविल सर्जन सह सचिव, रोगी कल्याण समिति जिला चिकित्सालय द्वारा क्रमांक 01 से 03 में वर्णित सामग्री के संबंध में क्रय समिति द्वारा क्रय की गई सामग्री का भौतिक सत्यापन कराकर प्रमाण पत्र देयकों के साथ उपलब्ध कराया गया।

भौतिक सत्यापन सहित अन्य गड़बड़ियां :

सामग्री के भुगतान के लिए सिविल सर्जन द्वारा दिये गये देयकों का अवलोकन करने पर कार्यालययीन लेखा शाखा द्वारा पाया गया है कि वर्णित सामग्री एवं प्रशासकीय स्वीकृत आदेश में उल्लेखित सामग्री के मॉडल एवं विवरण में अंतर पाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सिविल सर्जन द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति आदेश के सरल क्रमांक 01 में वर्णित सामग्री से भिन्न स्तर की सामग्री क्रय की गई है। जिसमें चिकित्सकों की क्रय समिति का भौतिक सत्यापन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है । जबकि खरीदी के पश्चात किसी शासकीय विभाग के तकनीकि जानकार (कार्यपालन यंत्री स्तर का) से भौतिक सत्यापन/निरीक्षण कराया जाकर सत्यापन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए था, किंतु सिविल सर्जन द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

निर्धारित मापदण्डों का उल्लंघन :

सिविल सर्जन द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र एवं विवरण के अनुसार सामग्री क्रय के लिए कलेक्टर एवं उपाध्यक्ष जिला खनिज प्रतिष्ठान द्वारा आदेश में वर्णित शतों के आधार पर प्रशासकीय स्वीकृति आदेश जारी किये गये हैं, किंतु सिविल सर्जन द्वारा जारी की गई प्रशासकीय स्वीकृति आदेश के सरल क्रमांक 01 में वर्णित सामग्री से भिन्न स्तर की सामग्री क्रय किया जाकर मध्यप्रदेश भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 के प्रावधानों एवं आदेश में वर्णित शर्तो व खनिज साधन विभाग भोपाल द्वारा प्राप्त अनुमोदन की शर्तों का उल्लंघन किया गया है।

दो दिन का अल्टीमेटम :

सिविल सर्जन द्वारा मध्यप्रदेश भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 के नियमों एवं प्रशासकीय स्वीकृति आदेश में वर्णित शर्तों का पूर्णरूप से पालन न करते हुए सामग्री क्रय करने की कार्यवाही की गई, है जो कि शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही एवं वित्तीय अनियमितता को दर्शता है। सिविल सर्जन द्वारा संबंधित संस्था डीजीएस एण्ड डी इंडिया कॉर्पोरेशन ए-16 अग्रवाल किराना स्टोर, गुढियारी शिवानंद नगर रायपुर (छ.ग.) को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है। सिविल सर्जन द्वारा किया गया यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 उपनियम (15) की धारा 13 का उल्लंघन है। पत्र के माध्यम से कलेक्टर ने 03 दिवस के अंदर अपना जवाब मांगा था, समय-सीमा के अन्दर समाधानकारक एवं संतोषजनक उत्तर प्राप्त न होने पर आपके द्वारा किये गये उक्त कृत्यों (वित्तीय अनियमितता) के लिए क्यों न आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए आपकी 02 वेतन वृद्धि असंचायी प्रभाव से रोके जाने की कार्यवाही प्रस्तावित की जाये।

कारण बताओ नोटिस की प्रति
कारण बताओ नोटिस की प्रतिराज एक्सप्रेस, संवाददाता

जब इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार से बात करने का प्रयास किया गया तो, उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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