Shahdol : पत्नी के नाम पर अर्से से फर्जी कारोबार कर रहे उपयंत्री
पत्नी के नाम पर अर्से से फर्जी कारोबार कर रहे उपयंत्रीRaj Express

Shahdol : पत्नी के नाम पर अर्से से फर्जी कारोबार कर रहे उपयंत्री

शहडोल, मध्यप्रदेश : जांच में ही उलझ गई प्रमाणित भ्रष्टाचार की फाईल। माह बीता जिंप सीईओ की जांच आज भी उलझी।
Summary

मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम में स्पष्ट होने के बावजूद जिले के उपयंत्री ने अपनी पत्नी के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर लाखों डकार लिए। मामला सतह में आया तो, जिंप सीईओ ने जांच की बात कहीं, लेकिन वह भी शायद फीलगुड में उलझ गई।

शहडोल, मध्यप्रदेश। लगभग 2 माह पहले जिले की बुढ़ार जनपद अंतर्गत दर्जन भर पंचायतों का जिम्मा संभाले आरईएस के उपयंत्री मनोज शुक्ला के द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर लाखों का आहरण पंचायतों से किया गया, यह मामला प्रकाश में आने के बाद बुढ़ार जनपद से उपयंत्री को नोटिस देकर जवाब मांगा गया, लेकिन जिला पंचायत के द्वारा कोई नोटिस या जांच की जानकारी सामने नहीं आई, इधर जनपद द्वारा मांगे गये जवाब में उपयंत्री ने अपना पक्ष तो रखा, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद, वहां भी गोलमोल जवााब दिया गया। इस मामले में अभी तक पंचायत विभाग के जिम्मेदार किसी नतीजे तक नहीं पहुंचे हैं, जबकि यह पूरी तरह साफ था कि पंचायतों में मनोज शुक्ला ने अपनी पत्नी के नाम पर बनी बंद फर्म के नाम पर लाखों के भुगतान लिए, वह भी बिना कोई खरीदी किए ही, सिर्फ कमीशन पर बिलों को बेचा गया था।

गायब है प्रतिष्ठान :

जनपद पंचायत बुढ़ार के अंतर्गत पंचायतों में निर्माण सामग्री स्थानीय दुकानदारों और बुढ़ार के थोक व्यापारियों से न खरीदकर शहडोल के पटेल नगर से खरीदी की गई है, 5 से 10 किलोमीटर की दूरी को छोड़कर 50 किलोमीटर दूर स्थित उस ड्रीम हाऊस से छड़, गिट्टी, रेत से लेकर हर निर्माण सामग्री पंचायतों में सप्लाई हो रही है, जो शायद ड्रीम हाऊस के मालिक ने खरीदी ही नहीं है, मजे की बात तो यह है कि लाखों का भुगतान जिन बिलों पर किया जा रहा है, उन बिलों पर लिखे पते पर दुकान तक नहीं है।

लाखों का हुआ भुगतान :

उपयंत्री मनोज शुक्ला के द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती सुनीता शुक्ला के नाम पर पटेल नगर पुराना वार्ड नंबर 12 स्थित ड्रीम हाऊस नाम की दुकान के बिल मझौली सहित इनके प्रभार की अन्य पंचायतों में लगाये जा रहे हैं, बिलों में ईट, रेत, गिट्टी, लोहे की छड़ का विक्रय का उल्लेख है, मझौली में लगाये गये बिल क्रमांक 506 दिनांक 7 जनवरी 2022 को काटा गया, जिसमें 99 हजार 900 का भुगतान किया गया है, इसके अलावा 15 जनवरी 2022 को बिल क्रमांक 507 काटा गया, जिसमें 99 हजार 100 रूपये का भुगतान किया गया है। मजे की बात तो यह है कि 7 जनवरी को मझौली में एक लाख की बिक्री की गई और इसके अगले 8 दिनों तक दुकान की बिक्री शून्य रही, 506 के बाद अगला बिल क्रमांक 507 मझौली पंचायत के नाम 15 जनवरी पुन: एक लाख के आस-पास का काटा गया।

जिम्मेदारों ने दिया साथ :

मनोज शुक्ला द्वारा पंचायतों में ड्रीम हाऊस हार्डवेयर एण्ड इंटीरियर नामक फर्म से सप्लाई की जा रही है, फर्म का जीएसटी नंबर 23 डीओव्हीपीएस 7130 आर 1 जेडडब्ल्यू है, जो उनकी पत्नी के नाम पर वाणिज्यकर कार्यालय से पंजीकृत है। पंचायतों में लगे बिलों में फर्म का पता पटेल नगर वार्ड नंबर 12 दिया गया है, लेकिन उक्त स्थल पर फर्म नहीं है, जिस सामग्री का विक्रय पंचायतों में हो रहा है, उसे कथित फर्म खरीदती है या फिर सिर्फ विक्रय कर रही है, यह जांच का विषय है, लेकिन ड्रीम हाऊस के फेर में मनोज के जुगाड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा करने में अधिकारियों ने भी खुलकर साथ दिया।

सोहागपुर से भेजा बुढ़ार :

दो वर्ष पहले सोहागपुर जनपद की पंचायतों में भी ड्रीम हाऊस हार्डवेयर एण्ड इंटीरियर के बिल लगाये गये थे, उस दौरान मनोज शुक्ला आधा दर्जन पंचायतों के निर्माण कार्य के मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन मामला सामने आने के बाद जांच हुई तो, इन सबके पीछे के सूत्रधार उपयंत्री मनोज शुक्ला पर कार्यवाही हुई भी तो सिर्फ इतनी कि उन्हें सोहागपुर से बुढ़ार भेज दिया गया, कोरोना काल के जाते ही बुढ़ार जनपद की जिन 12 पंचायतों का प्रभार मनोज को दिया गया था, बीते कुछ माह से पंचायत में फिर वही पुराना खेल शुरु हो गया है।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Related Stories

No stories found.