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अवैध उत्खनन की फाईल
अवैध उत्खनन की फाईल|Shubham Tiwari
मध्य प्रदेश

शहडोल: नहीं मिल रही 38 लाख के अवैध उत्खनन की फाइल

शहडोल, मध्यप्रदेश : सोन नदी से बल्हौड़ पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा अवैध उत्खनन पर कार्यवाही नहीं की जा रही है, आज भी जारी है अवैध उत्खनन।

Shubham Tiwari

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश के कई जिलों सहित बिहार और उत्तरप्रदेश में हरित क्रांति और इन क्षेत्रों की जीवन रेखा माने जाने वाली स्वर्ण सलिला सोन नदी से बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन और कार्यवाही से पहले ही मामला दबा दिये जा रहे हैं। शहडोल, रीवा, सतना जिले की सीमा पर बनी बाणसागर परियोजना अंतर्गत सोन नदी से पड़ोस के उमरिया जिले की मानपुर तहसील अंतर्गत बल्हौड़ पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा बड़े पैमाने पर रेत की चोरी का मामला उजागर हुआ है।

जिसमें 4 माह पहले परियोजना के कार्यपालन यंत्री ने जांच कर लगभग 38 लाख 40 हजार रूपये की रिकवरी निकालते हुए उमरिया के खनिज अधिकारी श्रीमान सिंह को पत्र भी भेजा था, लेकिन संभवत: यह पूरा गड़बड़झाला उन्हीं की शह पर चल रहा था, जिस कारण इतने बड़े घोटाले की जांच की फाईल आपराधिक मामले और रिकवरी तक पहुंचने की बजाय फाईलों में ही दब गई।

यह था मामला

बाणसागर पक्काबांध संभाग क्रमांक 3 के कार्यपालन यंत्री ए.एन.शर्मा द्वारा परियोजना अंतर्गत डूब क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान 25 जुलाई को बल्हौड़ पंचायत द्वारा बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन करना पाया गया, उक्त मामले की जब कार्यपालन यंत्री ने जांच की तो उन्होंने ग्राम पंचायत बल्हौड़ के सरपंच और अन्य को इसमें दोषी पाया, जिसके बाद उन्होंने 1 जुलाई को विभागीय पत्र क्रमांक 1693 के माध्यम से जिला खनिज अधिकारी उमरिया को पूरे मामले से अवगत कराया, पत्र में कार्यपालन यंत्री ने उल्लेख किया कि सोन नदी से बाणसागर डैम के डूब क्षेत्र की सरहद के अंदर रेत उत्खनन पूर्णत: प्रतिबंधित होने के बाद भी पंचायत द्वारा इसे कारित करना पाया गया, जो पूर्णत: अवैधानिक व स्वेच्छाचारिता का द्योतक है।

किसने दी उत्खनन की अनुमति

पत्र में कार्यपालन यंत्री ने खनिज विभाग से इस संबंध में जानकारी भी चाही गई कि डूब क्षेत्र की सीमा के अंतर्गत रेत के उत्खनन की अनुमति कैसे दी गई, इसकी जानकारी भी विभाग को उपलब्ध कराई जाये, यही नहीं तत्काल प्रभाव से अवैध उत्खनन को रोकने की कार्यवाही की जाये और यदि उत्खनन की अनुज्ञा जारी की गई है तो उसे भी निरस्त किया जाये।

38 लाख की बेच दी थी रेत

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि डैम के पूर्ण भराव के अंदर 900 मीटर लंबाई के सोन नदी के क्षेत्र में औसत 20 मीटर चौड़ाई तथा 0.40 औसत गहराई में उत्खनन किया गया है, जिससे 7200 घन मीटर रेत निकाले जाने का अनुमान है, निरीक्षण के दौरान 1000 घन मीटर रेत स्टॉक में पाई भी गई, निकाली गई बालू की औसत कीमत के हिसाब से पंचायत द्वारा 38 लाख 40 हजार 120 रूपये की रेत अवैध रूप से निकाली गई। अत: संबंधित पंचायत से उक्त राशि वसूल कर राजकोष में जमा करने संबंधी कार्यवाही की जाये।

कार्यवाही तो दूर, नहीं रोका अवैध उत्खनन

कार्यपालन यंत्री द्वारा पकड़ी गई इतनी बड़ी गड़बड़ी और अवैध उत्खनन के मामले को खनिज विभाग के तथाकथित अधिकारी पंचायत के जिम्मेदारों और खनिज माफियाओं के साथ मिलकर पचा गये। 4 महीने के दौरान कार्यवाही और निरीक्षण तो दूर इस संदर्भ में बकौल खनिज अधिकारी...यह मामला मेरे समय का नहीं है, मैं सोमवार को इस मामले को दिखाता हूं, अचरज इस बात का है कि 3 राज्यों की जीवन रेखा मानी जाने वाली बाणसागर परियोजना के डूब क्षेत्र से रेत के अवैध उत्खनन जैसे बड़े मामले को खनिज अधिकारी स्वार्थ में पड़कर पचा ले गये, उन्हें न तो कार्यपालन यंत्री के पत्र की फिक्र रही और न ही अरबों की लागत से बने परियोजना पर अवैध उत्खनन से मंडरा रहे बादलों की।

आज भी ऑफ रिकार्ड जारी है उत्खनन

उक्त क्षेत्र से होकर गुजरने वाली स्वर्ण सलिला से रेत का अवैध उत्खनन अभी भी जारी होने की खबर है, इस मामले में स्थानीय सरपंच, सचिव सहित खनिज विभाग के तथाकथित अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार है, खबर है कि रीवा-सतना क्षेत्र के तथा कथित खनिज माफिया यहां से लाखों नहीं करोड़ों रूपये की रेत की अवैध निकासी कर चुके हैं और यह कारोबार आज भी चोरी छुपे जारी है, जिसमें खनिज सहित स्थानीय पुलिस की भी भूमिका कटघरे में हैं।

मैनें खनिज अधिकारी उमरिया को पत्र लिखा था, लेकिन उसका जवाब नहीं मिला।

ए.एन.शर्मा कार्यपालन यंत्री

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