बीईओ के संरक्षण में गुरुजी कर रहे फर्जीवाड़ा, अधीनस्थ को ही बनाया जांच अधिकारी
बीईओ के संरक्षण में गुरुजी कर रहे फर्जीवाड़ासांकेतिक चित्र

बीईओ के संरक्षण में गुरुजी कर रहे फर्जीवाड़ा, अधीनस्थ को ही बनाया जांच अधिकारी

शहडोल, मध्यप्रदेश : जिले में इस समय शिक्षा विभाग के अधिकारी कई प्रकार के अनैतिक कार्य को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।

शहडोल, मध्यप्रदेश। जिले में इस समय शिक्षा विभाग के अधिकारी कई प्रकार के अनैतिक कार्य को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, नया मामला जिला अंतर्गत विकासखंड सोहागपुर के खंड शिक्षा अधिकारी शिव प्रताप सिंह चंदेल द्वारा आर्थिक लाभ प्राप्त करते हुए 2017 से विद्यालय से अनुपस्थित शिक्षक अजय सिंह को बिना स्कूल आए ही लगातार 3 वर्षों से भुगतान करते चले आ रहे हैं, बीईओ के रिश्तेदार होने के कारण बिना उपस्थिति के ही संकुल प्राचार्य द्वारा अजय सिंह परमार को बीईओ कार्यालय सोहागपुर में संलग्न होना बताकर उनकी उपस्थिति उक्त कार्यालय भेज दी जा रही थी, कार्यालय में शिक्षक को संलग्न किए जाने का किसी भी प्रकार का वैधानिक आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा नहीं किया गया है। इसके बाद भी अजय सिंह परमार को अभी तक छूट दी गई है।

मनाही के बाद संलग्नीकरण :

शासन एवं विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों में शिक्षकों से गैर शिक्षक व कार्य करने का अन्य स्थानों पर संलग्न किए जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा ऐसा होने पर आहरण अधिकारी से भुगतान किए गए, वेतन की वसूली के लिए भी स्पष्ट किया गया है। इसके बाद भी नियम विरुद्ध तरीके से उक्त शिक्षक का वेतन भुगतान किया जा रहा है, वर्तमान बीईओ शिव प्रताप सिंह चंदेल इस तरह के कार्य करने में माहिर माने जाते हैं, इस तरह के मामले पर पहले भी कमिश्नर द्वारा उन्हें निलंबित भी किया गया था, किंतु आज तक कोर्ट से स्टे लेकर बचने में सफल रहे और बखूबी अपना काम कर रहे हैं।

3 साल से नहीं जा रहे स्कूल :

स्कूल में अपनी 3 साल से गैर उपस्थिति के बाद भी भुगतान पाने वाले शिक्षक अजय सिंह बीईओ शिव प्रताप सिंह परमार के रिश्तेदार बताए जाते हैं, इस कारण से उन्हें संकुल प्रभारी द्वारा दबाव वश डीईओ कार्यालय में पदस्थ दिखाया जाता रहा है, जबकि आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार उक्त शिक्षक आज तक न ही स्कूल पर उपस्थिति दिए हैं और न ही डीईओ के कार्यालय पर इसके बावजूद भी बकायदा 3 साल से लगातार बिना कार्य के भुगतान किया जा रहा है, इस तरह से कार्य अपने आप में निंदनीय है और इसकी शिकायत भी कई बार हो चुकी है।

गुरुजी के फर्जीवाड़ा पर आरटीआई की मुहर :

तीन वर्षों से स्कूल से अनुपस्थित होते हुए भी शिक्षक अजय सिंह परमार जिसे माध्यमिक शिक्षा छतवई पर बच्चों को शिक्षा देने के लिए गुरुजी बनाकर भेजा गया था, लेकिन बच्चों को शिक्षा तो नहीं दी और अधिकारियों से रिश्तेदारी और चापलूसी का रिश्ता निभा कर निश्चित रूप से बड़ा कारनामा करते हुए 3 साल से स्कूल तो नहीं गए, लेकिन अपने आप को बीईओ शिव प्रताप सिंह चंदेल के रिश्तेदार होने का फायदा उठाते हुए डीईओ कार्यालय में पदस्थ प्रदर्शित करते हुए बिना स्कूल आए ही लगातार भुगतान उठा रहे हैं, इस बात पर आरटीआई ने मुहर लगाते हुए फर्जीवाड़ा पर मुहर लगा दी है।

जांच से अधिकारी का छूट रहा पसीना :

छतवई स्कूल से शिक्षक अजय सिंह को बिना स्कूल में उपस्थित हुए बीईओ कार्यालय में सदस्य दिखाकर 3 वर्षों से भुगतान किया जा रहा है , इस विषय पर जब शिकायत हुई तो बीईओ श्री चंदेल सहित अन्य अधिकारियों के पसीने छूटने लगे हैं, संकुल प्राचार्य द्वारा उच्च अधिकारी के दबाव में आकर उनके रिश्तेदार होने का लाभ देते हुए बकायदा उपस्थिति पत्रक प्रति माह का भरकर बाकायदा उच्च अधिकारियों को प्रेषित करते रहे हैं, अब आरटीआई से यह फर्जीवाड़ा प्रमाणित हो जाने के बाद अधिकारियों के साथ-साथ संकुल प्राचार्य भी इस फर्जीवाड़ा में शामिल होने की चर्चा है।

अधीनस्थ को बनाया था जांच अधिकारी :

शिकायतकर्ता उन्हें बताया कि इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए उनके द्वारा लोकायुक्त में शिकायत की थी, जिस बात पर संज्ञान लेते हुए विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा शिव प्रताप सिंह चंदेल की जांच उनके ही अधीनस्थ दो प्राचार्य को जांच अधिकारी बनाया गया था, उन जांच अधिकारी को अन्य स्वात्यों का भुगतान विकास खंड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर द्वारा ही किया जाता था, सोचनीय पहलू यह है कि जिन लोगों का भुगतान या अन्य प्रकार की जवाबदारी को तय करने का काम जिस अधिकारी का होगा, उसी अधिकारी की जांच निचले स्तर के प्राचार्य कैसे कर सकते हैं, किस प्रकार इस जांच पर अधीनस्थ कर्मचारी न्याय कर सकते हैं। शिकायत होने के बाद भी शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारी एकजुटता का परिचय देते हुए विभाग के अधिकारियों को बचाने के साथ-साथ अधीनस्थ शिक्षकों के गलतियों को छुपाने के लिए कई गलतियां करते जा रहे हैं।

कमिश्नर ने बदला जांच अधिकारी :

अनुपस्थित शिक्षक ले रहे भुगतान संबंधित फर्जीवाड़ा पर कमिश्नर शहडोल द्वारा शिकायत मिलने के बाद पत्र क्रमांक/फ़ा.141-21/ विकास-06/ शिकायत (शहडोल)21/2929-4 शहडोल, 03/09/21 आदेश जारी करते हुए इस मामले पर जांच अधिकारी को ही बदल दिया गया है और आने वाले समय में कड़ाई से जांच करते हुए उक्त मामले पर कार्यवाही की बात भी कही गई है, निश्चित रूप से जिला शिक्षा अधिकारी सहित विकास खंड शिक्षा अधिकारियों के द्वारा इस तरह से मिलकर फर्जीवाड़ा करना बेहद ही शर्मनाक कार्य है, सिर्फ बीईओ के रिश्तेदार होने के कारण ही अगर कोई शिक्षक बिना स्कूल गए ब'चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए भुगतान उठा रहा है।

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