Shahdol : अपात्र, शिक्षा विभाग में दे रहे सेवाएं!
अपात्र शिक्षा विभाग में दे रहे सेवाएं!Syed Dabeer Hussain - RE

Shahdol : अपात्र, शिक्षा विभाग में दे रहे सेवाएं!

शहडोल, मध्यप्रदेश : तीसरी संतान के बाद भी शासकीय कर रहे नौकरी। रद्दी की टोकरी में पहुंचा मप्र शासन सामान्य विभाग का पत्र। जानकर अंजान बना जिला प्रशासन, कार्यवाही की दरकार।
Summary

कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह गया है। 26 जनवरी 2001 के बाद जिन शिक्षकों की तीन संताने हैं, उन्हें चिन्हित कर नोटिस देने के बाद वर्ष 2020 में कार्यवाही की बजाय बंदर घुड़की से काम चलाया गया है।

शहडोल, मध्यप्रदेश। सरकारी कर्मचारियों में तीसरी संतान की जानकारी देने के आदेश के बाद से हड़कंप मचा था, सबसे ज्यादा खराब स्थिति शिक्षा विभाग में बनीं हुई है। सैकड़ों की संख्या में शिक्षा विभाग में ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी 26 जनवरी 2001 के बाद की तीसरी संतान हैं, विभाग के पास पूरी जानकारी मौजूद हैं, मजे की बात तो यह है कि लगभग लोगों को कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा जून 2020 में नोटिस भी जारी हुए थे, जिसमें सहायक आयुक्त ने 30 जून तक कर्मचारियों से जवाब मांगा था, जवाब न मिलने पर एक पक्षीय कार्यवाही करने का भी उल्लेख पत्र के माध्यम से किया गया था, लेकिन उसके बाद भी आज तक कार्यवाही न होना अधिकारियों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करता है।

प्रधानाध्यापकों की विभाग के पास है लिस्ट :

कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग के पास ऐसे शिक्षकों की लिस्ट मौजूद हैं, जिनके 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संताने हैं, जिनमें सोहागपुर विकास खण्ड के आर.के. इमिलिया प्रधानाध्यापक शासकीय माध्यमिक विद्यालय जुगवारी पंचगांव, विकास खण्ड बुढ़ार के रूपा सिंह प्रधानाध्यापक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झींकबिजुरी संकुल झींकबिजुरी, रामदास सिंह कंवर प्रधानाध्यापक शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय खाम्हीडोल, विश्वनाथ प्रसाद प्रधानाध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय कन्या बरियानटोला खाम्हीडोल, रामकुमार प्रजापति प्रधानाध्यापक शासकीय माध्यमिक विद्यालय सिंघली संकुल खाम्हीडोल, विकास खण्ड गोहपारू में भगवान दास सिंह प्रधानाध्यापक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लफदा संकुल गुर्रा एवं भैयालाल प्रजापति प्रधानाध्यापक शासकीय माध्यमिक विद्यालय बनचाचर संकुल मसीरा के 26 जनवरी 2001 के पश्चात तीसरे बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन जानकारी होने के बावजूद विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।

यह कहती गाइड लाईन :

शिक्षा विभाग में 26 जनवरी 2001 के बाद हुई तीसरी संतान वाले अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक हो सकती हैं। कारण विभाग में लगभग 2 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक अब तक चारों ब्लाकों से कर्मचारी ऐसे सामने आए हैं, जिनकी 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान का जन्म हुआ है। जिन्हें नोटिस जारी कर वस्तु स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है, लेकिन उसके बाद भी आज तक जिम्मेदार इसमें कुछ नहीं कर पाए।

यह है नियम :

दो से अधिक संतान के संबंध में मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल के परिपत्र 10 मई 2000 द्वारा मप्र सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 6 के उपनियम-4 के उपनियम के तहत तीसरी संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है। इस संबंध में स्पष्ट आदेश है कि कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतान हैं, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हो वह किसी सेवा या पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने माना दो से ज्यादा संतान वाले अपात्र :

हाईकोर्ट की बेंच ने 30 जून 2021 के एक मामले डब्लयू - ए 1381/2019 में पारित निर्णय की मानें तो 26 जनवरी 2001 के बाद जिन सरकारी शिक्षकों एवं कर्मचारियों की 2 से ज्यादा संतानें हुई हैं, उन्हें अपात्र कर दिया जाएगा। इस आदेश के बाद सरकारी सेवकों में हड़कंप मच गया था। एक मामले में अपीलार्थी ने म.प्र. शासन के खिलाफ रिट पिटिशन दायर की थी। जिसमें अपीलार्थी ने कहा था, कि नौकरी लगने के विज्ञापन में तीन बच्चों की जानकारी का नहीं लिखा है, इसके लिए उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह कहते हुए अपील को खारिज कर दिया कि सिविल सर्विसेज नियम 2001 पहले बने है। नियम में साफ लिखा है कि शासकीय सेवक के दो से अधिक बच्चे होने को अवाचार माना गया है, यदि उनमें से 1 का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ हो।

इनका कहना है :

मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है, जल्द ही पूरे मामले की फाईल मंगवाकर शासन के दिशा-निर्देशानुसार कार्यवाही की जायेगी।

रणजीत सिंह धुर्वे, सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग, शहडोल

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