Shahdol : साहब...यहां एक लाख है जिंदगी की कीमत
साहब...यहां एक लाख है जिंदगी की कीमतराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Shahdol : साहब...यहां एक लाख है जिंदगी की कीमत

शहडोल, मध्यप्रदेश : सोडा फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही से मजदूर की मौत। मृत शरीर को लेकर 3 अस्पतालों का कराया सफर। ठेकेदार ने गरीब परिवार को मुआवजा के तौर पर 1 लाख देने का किया वायदा।

शहडोल, मध्यप्रदेश। संभाग के अनूपपुर एवं शहडोल जिले के बीचो-बीच संचालित कास्टिक सोडा यूनिट मिल अमलाई में रात्रि कार्य के दौरान सिंहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कठौतिया के निवासी कमलेश कोल नामक युवक की कार्य स्थल पर मृत्यु हो गई, लेकिन सोडा यूनिट के प्रबंधक ने मृत्यु की बात को छुपा कर मृतक की तबीयत खराब हो जाने का हवाला देकर रातों-रात उसे सबसे पहले सोडा यूनिट के अस्पताल पर ले जाया गया, उसके बाद उसे एंबुलेंस में ही जांच करते हुए सीरियस बता कर ओरियंट पेपर मिल के चिकित्सालय पर ले जाया गया, वहां पर भी सिर्फ फॉर्मेलिटी अदा करते हुए आगे की साजिश रचकर उसे बुढार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया जहां पर मजदूर कमलेश को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिया गया।

3 अस्पतालों के लगाये चक्कर :

मृतक कमलेश पूरी तरह से स्वस्थ था और कंपनी के ठेकेदार द्वारा शनिवार की शाम को सोडा यूनिट के फैक्ट्री के अंदर दाखिल करवाया गया था, जबकि सोमवार की रात को नमक की रेलवे की खेप को खाली करने का काम करना था। फिर भी 2 दिन पहले से मजदूरों को दाखिल करके रखना अपने आप में एक बड़ा सवाल है और फिर सोमवार की रात रेलवे की वैगन से नमक खाली करते समय अचानक मौका स्थल पर ही उसकी मौत हो गई थी, लेकिन कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी अपने आप को पाक-साफ और सुरक्षित रखने के लिए मौका स्थल पर मृत शरीर को दबे पांव एंबुलेंस में डालकर 3 अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे।

यह कहते हैं कायदे :

शनिवार को कंपनी के ठेकेदार नामक व्यक्ति को रेलवे का नमक वाली रैक को खाली कराए जाने का काम मिला था, 2- 3 दिन पहले से ही लगभग 183 लोगों को उनके इशारे पर ही कंपनी ने अंदर दाखिल कराया गया था और 183 मजदूरों को कंपनी के द्वारा किसी तरह का नाम पता या वेरीफिकेशन किए बगैर ही प्रवेश दे दिया गया था। जबकि नियमत: जिस मजदूर का एसआईपीएफ नहीं किया गया हो, उस मजदूर को कंपनी के अंदर प्रवेश देने का कोई नियम ही नहीं है, इसके अलावा कोरोना के दोनों टीका न लगे होने पर भी प्रवेश वर्जित है।

आंख मूंदकर प्रबंधन ने दिया प्रवेश :

प्रबंधन द्वारा बगैर जांच किए कंपनी में अपने हित साधने के लिए आंख मूंदकर कंपनी के अंदर मजदूर को प्रवेश दे दिया गया था। जबकि किसी भी प्राइवेट कंपनी के अंदर किसी भी प्राइवेट आदमी को घुसने का अधिकार नहीं होता है और वही व्यक्ति कंपनी के अंदर जा सकता है, जो व्यक्ति कंपनी का रेगुलर कामगार हो या फिर जो प्राइवेट मजदूर होते हैं , उनका एसआईपीएफ कटा हो ताकि कोई दुर्घटना हो जाए तो मुआवजा के रूप में उसके परिजनों को उसका लाभ मिल सके, लेकिन कंपनी के जिम्मेदारों द्वारा लापरवाही की गई, खबर है कि बड़ी संख्या में मजदूर अंदर गए और इनका किसी प्रकार से नाम पता तक नोट करना मुनासिब नहीं समझा गया।

तो क्या ठेकेदार चला रहा कंपनी :

कमलेश कोल नामक मजदूर की मौत के बाद जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि कंपनी के चहेते ठेकेदार के इशारे से ही 183 मजदूरों को शनिवार को अंदर प्रवेश का रास्ता खोल दिया गया था , जिम्मेदार गार्डों ने बताया कि किसी भी प्राइवेट ठेकेदार के आदमी को सिर्फ गिनती करने के साथ ही प्रवेश दे दी जाती है तो, क्या इतने बड़े सोडा यूनिट को निजी ठेकेदार ही चला रहे हैं या फिर यहां भी कोई बड़े सांठ-गांठ की साजिश होती रहती है, जो अपने हद के प्रवेश द्वार पर अंदर जाते हुए मजदूरों का नाम पता नोट करना भी मुनासिब नहीं समझती, अगर कोई साधारण आदमी भी कारखाना के इर्द-गिर्द घूमता है तो, उसे भी कंपनी पूछ लेती है कि आपका मकसद क्या है तो, फिर कंपनी के अंदर काम पर जाने वाले मजदूर का वेरीफिकेशन करना मुनासिब क्यों नहीं समझती या यह कह सकते हैं कि प्राइवेट ठेकेदार के साथ संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की सांठ-गांठ के चलते ठेकेदार के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जा रही।

यह कहना है परिजनों का :

कमलेश कोल नामक मजदूर की मौत के मामले पर परिजनों ने कहा कि गरीबी के कारण लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय करके काम के लिए गए थे और पहला रैक लगभग 7 बज कर 30 मिनट खाली करने के बाद खाना खाकर लगभग 9:40 पर जब दूसरे रैक को खाली करने में लगे थे, तभी नमक के ढेर के ऊपर फावड़ा चलाता हुआ कमलेश गिर पड़ा और फिर बेहोशी के हालत में उसे उठाकर तत्काल उपलब्ध एंबुलेंस में लोड करवा कर अस्पताल के लिए निकल गये, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही कमलेश की मृत्यु हो चुकी थी और अब ठेकेदार के द्वारा उसे 15 दिनों के अंदर 100000 मुआवजा देने की बात कही गई है , साथ ही तात्कालिक सहायता के रूप में 5000 तत्काल ठेकेदार के द्वारा दिया गया था।

ठेकेदार कर रहा जेब गर्म :

ठेकेदार संतोष मिश्रा के अलावा सोडा फैक्ट्री सहित ओरियंट पेपर मिल में ऐसे कई ठेकेदार हैं, जिनके अंडर में सैकड़ों मजदूर काम करते हैं और जितनी मजदूरी लेबरों को मिलनी चाहिए उस पर कमीशन सेट करते हुए ठेकेदार अपनी जेबें गर्म करते हैं, ठेकेदार द्वारा कमलेश की जिंदगी की कीमत 1 लाख तय कर दी है, अगर नियमों के तहत कमलेश कंपनी के अंदर मजदूरी करने गया होता तो, उसके परिजनों को नियमों के तहत मुआवजा दिया गया, यह लापरवाही अब कंपनी की कहें जो बिना वेरिफिकेशन के ही कमलेश जैसे हजारों मजदूरों को बिना जांच परख के अंदर कर लेती है और अपना हित साध लेती है या फिर जैसे ठेकेदार की कहे जो अपने कमाई के लिए लेबरों की सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर सिर्फ अपना पैसा बचाने में लगे हैं।

इनका कहना है :

मजदूर हादसे का शिकार नहीं हुआ है, कार्डियक अरेस्ट जैसे गिरकर मूर्छित हो गया था, मजदूर ठेकेदार का है, जिसे तत्काल अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां पर डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिया।

अरविंद शुक्ला, एचआर हेड, सोडा कॉस्टिक, अमलाई

11.30 बजे कंपनी के द्वारा खबर दी गई, परिजन उसके साथ थे, जांच के बाद पता चलेगा, मौत किस वजह से हुई है।

नरेन्द्र सिंह राजपूत, थाना प्रभारी, चचाई

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