खूनी हाईवे ने फिर लील ली जिंदगी
खूनी हाईवे ने फिर लील ली जिंदगी|Afsar Khan
मध्य प्रदेश

खूनी हाईवे ने फिर लील ली जिंदगी

केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय व इंडियन रोड कांग्रेस के आंकड़ों के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा मौते सड़क हादसों में...

Afsar Khan

राज एक्सप्रेस। केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय व इंडियन रोड कांग्रेस के आंकड़ों के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा मौते सड़क हादसों में होती हैं, वो भी हाईवे पर मौत की कीमत कोई चुका भी नहीं सकता, लेकिन सड़क निर्माण में की गई तकनीकी खामियों के चलते 60 प्रतिशत मौतें होती हैं, 3 साल पहले हर्री में हुए हादसे के बाद अगर जिम्मेदार सबक ले-लेते तो, शायद गुरूवार को दर्दनाक हादसे में लालपुर के रामानुज पाल की मौत न होती और परिवार के ही छोटू पाल अपंग न होते, लेकिन अपना जमीर बेच चुके सड़क विकास निगम के अधिकारियों की लापरवाही के चलते परिवार का चिराग हमेशा के बुझ गया। जिसकी भरपाई करना नामुमकिन है।

फिर खूनी हुआ एनएच-43

2017 में आवागमन शहडोल से लेकर छत्तीसगढ़ के बार्डर तक नए एनएच-43 पर सड़क विकास निगम ने शुरू कराया था, जब से लेकर अब तक मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, कई परिवारों ने अपनों को इस मार्ग पर हमेशा के लिए खो दिया, गुरूवार को भी ऐसा ही कुछ हुआ, दोपहर में अज्ञात वाहन ने बाईक सवारों रौंदते हुए फरार हो गया, घटना स्थल पर एक युवक रामानुज पाल की मौत हो गई, वहीं बाईक में सवार एक अन्य युवक छोटू पाल का पैर अलग हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, हादसा इतना ह्दय विदारक था कि मृतक के शरीर के कई अंग सड़क पर बिखरे हुए पड़े थे।

एनएच-43 में हुए हादसे में एक की मौत

एनएच-43 में हुए हादसे में एक की मौत

विलाप करता रहा परिवार

एनएच-43 के कंचनपुर सरफा पुल के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद मृतक के परिजन घंटो मार्ग पर ही विलाप करते रहे, गुस्साये ग्रामीणों ने घंटो राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, खासतौर पर ग्रामीणों का आक्रोश बड़े वाहनों की तेज रफ्तार और आवाजाही को लेकर देखने को मिला, सूचना देने के बाद भी 100 डॉयल, पुलिस और प्रशासन की ओर से किसी के न आने के चलते भी एनएच ग्रामीणों ने दोनों ही ओर से जाम कर दिया, घंटो दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें भी देखने को मिली।

4 घंटे बंद रहा आवागमन

100 डॉयल और पुलिस के न पहुंचने पर ग्रामीणों में काफी आक्रोश भी देखने को मिला, राहगीरों को भी इसका सामना करना पड़ा, सोहागपुर थाना क्षेत्र में घटी घटना के बाद भी सोहागपुर पुलिस के न पहुंचने से ग्रामीणों में काफी आक्रोश था, हालांकि बुढ़ार पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में किया, लेकिन ग्रामीण सोहागपुर पुलिस के आ जाने तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर डटे रहे, 4 घंटे के बाद सोहागपुर पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद जाम खुल सका।

आखिर कौन है हादसे का जिम्मेदार

अधिकतर लोगों का यह मत होगा कि हादसे के पीछे अज्ञात वाहन के चालक की लापरवाही होगी, जिसने बाईक सवार को बेरहमी से ठोकर मारने के साथ रौंद दिया, जिसके चलते उसकी मौत हो गई, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि इस हादसे में डार्क स्पॉट की वजह भी शामिल है, जो कि सड़क के निर्माण के दौरान तकनीकी खामी के चलते हादसों को कारित करता है। 60 फीसदी सड़क हादसे इसी के चलते होते हैं।

सड़क निर्माण की जिम्मेदारी भोपाल की दिलीप बिल्डकॉन कंपनी को सौंपी गई थी, मॉनिटरिंग का जिम्मा जयपुर की थीम इंजीनियरिंग को दिया गया था और इन सबकी निगरानी सड़क विकास निगम को करनी थी, निर्माण के बाद 4 साल तक सुरक्षा सांकेतकों और सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी भी एनएचआई ने ठेका कंपनी और मॉनिटरिंग एजेंसी को सौंपी थी, इसके एवज में मोटी रकम भी सरकार के द्वारा दी जा रही है, निर्माण के बाद से कथित कंपनी रफूचक्कर है, सुरक्षा सांकेतकों का तो अता-पता ही नहीं है, वहीं आवागमन शुरू होने से ही गति सांकेतक मार्ग से गायब हैं। क्या 2017 की तरह इस बार भी पुलिस इन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित करेगी या फिर कुछ दिनों के बाद मामला खत्म हो जायेगा।

अगर सड़क के निर्माण में तकनीकी खामी और अनुबंधों की शर्तों का उल्लंघन हो रहा है तो, इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, पूरे मामले की जांच कराई जायेगी, सड़क हादसों को रोकना पुलिस की पहली प्राथमिकता है, दोषियों पर कार्यवाही होगी।

प्रतिमा एस. मैथ्यू अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहडोल

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