संजय गांधी ताप विद्युत गृह
संजय गांधी ताप विद्युत गृह|Shubham Tiwari
मध्य प्रदेश

सेल्स अधिकारी ने नोटरी के आधार पर बदल दिया अनुबंध

शहडोल, मध्यप्रदेश : सेल्स अधिकारी ने पद का दुरूपयोग कर नोटरी के आधार पर बदला अनुबंध, थर्मल पॉवर प्लांट को बना दिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी।

Shubham Tiwari

हाइलाइट्स :

  • सेल्स अधिकारी ने नोटरी के आधार पर बदल दिया अनुबंध

  • संजय गांधी के अधिकारी ने कोल व्यवसायी प्रमोद जैन को पहुंचाया लाभ

  • एस.के.जैन ने थर्मल पॉवर प्लांट को बना दिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

  • ऑयरन इस्पात का कोयला भण्डारण भी कटघरे में

राज एक्सप्रेस। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के संजय गांधी ताप विद्युत गृह में एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के अमलाई ओसीएम से कोयला क्रय करके उसकी लिफ्टिंग का कार्य छत्तीसगढ़ के कोल कारोबारी प्रमोद जैन की ऑयरन इस्पात एवं पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपा था, कोयला अमलाई ओसीएम से सीधे अमलाई सायडिंग होते हुए संजय गांधी ताप विद्युत गृह पहुंचना था, लेकिन प्रमोद जैन की फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए वर्तमान में कोयले का काम देखने वाले सहायक मुख्य अभियंता एस.के.जैन ने शपथ पत्र के आधार पर कोयले को धिरौल स्थित कोल वासरी ले जाने और ईटीपी ऑयरन इस्पात के लिए जारी करने के लिए आदेश कोल प्रबंधन को दे दिये, सेल्स अफसर ने भी हमाम में शामिल होते हुए हरी झण्डी दे दी।

शपथ पत्र बड़ा या कार्यादेश :

संजय गांधी ताप विद्युत गृह परियोजना म.प्र. शासन का उपक्रम है, जब शासन के द्वारा प्रमोद जैन की आयरन इस्पात को कार्यादेश एनआईटी की शर्तों के तहत, जारी कर दिया गया, तो फिर छत्तीसगढ़ के स्टॉम्प के सहारे कोयले का काम देखने वाले मौजूदा दौर में सहायक मुख्य अभियंता एस.के.जैन ने शपथ पत्र देते हुए कोयले को अमलाई ओसीएम से धिरौल कोल वासरी होते हुए अमलाई सायडिंग, फिर संजय गांधी ताप विद्युत गृह के लिए शपथ पत्र दिया और ईटीपी भी विक्रेता के द्वारा क्रेता की न काटकर मिडिल मैन ऑयरन इस्पात को कटने लगी, जबकि नियमों के तहत कार्यपालिक दण्डाधिकारी ही किसी भी प्रकार के शासकीय दस्तावेजों को म.प्र. शासन के अनुसार प्रमाणित कर सकता है, लेकिन प्रमोद जैन को फायदा पहुंचाने के लिए एस.के.जैन ने सारी हदें पार कर दी, हालांकि शिकायत के बाद उन्हें पद से हटा दिया और अभी जांच भी जारी है।

सेल्स अधिकारी ने पद का किया दुरूपयोग :

इस पूरे मामले में सोहागपुर क्षेत्र में तैनात क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक प्रसन्नजीत बैनर्जी की भूमिका भी संदेह के दायरे में है, कार्यादेश जारी होने के बाद कोयला अमलाई ओसीएम से सायडिंग होते हुए संजय गांधी ताप विद्युत गृह जा रहा था, लेकिन एस.के.जैन के एक नोटरी के आधार पर बिना बिलासपुर मुख्यालय के अनुमोदन के प्रमोद जैन को फायदा पहुंचाने के लिए कोयले को धिरौल स्थित कोल वासरी भेजने के आदेश अमलाई ओसीएम को दे दिये गये और ईटीपी भी ऑयरन इस्पात के लिए जारी करवा दी गई, जबकि एक बार डिलेवरी आर्डर जारी होने के बाद किसी भी कीमत पर उसे बदला नहीं जा सकता, यानी कि गन्तव्य स्थान और पार्टी का नाम नहीं बदला जा सकता, इसके सख्त निर्देश सर्तकता विभाग बिलासपुर के द्वारा जारी किये गये हैं।

कटघरे में अनूपपुर खनिज विभाग :

वैसे तो नियम है कि कोयला खदान से 50 किलोमीटर की दूरी पर कोयले का भण्डारण या फिर किसी उद्योग को भण्डारण की अनुमति नियमों के तहत दी जा सकती है, संजय गांधी पावर प्लांट ने केवल कोयले को प्लांट तक पहुंचाने के लिए ऑयरन इस्पात को मिडिल मैन का काम दिया था, कोयले को वॉश करने का कोई आदेश नहीं था, क्योंकि स्टीम कोयला पॉवर प्लांट जाना था। ऐसा कराकर प्रमोद जैन ने दोहरा फायदा लिया, अपने स्टॉक में कोयले को डम्प कराया ,फिर उसी आधार पर कोयले को संजय गांधी सहित दूसरी जगह भेज दिया। जबकि क्रेता और विक्रेता के नाम पर ही ईटीपी जारी हो सकती है, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा से ऑयरन इस्पात को 7 रिजेक्टेड कोल के रैक अमलाई स्टेशन के माध्यम से प्राप्त हुए, बताया गया है कि जी-7 कोयले में डोलो-चार यानी की रिजेक्ट कोल को मिलाकर भेजा गया और शासन के साथ गड़बड़ी और भ्रष्टाचार किया गया। बहरहाल अब यह मामला सर्तकता विभाग और सीबीआई के समक्ष जल्द ही पहुंचने वाला है, जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।

आओसी होने के नाते शपथ पत्र दिया जा सकता है, चाहे वह छत्तीसगढ़ का हो या मध्यप्रदेश का, हमारे द्वारा कालरी द्वारा खराब कोयला उपलब्ध कराने पर 6 करोड़ का दावा भी ठोका गया है।

एस.के.जैन, सहायक मुख्य अभियंता, संजय गांधी ताप विद्युत गृह परियोजना

शपथ पत्र के आधार पर हमने रॉयल्टी काटी है, हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में संजय गांधी और ऑयरन इस्पात के लोग जाने, ई-खनिज में बैठे राजेश शर्मा से हर बात करके ही हमने काम किया है, कलेक्टर के द्वारा मांगे गये जवाब का उत्तर भी हमने दे दिया है।

प्रसन्नजीत बैनर्जी, क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक, सोहागपुर क्षेत्र

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