Shahdol : वसूली बढ़ा दी और हड़ताल पर चले गये सफाई कर्मचारी
वसूली बढ़ा दी और हड़ताल पर चले गये सफाई कर्मचारीराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Shahdol : वसूली बढ़ा दी और हड़ताल पर चले गये सफाई कर्मचारी

शहडोल, मध्यप्रदेश : कोविड के समय बंद हुआ था बस अड्डे पर वसूली का ठेका। हड़ताल पर गये नपा कर्मियों के कारण चरमराई व्यवस्था। इधर आधी रात से खुद सड़कों पर सफाई कर रहे सीएमओ।
Summary

संभाग का सबसे बड़ा राजीव गांधी बस अड्डा साफ-सफाई न होने के कारण गंदगी से सराबोर है, जबकि नपा के राजस्व में पूर्व से करीब 50 से 60 प्रतिशत वसूली बढ़ चुकी है, जिम्मेदार सफाई न होने का कारण कर्मचारियों की हड़ताल बता रहे हैं, वहीं बस अड्डे को वाहन मालिकों ने अपना गैराज बना दिया है।

शहडोल, मध्यप्रदेश। कोरोना जैसे भंयकर महामारी के काल के बावजूद नपा प्रशासन ने उससे सीख नहीं ली, कारण चाहे कर्मचारियों की हड़ताल हो या फिर जिम्मेदारों में मैंनेजमेंट की कमी का हो, वर्षों बाद यह पहला मौका होगा, जब बस व अन्य टैक्सी परमिट वाले वाहनों के मालिक स्टैण्ड में पहले से 'यादा शुल्क दे रहे हैं और सफाई लगभग दम तोड़ चुकी है। बजबजाती नालियां, हर तरफ कचरे का ढेर और गंदगी का आलम अब बस अड्डे की पहचान बनता जा रहा है, हालांकि नपा के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नगर के कई हिस्सों में इस तरह के हालात बनें हुए हैं, लेकिन बस स्टैण्ड जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थान जहां प्रतिदिन सैकड़ोंं लोगों की आवाजाही है, यहां गंदगी होने से उसका असर सीधे आमजनों के स्वास्थ्य व प्रशासन की छवि पर पड़ रहा है।

पूरे अड्डे पर फैली गंदगी :

पूरे बस अड्डे पर फैली गंदगी अब यहां की पहचान बनती जा रही है, सार्वजनिक शौचालयों के साथ ही चारों तरफ की नालियां पहले से ही गंदगी से लबरेज थी, साफ-सफाई के अभाव में अब पूरे परिसर में जगह-जगह कचरा फैला हुआ है, इस कचरे के कारण मच्छर और मक्खियां पनप रहे हैं, जिनसे बीमारियां सर उठा सकती हैं।

बस मालिकों ने बना दिया गैराज :

इधर कुछ महीनों से विभिन्न बस मालिकों के द्वारा पुन: बस अड्डे को गैराज का रूप दे दिया गया है, नियमत: परमिट आवंटन के दौरान सभी बस मालिका अपने स्वयं के गैराज और यार्ड होने का प्रमाणिकरण शपथ पत्र में करते हैं, लेकिन उनके खुद के यार्ड कहां है, यह तो वही जाने, लेकिन चौबिसों घंटे बस अड्डे पर खड़ी बसें और उसकी मरम्मत में लगे मिस्त्रियों के आलावा परिसर में फैला गंदा ऑयल व अन्य सामग्री प्रशासनिक जिम्मेदारों को मुंह चिढ़ा रही है, बस रवाना होने से आधे घंटे पहले अड्डे पर बस के पहुंचने जैसे आदेश कब के काफूर हो चुके हैं।

बस एसोशिएसन की आपत्ति : p-16

शहडोल बस एसोसिएशन के अध्यक्ष महंत गौतम ने नगरपालिका प्रशासन पर आरोप लगाये हैं कि उनके द्वारा पहले से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसे सभी बस मालिक दे रहे हैं, लेकिन बदले में सफाई व्यवस्थाओं को बढ़ाने की जगह लगभग बंद सा कर दिया गया है, जिसका हम विरोध करते हैं, श्री गौतम ने जिला प्रशासन से इस संदर्भ में ध्यान देने की मांग करते हुए, बस अड्डे जैसे सार्वजनिक स्थान को प्राथमिक तौर पर स्व'छ रखने की भी मांग की है।

वसूला जा रहा मनमाना शुल्क :

राजीव ट्रेवल्स के संचालक एवं अनूपपुर मोटर यूनियन के कार्यवाहक अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने कहा कि, पूर्व में नगरपालिका के द्वारा यहां स्टैण्ड की वसूली का कार्य ठेके पर दिया जाता था, लेकिन कोरोना काल में बसें बंद हो गईं तो नगर पालिका प्रशासन ने राहत की बीन बजाकर ठेका बंद कर दिया और वसूली नगर पालिका के कर्मचारियों से कराई जाने लगी, कोरोना काल के खत्म होने के बाद यहां वसूली और तेज कर दी गई, बस मालिकों ने राजस्व व साफ-सफाई के नाम पर विरोध तो नहीं किया, लेकिन अब सफाई शून्य होने के कारण यहां की जा रही वसूली के खिलाफ जल्द ही जिला प्रशासन को शिकायत दी जायेगी।

सफाई कर्मियों की मनमानी का हल जरूरी :

बीते कुछ सप्ताहों से नगरपालिका में पदस्थ सफाई कर्मचारियों के द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है, कर्मचारियों की मांगें जायज हैं या फिर नहीं, यह तो जिम्मेदार ही जानें, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष के साथ ही जिला प्रशासन द्वारा इस मामले को गंभीरता से न लेने के कारण संभागीय मुख्यालय की सफाई व्यवस्था लगातार पटरी से उतर रही है, सफाई कर्मचारियों की मांगें अलग मामला है, लेकिन मांग पूरी न होने के कारण पूरे शहर को गंदगी व बीमारियों की ओर ढकेलना पद और कर्तव्यों के खिलाफ है।

विराट नगरी की छवि धूमिल :

नगर पालिका में सफाई कर्मचारियों की लम्बी सूची है, सूत्रों पर यकीन करें तो कुल पदस्थ कर्मचारियों में से लगभग 30 से 40 प्रतिशत कर्मचारी किसी न किसी अधिकारी, नेता या अन्य के यहां मुफ्त में चाकरी कर रहे हैं, नपा के सीएमओ पर संभवत: ऐसा रोकने के लिये दबाव हो सकता है, लेकिन जिसे मुख्यालय की जनता ने अपना मत देकर प्रथम व्यक्ति की कुर्सी दी है, उनकी चुप्पी संदेहास्पद है, आने वाले ठीक एक वर्ष के बाद नपा की परिषद का पुन: गठन होना है, बीते चार वर्षों में शहर का कितना विकास और जनप्रतिनिधियों का कितना विकास हुआ है, यह किसी से छिपा नहीं है, मामला चाहे जो भी हो, लेकिन रूका हुआ विकास और गंदगी के ढेर में तब्दील होते शहर के कारण विराट नगरी की छवि धूल-धूरसित तो हो ही रही है।

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