Shahdol : बाबू की प्रताड़ना से तंग आकर वार्ड ब्वॉय ने की आत्महत्या
बाबू की प्रताड़ना से तंग आकर वार्ड ब्वॉय ने की आत्महत्यासांकेतिक चित्र

Shahdol : बाबू की प्रताड़ना से तंग आकर वार्ड ब्वॉय ने की आत्महत्या

शहडोल, मध्यप्रदेश : धनपुरी थाने की पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच तो शुरू की, लेकिन सप्ताह भर बीतने के बाद भी पुलिस अभी तक मृतक के परिजनों के बयान तक नहीं दर्ज कर पाई है।
Summary

10 सालों तक जिला चिकित्सालय में अपनी सेवाएं देने वाले 31 वर्षीय ललित बैगा जब कोरोना काल में पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अस्पताल नहीं पहुंच सके तो, जिम्मेदारों ने उनके नाम पर खेल कर दिया। रूपयों की लालच और जुगाड़ के इस फेर की कीमत ललित को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

शहडोल, मध्यप्रदेश। बैगा जनजाति के जिस युवक को प्रदेश और केन्द्र सरकार ने विशेष मानव का दर्जा दिया हुआ है, विलुप्त हो रही इस प्रजाति के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने और उनके उत्थान के लिए विभिन्न शासकीय विभागों में सीधी भर्ती का प्रावधान रखा गया है, 31 वर्ष के नवयुवक ने 10 सालों तक चिकित्सा विभाग में अपनी सेवाएं देने के बाद बाबूगिरी से तंग आकर अपनी जान दे दी। अचरज तो इस बात का है कि जिले की धनपुरी थाने की पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच तो शुरू की, लेकिन सप्ताह भर बीतने के बाद भी पुलिस अभी तक मृतक के परिजनों के बयान तक नहीं दर्ज कर पाई है, जबकि परिजन और मृतक से जुड़े अन्य लोग खुलकर इस बात के आरोप लगा रहे हैं कि जिला चिकित्सालय के जिम्मेदार और तथाकथित बाबू से प्रताड़ित होकर उसने आत्महत्या कर ली।

यह हुआ बीते सप्ताह :

जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बंडी में रहने वाले ललित बैगा उम्र लगभग 31 वर्ष पिता गोपाल बैगा जिला चिकित्सालय में बीते 10 वर्षाे से वार्ड ब्वॉय के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, बीते रविवार को ललित अपने घर से शहडोल जिला चिकित्सालय जाने की बात कहकर घर से निकला था, मंगलवार को परिजनों के पास यह खबर पहुंची कि उसकी लाश बंडी और धनपुरी के बीच के जंगल में पेड़ पर झूलती हुई मिली है, पुलिस ने शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम आदि प्रक्रिया संपन्न की और मामले को जांच में ले लिया।

यह कह रहे मृतक के परिजन :

मृतक के पिता गोपाल बैगा ने बताया कि उसे घर में कोई परेशानी नहीं थी और न ही किसी से उसकी कोई रंजिश थी, यह जरूर था कि कोरोना काल के दौरान घर के कुछ सदस्य बीमारी की चपेट में आ गये थे, पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण ललित मई माह से लंबे समय तक अस्पताल नहीं जा पाया, अस्पताल से उसे नोटिस मिला, जिसके बाद वह लगातार जाने लगा, लेकिन वहां पदस्थ एस.एन. पाठक नामक बाबू ने लगभग डेढ़ माह तक उसके उपस्थित रहने के बाद भी रजिस्टर में काट-पीटकर अनुपस्थित कर दिया, मृतक ने आत्महत्या से पहले यह बात अपनी पत्नी व पिता आदि को बताई थी।

मृतक के परिजन
मृतक के परिजनराज एक्सप्रेस, संवाददाता

अकेले रोता रहता था मृतक :

मृतक की मां ने बताया कि अस्पताल के बाबू और बड़े साहब के कारण वह मानसिक रूप से परेशान था, घर में अकेले रोता रहता था और किसी से बात नहीं करता था, हमने कई बार समझाया भी था, यह बात भी हमने सुनी की जिला चिकित्सालय यहां से काम पर जाता था और अभी कुछ दिनों से उससे काम नहीं करवाते थे, मामला ठीक करने के लिए बाबू पैसे मांगता था, जिस कारण वह वहीं बाहर गेट में बैठकर रोता रहता था। यह भी चर्चा सामने आई कि मृतक ने दोबारा नौकरी पर लौटने के लिए बाबू और बड़े साहब के पांव तक पड़े, लेकिन जब उसे सारे रास्ते बंद नजर आये तो, उसने मर जाना ही मुनासिब समझा।

अस्पताल से जारी हुए थे कई नोटिस :

कार्यालय सिविल सर्जन के द्वारा बीती 1 अगस्त को विभागीय पत्र क्रमांक 795 के माध्यम से ललित बैगा को पत्र भी दिया गया था, जिसमें 28 मार्च से 4 अप्रैल तक लगातार तथा 9 मई से उक्त दिवस तक बिना सूचना दिये अनुपस्थित रहने का नोटिस दिया गया था, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि आपके अनुपस्थित रहने से शासकीय कार्याे में बाधा पहुंचती है तथा मध्यप्रदेश शासन द्वारा एस्मा एक्ट लागू होने के दौरान आपकी अनुपस्थिति से आपातकालीन सेवा में बाधा आती है, अत: ड्यूटी में उपस्थित होने हेतु सीएमएचओ से अनुमति प्राप्त करने के उपरांत ही उपस्थिति मानी जायेगी। इससे पहले भी 18 जुलाई 2020 तथा 11 अगस्त 2020 को तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. व्ही.एस. बारिया उक्त कर्मचारी को नियमित रूप से कार्य न करने के नोटिस दिये थे, जिला चिकित्सालय के आरएमओ डॉ. पुनीत श्रीवास्तव ने 5 जनवरी को ललित बैगा को नोटिस दिया था, 5 जनवरी के पत्र का हवाला देकर 8 जनवरी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम.एस. सागर ने भी मृतक को नोटिस जारी किये थे।

जारी नोटिस की प्रति
जारी नोटिस की प्रतिराज एक्सप्रेस, संवाददाता

पुलिस बता रही शराबी :

मृतक के माता-पिता तथा उसकी पत्नी ने अपने बयान में यह बातें स्पष्ट की कि वह मानसिक रूप से परेशान था, लेकिन बीते मंगलवार को उसकी मौत के बाद आज तक धनपुरी पुलिस पंचनामा-पोस्टमार्टम के अलावा इस मामले में अभी तक जांच को इंच भर आगे नहीं बढ़ा पाई, परिजन भले ही जो भी बयान दे रहे हैं, लेकिन इस मामले में पुलिस ने अपनी कहानी अलग ही गढ़ ली है, बकौल थाना प्रभारी धनपुरी .. मृतक शराबी था, आये दिन शराब पीकर हरकतें करता था, पहले भी वह आत्महत्या के प्रयास कर चुका था, इस मामले में जब परिजनों व ग्राम बंडी के मृतक के परिचितों से जानकारी एकत्र की गई तो, उन्होंने बताया कि न तो वह रोजाना शराब पीने का आदी था और न ही उनकी जानकारी में कभी मृतक ने पहले आत्महत्या का प्रयास किया था, पुलिस का यह बयान और अधर में रूकी जांच, खुद इस मामले को सवालों के कटघरे में खड़ी करती है।

इनका कहना है :

अभी मामले में आगे जांच नहीं हुई, मृतक शराबी किस्म का था और पहले भी कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था।

ओमेश्वर ठाकरे, थाना प्रभारी, धनपुरी

मृतक कार्य के प्रति काफी लापरवाह था, आये दिन अनुपस्थित रहता था, उसे कई बार नोटिस दिये जा चुके थे, परिजनों के क्या आरोप हैं, यह मुझे नहीं मालूम हैं।

डॉ. जी.एस. परिहार, सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय, शहडोल

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