Gwalior : स्वच्छता सर्वेक्षण लीग 2022 में शर्मनाक रैंकिंग
स्वच्छता सर्वेक्षण लीग 2022 में शर्मनाक रैंकिंगSyed Dabeer Hussain - RE

Gwalior : स्वच्छता सर्वेक्षण लीग 2022 में शर्मनाक रैंकिंग

10 लाख की आबादी में 15वें और देश में 42 वें नंबर पर आया ग्वालियर। दूसरे साल लगातार पिछड़ा शहर। अधिकारियों की लापरवाही ने बिगाड़ी व्यवस्था। सफाई पर हर साल 140 करोड़ खर्च फिर भी हालत खराब।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में ग्वालियर लगातार दूसरे साल भी पिछड़ा साबित हुआ। इस बार के सर्वेक्षण में 10 लाख की आबादी में ग्वालियर को 15 वां नंबर मिला है जबकि 2020 में हम 13 वें नंबर पर काबिज थे। वहीं देश के सभी शहरों की बात करें तो इसमें 42 वां नंबर मिला है और पिछली बार 28 वें नबंर पर थे। यह स्थिति तब है जब सफाई पर हर साल 140 करोड़ रुपय से अधिक राशि खर्च हो रही है। यह पैसा सिर्फ कचरा उठाने एवं लेण्डफिल साईट तक ले जाने पर खर्च किया जाता है। कचरा प्रोसेसिंग पर अलग से पैसा खर्च किया जा रहा है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में ग्वालियर 50 वें नंबर पर होगा और खर्चा 300 करोड़ से अधिक होने लगेगा।

दरअसल स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार पिछडऩे का मुख्य कारण अधिकारियों का दो महीने कचरा प्रबंधन पर ध्यान देना है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को मजबूत करने की जगह सिविल से इंजीनियरिंग किए उपयंत्रियों को सफाई के काम पर लगा दिया जाता है। चूंकि उपयंत्रियों पर पहले से अधिक काम होता है इसलिए वह खाना पूर्ति करते हैं। साथ ही वार्ड मॉनिटर भी स्वच्छता सर्वेक्षण के एक महीने पहले ही वार्ड में निकलना शुरू करते हैं। हद तो यह है पूरे साल शौचालय भी साफ नहीं किए जाते। जब ओडीएफ का सर्वे शुरू होता है उसके 15 दिन पहले सारी कवायद होती है। यही वजह है कि आम जनता नगर निगम के अभियान को दिखावा कहती है और कोई भी सर्पोट नहीं करता। जब तक नगर निगम अमला पूरे साल सफाई पर ध्यान नहीं देगा और अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करते हुए काम नहीं करेंगे तब तक इसी तरह शहर की बदनामी होना तय है। वर्ष 2022 के स्वच्छता सर्वेक्षण में ग्वालियर को 10 लाख की आबादी में 15 वां और पूरे देश में 42 नंबर मिलना शर्मनाक है। दिल्ली में आयोजित हुए पुरूस्कार समारोह में ग्वालियर की ओर से निगमायुक्त किशोर कन्याल, अपर आयुक्त संजय मेहता एवं कचरा प्रबंधन नॉडल अधिकारी श्रीकांत काटे मौजूद रहे।

किस कार्य के मिले कितने नंबर :

  • सर्विस लेबल प्रोग्रेस में 2400 में से 1935.78 अंक मिले

  • सिटीजन वॉइस में 1800 में से 1487.74 अंक मिले

  • प्रमाणी करण में 1800 में से 1100 अंक मिले

सर्वेक्षण में लगातार पिछड़ने के यह रहें कारण :

  • लैण्डफिल साईट पर कचरा प्रबंधन यूनिट पूरी तरह चालू नहीं थी।

  • नगर निगम द्वारा कोई भी नवाचार नहीं किया गया।

  • खुले में सीवर बहने के कारण वाटर प्लस का तंमगा नहीं मिला।

  • घरों से गीला सूखा कचरा अलग नहीं किया गया।

  • शौचालयों में पूरे प्रबंध नहीं थे।

  • वार्ड मॉनिटर बनाए गए अधिकारी सिफारिश लगाकर जिम्मेदारी से हट गए।

  • समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने पर अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया।

स्वच्छता पर हर साल इस तरह खर्च किया जा रहा पैसा :

  • स्वास्थ्य विभाग में लगभग 3075 सफाई कर्मचारी रखे गए हैं।

  • इसमें नियमित 975, विनियमित 1150 एवं ठेके के 950 कर्मचारी हैं।

  • सफाई कर्मचारियों के कुल वेतन पर 50 से 60 करोड़ रुपये खर्च होता है।

  • स्वास्थ्य विभाग में 282 वाहन लगे हुए हैं। इनके संचालन में 60 से 65 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

  • रोड स्वीपिंग मशीन सहित अन्य संसाधनों पर भी 10 करोड़ रुपये साल में खर्च होते हैं।

  • शौचालयों के जीर्णोद्धार सहित पुताई एवं जागरूकता अभियान पर 4 से 5 करोड़ रुपये खर्च होता है।

  • वर्ष 2021-22 में एयर क्वालिटी सुधारने के लिए 4.26 करोड़ एक बार और 2.24 करोड़ रुपये दूसरे बार में आए।

ग्वालियर में स्वच्छता की दशा दर्शाती शहर की यह तस्वीर
ग्वालियर में स्वच्छता की दशा दर्शाती शहर की यह तस्वीरRaj Express

इन विशेषताओं पर देना था ज्यादा ध्यान :

  • स्वच्छ परिवर्तन के तहत वार्डों को रैंकिंग-मान्यता देना।

  • दक्षता और पारदर्शिता के लिए शुरू से अंत तक डिजिटल निगरानी।

  • खुले में पेशाब करने से रोकने के लिए स्वच्छता एप के माध्यम से येलो स्पॉट की पहचान।

  • निकायों के लिए हेल्पलाइन नंबर देना। सामाजिक समारोहों में कचरे को रोकने के लिए जीरो वेस्ट वेडिंग और इंवेंट को बढ़ावा देना।

  • संपत्ति, लोकेशन को जियो टैग करना।

  • कोरोना गतिविधियां व फ्रंटलाइन वर्कर पर ध्यान।

  • जनप्रतिनिधियों, नागरिकों को पूरे मूवमेंट में जोड़ना।

6 साल में इस तरह रही ग्वालियर की रैकिंग :

  • वर्ष 2015-16 में 400 वां नंबर

  • वर्ष 2016-17 में 27 वां नंबर

  • वर्ष 2017-18 में 28 वां नंबर

  • वर्ष 2018-19 में 59 वां नबर

  • वर्ष 2019-20 में 28 वां नंबर

  • वर्ष 2021-22 में 42 वां नंबर

नोट: 10 लाख की आबादी के 500 शहरों में ग्वालियर को 2020 में 13 और 2021 में 15 वां स्थान मिला है।

शर्मनाक स्थिति के लिए यह है जिम्मेदार :

  • प्रभारी मंत्री तुलसी राम सिलावट

  • ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर

  • राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह

  • सांसद विवेक नारायण शेजवलकर

  • विधायक सतीश सिकरवार

  • विधायक प्रवीण पाठक

  • निगम प्रशासक एवं संभागायुक्त आशीष सक्सैना

  • कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह

  • निगमायुक्त किशोर कन्याल

  • स्वास्थ्य विभाग अपर आयुक्त संजय मेहता

इनका कहना है :

यह बात सही है कि ग्वालियर का लगातार पिछड़ना शर्मनाक है। जितना मुझे समझ में आता है उसका कारण यह है कि अधिकारी सिर्फ दो महीने स्वच्छता पर ध्यान देते हैं। पूरे साल किसी को चिंता नहीं होती। अधिकारी अब तक कोई मॉडल ही तय नहीं कर पाए हैं बस हर बार अधिकारी नया प्रयोग करते हैं। जो रैंक आई है उसके लिए अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदार हैं और इस स्थिति से हम भी संतुष्ट नहीं है। जल्द ही बैठक करके संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेंगे।

विवेक नारायण शेजवलकर, सांसद

सफाई व्यवस्था के लिए और व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। हम अधिकारियों की बैठक लेकर तय करेंगे कि कचरा प्रबंधन पूरी तरह से लागू किया जा सके। लैण्डफिल साईड चालू हो और जो भी संसाधन कम हैं उन्हें पूरा करने के लिए सरकार के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किया जायेगा। आम जनता को भी जागरूक करने के लिए अभियान चलायेंगे और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जायेगी।

प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री, मप्र

हम पिछड़े नहीं है बल्कि अन्य जिले हमसे आगे निकल गए हैं। लेकिन निराश नहीं है। सफाई अभियान पूरे साल चलाया जाए इस दिशा में काम किया जायेगा। कचरा प्रबंधन शत प्रतिशत हो इसके लिए अभी से प्रयास शुरू कर दिया है। आने वाले साल में बेहतर परिणाम मिलेंगे।

आशीष सक्सेना, संभागायुक्त

मैंने जब कार्यभाल संभाला तब कचरा प्रबंध का कार्य करने वाली कंपनी भाग चुकी थी। लैण्डफिल साईड चालू नहीं थी और कचरा स्टेशन भी बंद पड़े थे। इस बार नए सिरे से शुरूआत कर रहे हैं और उम्मीद है कि काम बेहतर होगा।

किशोर कन्याल, निगमायुक्त

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