शिवराज का राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के सर्वमान्य नेता के रूप में बढ़ रहा कद
किसानों के बिच जाकर चने की फसल का मुआयना करते शिवराज सिंह चौहानSocial Media

शिवराज का राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के सर्वमान्य नेता के रूप में बढ़ रहा कद

भोपाल, मध्य प्रदेश : बीजेपी में उनकी तुलना में अभी कोई किसान नेता नहीं। मौजूदा हालातों मे बीजेपी ने उनकी छवि का किया उपयोग।

भोपाल, मध्य प्रदेश। सक्रिय राजनीति करने वाले नेताओं में किसान नेता के रूप में पहचान बनाने वाले नेताओं की देश में कमी है। इस कमी को पांव पांव वाले भैया से जनता में पहचान बनाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरी कर रहे हैं। धीरे-धीरे श्री चौहान ने किसान नेता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ को मजबूत किया है। किसान नेता के रूप में उनका कद न केवल किसानों के बीच बल्कि भारतीय जनता पार्टी में भी बढ़ा है।

बीते कुछ सालों में शिवराज सिंह चौहान ने सबसे अधिक काम कृषि और किसानों पर किया है। इसका फायदा अब भारतीय जनता पार्टी ने लेना शुरू किया है। किसान आंदोलन के दौरान केंद्र की भाजपा सरकार ने जब किसानों को नए कृषि कानून को लेकर समझाने का काम शुरू किया तो मप्र के मुख्यमंत्री के जिम्में बड़ी जिम्मेदारी आई। उन्होंने नए कृषि कानून के फायदे और किसानों के प्रति सरकार की अच्छी नियत पर समाचार टीव्ही चैनल्स पर साक्षात्कार दिए। उनकी बात को किसानों ने गंभीरता से भी लिया। इसके पीछे उनकी किसान हितैषी छवि है, जिससे किसानों ने उनकी बात पर काफी हद तक भरोसा किया। श्री चौहान के किसान नेता छवि की मजबूती का अंदाजा इससे भी लगता है कि मप्र में किसान आंदोलन न के बराबार ही देखा गया। प्रदेश का किसान शिवराज सिंह चौहान पर सबसे ​अधिक भरोसा करता है यह बात तो मप्र उपचुनाव में सबित भी हो गई, लेकिन देश के अन्य प्रदेशों में भी शिवराज सिंह को किसान हितैषी माना जाता है। किसान आंदोलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान की बात को किसान आंदोलन के कई नेता काफी गंभीरता से ले रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार द्वारा लगातार समाचार चैनल्स पर श्री चौहान को कृषि कानून पर बोलने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

क्यों किसान शिवराज पर करते हैं भरोसा :

देश भर के किसानों का शिवराज सिंह चौहान पर भरोसा करने के पीछे श्री चौहान का लगातार मप्र के किसान के हित में कार्य करना है। उन्होंने बीते 14 साल में सीएम रहते हुए किसान हितैषी नीतियां बनाई है। अन्य प्रदेशों की तुलना में मप्र के किसानों को फसल मुआवजा, बीमा और खाद, बीज, कृषि उपकरणों पर अनुदान दिया गया है। श्री चौहान ने अपने 2014 के कार्यकाल में सहकारिता संस्थाओं के माध्यम से किसानों को शुन्य फीसदी ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया। ऐसे कई योजनाएं है जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है। हाल ही में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के खाते 10 हजार की राशि जमा की है जिसमें 6 हजार केंद्र सरकार और 4 हजार राज्य सरकार ने दिए है। ऐसे कई मौके आए जब शिवराज सिंह चौहान अपना हित न देखते हुए किसान का पक्ष लिया। जिसकी चर्चा देश भर में हुई। इस तरह श्री चौहान की छवि देश में किसान नेता के रूप में बन गई है।

किसानों के बिच जाकर गेहूं की फसल का मुआयना करते शिवराज सिंह चौहान
किसानों के बिच जाकर गेहूं की फसल का मुआयना करते शिवराज सिंह चौहानSocial Media

प्रधानमंत्री का भरोसा और बढ़ी नजदीकी :

कुछ समय पहले तक राजनीति के गलियारों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच खटास की चर्चा की जाती रही है, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर न केवल भरोसा बढ़ा बल्कि दोनों के बीच काफी नजदीकी भी बढ़ती हुई साफ दिखाई देती है। इसके पीछे भी श्री चौहान का किसान नेता के रूप में बढ़ता हुआ कद ही है। जिससे पार्टी और प्रधानमंत्री के सिपहसलारों ने बखूबी समझा है। इसका उदाहरण हाल ही में उस समय देखने को मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून पर बात करने के निए मप्र का चयन किया। यहां के लाखों किसानों ने पीएम से बात करने और समर्थन करने के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराया था।

भाजपा में किसान नेता की कमी को किया समाप्त :

भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वमान किसान नेता की लंबे वक्त से कमी बनी हुई थी, इस कमी को शिवराज सिंह चौहान ने समाप्त कर ​दिया है। इस समय भाजपा के प्रथम पंक्ति के नेता भी मान रहे है कि श्री चौहान पर किसान सबसे अधिक भरोसा करते है जिसका फायदा पार्टी को मिलता है।

राजनीति के शुरूआती दौर से किसान की लड़ाई लड़ने का तैयार रहे :

ऐसा नहीं है कि शिवराज सिंह चौहान ने सीएम बनने के बाद से किसान हित में बात करना शुरू किया है। वे तब भी किसान की लड़ाई लड़ने को तैयार रहते थे जब उनके गृह गांव जैत सीहोर में रहते थे और राजनीति में सक्रिय नहीं थे। उनके साथियों के अनुसार ऐसे कई किस्से जिसमें श्री चौहान किसानों के लिए प्रशासन और शासन से भिड़ गए और जेल तक जाना पड़ा। श्री चौहान ने सक्रिय राजनीति में आने के बाद किसानों के हितों के लिए अनेक आंदोलन किए है।

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