बर्दी के प्रभारी प्राचार्य ने पंचायत CEO से DEO के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्दीPrem Gupta

बर्दी के प्रभारी प्राचार्य ने पंचायत CEO से DEO के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्दी के प्रभारी प्राचार्य ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर पुनर्विचार कर पुनः जांच कराने की मांग की।

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्दी के प्रभारी प्राचार्य प्राणनाथ साकेत ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर पुनर्विचार कर जिला स्तर के अधिकारी से पुनः जांच कराने की मांग की है।

बताया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष कनिष्ठ कर्मचारी धर्मराज तिवारी के प्रभारी होने के कारण अपने वरिष्ठ होने एवं प्रभारी बनाने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिस पर विचार करते हुए शिक्षा अधिकारी द्वारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी चितरंगी से वरिष्ठता सूची मंगाई गई। जिसके आधार पर प्रार्थी को आदेश क्रमांक 1959 / स्था/प्रभार /2021 दिनांक 15-09-2021 के द्वारा प्रभारी प्रचार का दायित्व सौपा गया। जिसका पालन प्रार्थी द्वारा किया गया। प्रभार बदलने से क्षुब्ध होकर श्री तिवारी द्वारा वरिष्ठता क्रम पर आपत्ति की गई। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा सहायक संचालक एवं विकाशखंड शिक्षा अधिकारी को अपने कार्यालय में बुलाकर हमारे एवं श्री तिवारी के समक्ष सभी के हस्ताक्षरित कथन एवं अभिमत लिए गए थे। परन्तु श्री तिवारी को वरिष्ठता क्रम में 9वें क्रम में पाया गया।उनकी इच्छा अनुसार कार्य न होने से क्षुब्ध होकर कुछ फर्जी लोगों के नाम से एवं अतिथि शिक्षकों के नाम से 2019-20 की फीस वसूली एवं परीक्षा में अनियमितता का झूठा आरोप लगाया गया। जबकि प्रार्थी न तो परीक्षा प्रभारी था और न ही शुल्क प्रभारी, फिर भी तत्कालीन प्राचार्य के निर्देश अनुसार शुल्क लेकर तत्कालीन प्राचार्य को शुल्क जमा किया था और प्रार्थी द्वारा कोई अनियमितता नहीं की गई थी। फिर भी उक्त आवेदन पर जिला शिक्षा अधिकारी महोदय द्वारा दिनांक 24-09-2021 की तिथि पर 27-09-2021 को जांच दल गठित किया गया जो जाचं हेतु 28-09-2021 को शा.उ.मा. वि. बर्दी में उपस्थित हुआ। जबकि श्री तिवारी जी न तो शिकायतकर्ता थे और न ही उनके ऊपर कोई आरोप था और खुद तिवारी जी चिकित्सा अवकाश पर थे फिर भी उन्हें प्रतिलिप दे कर जांच में उपस्थित किया गया जिससे वो उपस्थित रह कर अपना दवाव बना सके और जांच अपने मंशानुसार करा सके जिससे साबित होता है कि जिला शिक्षा अधिकारी किसी दवाव में आ कर कार्य कर रहे है। झूठी शिकायत के आरोपों की जांच जिला स्तर के अधिकारी एवं लेखापाल की टीम बना कर पुनः जांच करवाने की मांग की है।

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