सिंगरौली : निजीकरण के खिलाफ पी.एस.-5

सिंगरौली, मध्य प्रदेश : पी.एस.-5 संघ ने प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम सिंगरौली कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।
सिंगरौली : निजीकरण के खिलाफ पी.एस.-5
कलेक्टर ज्ञापन सौपते हुए पी.एस.-5Shashikant Kushwaha

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। पिछड़ा शोषित समाज स्वयं सेवक संघ (PS-5) ने निजीकरण के खिलाफ प्रदेश स्तरीय विरोध प्रदर्शन एवं ज्ञापन में सिंगरौली जिले में भी कई लोगों के साथ तालियाँ बजाकर विरोध किया साथ ही प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम सिंगरौली कलेक्टर को सौंपा। जिला अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने बताया कि आए दिन यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि रेलवे, एयरपोर्ट, पेट्रोलियम कंपनी एवं भारत की अन्य कई नवरत्न कंपनियों, बैंकों को देश की कंपनियों को बेचा जा रहा है। इससे मूलनिवासी में काफ़ी असंतोष व्याप्त है। निजीकरण का यह कदम देश को गर्त में ले जाएगा। निजीकरण से आम गरीब का जीना दुश्वार हो जाएगा। रेल के किराए व पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत आसमान छू लेंगे।निजी ठेकेदार - कंपनियां आम आदमी का शोषण करेंगे और देश की आर्थिक बागडोर निजी हाथों में चली जाएगी। निजी करण का यह कदम देश को बेचने के समान है।

प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन :

प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर रेलवे, एयरपोर्ट, पेट्रोलियम कंपनी, बैंक एवं अन्य नवरत्न कंपनियों का निजीकरण पर रोक लगाया जाए, इसमें जनता के गाढ़ी कमाई लगी होने से इसे बर्बाद होने से बचाया जावे, इसमे सीधा और सबसे ज्यादा नुकसान मूलनिवासी समुदाय की नौकरियों में तो होगा ही साथ ही साथ उनके विकास की सबसे बड़ी बाधा खत्म होगी एवं मूलनिवासी समुदाय विकास से दूर रह जाएंगे।

यदि निजीकरण से अधिक लाभ होता तो देश का निजी स्वामित्व वाली 50 % कंपनियां बंद नहीं होती। रेलवे, पेट्रोलियम कंपनी, एयरपोर्ट एवं अन्य नवरत्न कंपनियां इतना पुराना संस्थान हैं, जो लगातार शासन को मुनाफा दे रहे हैं, निजी करण से देश और प्रदेश का विकास नहीं हो सकता जबकि आप देश को विकसित बनाकर प्रथम पंक्ति में लाने के लिए कृत संकल्पित हैं। जो स्वागत योग्य है।

निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल वापस की माँग :

पी.एस.-5 संघ ने कहा कि हम विनम्र अनुरोध करते हुए मांग करते है कि मूलनिवासी अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय देश के लिए अहितकारी निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल वापस लेकर किसी भी परिस्थिति में लागू न किया जाए एवं स्थानीय लोगों को कंपनियों में 70% बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध अनिवार्यतः कराने का प्रस्ताव जाए जाने की मांग की।

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