शिकार के तलाश में गई सिया की जान!
शिकार के तलाश में गई सिया की जान!|Afsar Khan
मध्य प्रदेश

शिकार के तलाश में गई सिया की जान! मामले को दबाने हादसे का दे दिया रंग

उमरिया, मध्य प्रदेश : पुलिस महकमें सहित घुनघुटी में जनचर्चा तालाब में युवक के डूबने के मामले में उच्च स्तरीय जांच से उठेगा सच से पर्दा।

Afsar Khan

उमरिया, मध्य प्रदेश। जिले के घुनघुटी चौकी के दायरे में आने वाली खटकी टोला में 16 जुलाई को तालाब में युवक के डूबने का एक मामला सामने आता है, गोताखोर पूरी शाम सर्च ऑपरेशन में जुटे रहे, लेकिन उन्हें सफलता अगले दिन 17 जुलाई को मिली। क्षेत्र के इलाकेदार कहे जाने वाले दिनकर सिंह के खेत में नंदलाल बैगा वर्षाे से काम करता चला आ रहा था, वारदात के समय वह और उसका पुत्र सियाराम बैगा मौके पर मौजूद था, जिसने अपने पुत्र को अपनी आंखो के सामने मौत के मुंह में समाते देखा, लेकिन रसूखदार की बंदूक की गोली ने सच्चाई पर ताला लगवा दिया।

शिकार खोजते समय डूबा सिया :

वैसे तो, इस पूरे मामले को हादसा करार दे दिया गया है, लेकिन जनचर्चा यह भी है कि दिनकर सिंह अक्सर अपनी बंदूक से शिकार किया करता था, 16 जुलाई को अपने खेत में पक्षी का शिकार किया, जो कि तालाब में जा गिरा, नंदलाल को तैरना नहीं आता था, दिनकर ने उसके पुत्र सियाराम शिकार खोजने के लिए तालाब में भेज दिया, शिकार को लेने सिया राम चला गया, लेकिन वह पानी और मिट्टी में समा गया और दोबारा जीवित लौटकर नहीं आया। दूसरे दिन उसके शव को रेस्क्यू दल ने मशक्कत के साथ बरामद किया।

बचाने की नाकाम कोशिश :

सियाराम जब तालाब में डूब रहा था, इस दौरान पूरे क्षेत्र में हो रही जनचर्चा के अनुसार उसके पिता नंदलाल ने कई लोगों को उसी दौरान उसे बचाने के लिए बुलाया था, जिन्होंने उसे निकालने की कोशिश भी की, लेकिन वह नाकाम रहे और वापस लौट आये, अगर जांच में इन लोगों का भी बयान सामने आता है तो, सच खुद-ब-खुद साबित हो जायेगा कि सियाराम को किसाने तालाब में भेजा था।

बंदूक ने लगा दिया ताला :

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि दिनकर सिंह रोजाना शिकार किया करता था, इससे पहले भी कई ऐसे मामले आये हैं, जिसमें वन्य प्राणियों के शिकार के मामले में नाम आते-आते बच गया, आदिवासी समुदाय के साथ ही पूरे क्षेत्र में सच्चाई सबको पता है कि सियाराम की मौत कैसे हुई, लेकिन उस दौरान जिन लोगों ने अपनी जुबान खोलने की कोशिश की, उसे बंदूक के सहारे दबा दिया गया। ऐसा नहीं है कि यह मामला वर्दीधारियों के संज्ञान में नहीं है, महकमें भी सच मालूम है, लेकिन चौकी प्रभारी के दिनकर के साथ मधुर संबंध किसी से छुपे नहीं है, उसी का फायदा इस मामले में भी दिनकर को मिल गया।

कॉल डिटेल खोलेगा राज :

वैसे तो उमरिया पुलिस ने सॉयबर क्राइम के कई गंभीर मामले खोले हैं और प्रदेश में भी विभाग ने अपना नाम रौशन किया है, भले ही घुनघुटी पुलिस यह कह रही है कि मौके पर मृतक का पिता मौजूद था और उसकी रिपोर्ट पर ही मर्ग कायम किया गया है, लेकिन जनचर्चा के अनुसार मामले संगीन है, इस मामले में उच्च स्तरीय जांच से पूरे मामले से पर्दा उठ सकेगा, जिसमें दिनकर सिंह सहित अन्य लोगों की टॉवर लोकेश और मोबाइल कॉल डिटेल से सच सामने आ सकता है कि हादसे के बाद किस-किस को कॉल किया गया और उसके बाद किन-किन लोगों ने दिनकर से संपर्क किया।

जमकर चला गांधी खेल :

इस पूरे मामले को दबाने में कुछ सफेदपोशों के संरक्षण की बातें भी सामने आ रही हैं, इतना ही नहीं वारदात दिनकर सिंह के तालाब और खेत की है, लेकिन उसका कहीं पर भी कोई नाम नहीं आया, बताया गया है कि इस पूरे मामले को दबाने में मोटी रकम का भी खेल-खेला गया है कि ताकि सच पर पर्दा पड़ा रहे, बहरहाल इस मामले में सच क्या है और झूठ, यह तो उच्च स्तरीय जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

इनका कहना है :

ऐसी बात तो नहीं है, मृतक का पिता मौके पर मौजूद था और उसकी रिपोर्ट पर मर्ग कायम किया गया है।

रमाकांत त्रिपाठी, चौकी प्रभारी, घुनघुटी

इस पूरे मामले की जांच घुनघुटी चौकी प्रभारी के द्वारा की जा रही है, अगर कोई तथ्य और जानकारी सामने आती है तो, उसे भी जांच में सम्मलित किया जायेगा।

राज कुमार धारिया, थाना प्रभारी, बिरसिंपुर पाली

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