चीतों के शिकार के लिए लाए गए चीतल
चीतों के शिकार के लिए लाए गए चीतलसांकेतिक चित्र

कूनो में नए मेहमान का रखा जा रहा खास ध्यान, शिकार के लिए लाए गए चीतल

भारत के 8 नए मेहमान फ़िलहाल तनाव में दिखाई दे रहे हैं। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में वह अपने आप को नए माहौल में ढाल लेंगे।

राज एक्सप्रेस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को छोड़ा। इसी के साथ करीब 75 साल बाद देश में चीतों ने कदम रखा। साल 1952 में सरकार ने आधिकारिक तौर पर माना था कि भारत में चीतों की प्रजाति खत्म हो चुकी है, जबकि साल 1948 के बाद से भारत में चीते देखे जाने का कोई प्रमाण नहीं है। ऐसे में इन 8 चीतों को लाकर एक बार फिर से भारत में चीतों की संख्या को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। यही कारण है कि ये नए मेहमान बेहद खास हैं और पार्क प्रबंधन इनका खास ध्यान रख रहा है।

तनाव में हैं चीते :

चीतों को भारत में आए अभी महज कुछ दिन ही बीते हैं। नामीबिया से कूनो तक 9 हजार किलोमीटर सफर के दौरान वे करीब 10 घंटे तक पिंजरे में रहे। यही कारण है कि अभी चीते तनाव में हैं। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में वह अपने आप को नए माहौल में ढाल लेंगे।

सैटेलाइट कॉलर से की जा रही निगरानी :

चीतों की निगरानी के लिए उनके गले में सैटेलाइट कॉलर लगाई गई है। इसकी बैटरी तीन से पांच साल तक चलती है। ऐसे में सैटेलाइट कॉलर के जरिए लंबे समय तक चीतों की गतिविधियों की जानकारी एक्सपर्ट को मिलती रहेगी।

खाने-पीने का रख रहे हैं खास ध्यान :

अभी चीतों को शिकार नहीं करने दिया जा रहा है। उन्हें भैंसे का मीट परोसा जा रहा है। परोसने से पहले मीट की जाँच भी की जा रही है कि कहीं उसमें किसी तरह का इंफेक्शन तो नहीं है। इसके अलावा चीतों के पानी पीने की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही करीब 500 चीतल को भी वहां लाया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में चीते इनका शिकार कर पाएंगे।

सीसीटीवी से निगरानी :

वन विभाग के अधिकारी 24 घंटे चीतों की मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। हर चीते के लिए एक टीम बनाई गई है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं :

भारत के इन नए मेहमानों की सुरक्षा के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चीतों के बाड़ों के आसपास अन्य कोई वन्यप्राणी न आए, इसके लिए दो हाथियों की मदद से दिन-रात पेट्रोलिंग की जा रही है। खासकर तेंदुओं को चीतों के बाड़ों से दूर रखा जा रहा है।

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