शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में मातृभाषा के पदों को महत्व देगी सरकार
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में मातृभाषा के पदों को महत्व देगी सरकार|Syed Dabeer-RE
मध्य प्रदेश

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में मातृभाषा के पदों को महत्व देगी राज्य सरकार

भोपाल, मध्यप्रदेश: आखिरकार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में संस्कृत हिंदी जैसे मातृभाषा के पदों को महत्व देने के लिए विभाग में सक्रियता दिखने लगी है।

Shahid Kamil

भोपाल, मध्यप्रदेश। आखिरकार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में संस्कृत हिंदी जैसे मातृभाषा के पदों को महत्व देने के लिए विभाग में सक्रियता दिखने लगी है। पिछले दिनों इन विषयों के उत्तीर्ण अभ्यार्थियों के पक्ष पर शिक्षा मंत्री की वल्लभ भवन में अधिकारियों से चर्चा की है। भर्ती प्रक्रिया में विभाग द्वारा हिंदी संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण पदों को कम संख्या में दर्शाया गया था। सोमवार को समीक्षा बैठक में भी मंत्री ने इस भर्ती प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी ली।

बताना होगा कि पिछले सप्ताह उत्तीर्ण अभ्यार्थियों का एक प्रतिनिधि मंडल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मिला था। उन्हें बताया गया था कि लगभग 9 वर्षों के पश्चात प्रदेश के शासकीय स्कूलों में शिक्षक-भर्ती हो रही है। 2011-12 में पिछली बार संविदा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। लंबे इंतजार के बाद इस बार स्थाई शिक्षकों की भर्ती होने जा रही है जिसमें कई विसंगतियां देखने को मिल रही हैं। पात्र अभ्यर्थियों के द्वारा गठित युवा बेरोजगार संघ ने पीड़ा बताई गई थी कि उच्च माध्यमिक एवं माध्यमिक शिक्षक भर्ती में जो रिक्त पदों का वितरण किया गया है। वह न्याय संगत नहीं है। एक या दो ही विषयों को प्राथमिकता दी गई है। जबकि प्रत्येक विषय के हजारों पद अभी भी रिक्त हैं।

खासकर हिंदी और संस्कृत एवं उर्दू जैसे विषयों की इस भर्ती प्रक्रिया में खुलकर उपेक्षा की गई है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश शिक्षित युवा बेरोजगार संघ एवं शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ रहा है। इसके पूर्व यह अभ्यार्थी मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ज्ञापन-पत्र के माध्यम से सीएम को पीड़ा बता चुके हैं। उधर भी मांग की है कि स्थाई शिक्षक-भर्ती की कमेटी के द्वारा निष्पक्ष रूप से जांच हो। समस्त विषयों एवं भाषाओं को महत्व देते हुए स्थाई शिक्षक-भर्ती की जाए, जिससे कि प्रत्येक विषय के अभ्यर्थियों को स्थाई रोजगार के साथ-साथ शासकीय सेवा में जाने का अवसर प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दीया था कि उत्तीर्ण अभ्यार्थियों के साथ पूरी तरह न्याय किया जाएगा। उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की समस्या को शिक्षा मंत्री ने गंभीरता से लिया है। अभ्यार्थियों से मुलाकात के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा था कि प्रदेश में संस्कृत और हिंदी जैसे भाषाई पदों को महत्व दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार सोमवार को मंत्रालय में समीक्षा बैठक के दौरान भी मंत्री इंदर सिंह परमाार ने इस विषय पर अधिकारियों से विस्तार केे साथ चर्चा की। यह निर्देश भी दिए की भर्ती प्रक्रिया में जो विसंगतियां हैं उन्हें तत्काल ठीक किया जाए।

मंत्री के आश्वासन पर हमें पूरा भरोसा: रंजीत गौर

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों को सुधारने के लिए उत्तीर्ण अभ्यर्थियों द्वारा गठित बेरोजगार संघ के अध्यक्ष रंजीत गौर का कहना है कि मंत्री द्वारा जो आश्वासन दिया गया है हमें उस पर पूरा भरोसा है। गौर का कहना है कि प्रदेश में मातृभाषा के पदों को महत्त्व मिलना चाहिए। क्योंकि हजारों की संख्या में यह पद रिक्त हैं। उन्होंने फिर वही बात दोहराई की स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग से अलग-अलग मेरिट सूचियों का प्रकाशन हो,एक ही उम्मीदवार का नाम दोनों जगह ना हो। समस्त भारतीय विषय एवं भाषाओं को महत्व देते हुए भर्ती की जाए। शिक्षा के अधिकार अधिनियम आरटीई के अनुसार स्थाई शिक्षक भर्ती हो। समस्त रिक्त पदों पर पात्र अभ्यर्थियों से सीधी भर्ती हो। माध्यमिक शिक्षक भर्ती में विज्ञान,सामाजिक विज्ञान,हिंदी, संस्कृत एवं उर्दू के रिक्त पदों में वृद्धि हो। मध्यप्रदेश के मूल निवासियों को प्राथमिकता के साथ बाहरी अभ्यर्थियों का 5% कोटा निर्धारित किया जाए।

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