इंदौर : एमवायएच से बच्चा चोरी मामले में एसटीएफ ने भी शुरू की जांच

इंदौर, मध्य प्रदेश : कमेटी ने नहीं सौंपी रिपोर्ट, दो दिन का समय और लिया। अब तक पकड़ में नहीं आई बच्चा चोरनी।
इंदौर : एमवायएच से बच्चा चोरी मामले में एसटीएफ ने भी शुरू की जांच
एमवायएच से बच्चा चोरी मामले में एसटीएफ ने भी शुरू की जांचSocial Media

इंदौर, मध्य प्रदेश। महाराजा यशवंतराव अस्पताल में बेबी लिफ्टिंग मामले के आरोपियों की पहचान करने के लिए पुलिस अंधेरे में घूम रही है, वहीं एसटीएफ (विशेष कार्य बल) ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी है कि कहीं इस मामले में कोई संगठित गिरोह तो शामिल नहीं था। एसटीएफ के इंस्पेक्टर एमए सैयद और उनकी टीम मामले की जांच करने के लिए गुरुवार को एमवाय अस्पताल पहुंची और आरोपियों के अस्पताल में आने के रूट की जांच करने के साथ ही जिम्मेदार के बारे में जानकारी ली और हर पहलू की तफसील से तफ्तीश की।

श्री सैयद ने कहा कि हम मामले की जांच करने के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचे। सभी टीमें जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचने के लिए सहयोग करेगी। हम इस पहलू पर काम करेंगे कि कोई गिरोह इसमें शामिल है या नहीं। एसटीएफ आरोपियों का और सुराग हासिल करने के लिए अपराध की घटना को भी दोबारा दोहराएगी।

अब तक 450 वाहनों की हो चुकी पड़ताल :

इस मामले में पुलिस उप महानिरीक्षक हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा कि हम आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए समान नंबरों के वाहनों का पता लगा रहे हैं। हमने इसके लिए लगभग 450 वाहनों का पता लगाया है। हमें विश्वास है कि हम कुछ दिनों में इस मामले खुलासा कर लेंगे। वहीं सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में देखी गई बच्चा चोरनी प्रशिक्षित पैरामेडिकल नजर आ रही है। संभवत: महिला नर्स या पैरामेडिकल का प्रशिक्षण प्राप्त है। बच्चा चोरनी को अस्पताल को बनावट और वार्ड आदि की पूरी जानकारी थी। पुलिस सभी पहलुओं पर काम कर रही है और उसकी हरकतों से यह भी पता चला है कि वह मुख्य रूप से मालवा-निमाड़ क्षेत्र के किसी भी नजदीकी जिले की हो सकती है।

दो दिन में कमेटी नहीं दे पाई अपनी रिपोर्ट :

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित द्वारा गठित जांच समिति द्वारा गुरुवार को अपनी रिपोर्ट नहीं दे पाई। पांच सदस्यीय कमेटी को दो दिन में रिपोर्ट सौंपना थी। कमेटी के अध्यक्ष डॉ. के.के. अरोड़ा के मुताबिक हमने अस्पताल में 12 और लोगों के बयान दर्ज किए हैं जिनमें ड्यूटी नर्स, सुरक्षा गार्ड, ड्यूटी डॉक्टर और बच्चे के माता-पिता शामिल हैं।उन्होंने कहा कि वे गुरुवार को रिपोर्ट जमा नहीं कर सकते क्योंकि अधिक लोगों के बयान लिए जाएंगे। हम कुछ दिनों में रिपोर्ट सौंपेंगे। रिपोर्ट में दोषी लोगों के नाम और भविष्य में इस प्रकार की घटना अस्पताल में घटित न हो, इस संबंध में दी जाएगी।

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