रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध : हाईकोर्ट
रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध : हाईकोर्टSocial Media

रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध : हाईकोर्ट

जबलपुर, मध्य प्रदेश : याचिकाकर्ता व शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने निर्देश। सीबीआई को जांच के निर्देश, सुको जज से सेटिंग होने का दिया गया था हवाला।

जबलपुर, मध्य प्रदेश। मप्र हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध है। जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने उक्त फैसला जमानत के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में अग्रिम जमानत के लिए आरोपियों की ओर से दायर मामले में दिये हैं। एकलपीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता ने जनसेवक होने के बावजूद भी जमानत के लिए रिश्वत दी। एकलपीठ ने शिकायतकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये हैं। एकलपीठ ने सीबीआई को प्रकरण दर्ज कर याचिकाकर्ता के आरोपों की जांच के निर्देश दिये हैं। इसके अलावा अन्य व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाने के निर्देश हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को देते हुए याचिका को खारिज कर दी।

यह मामला उप्र गाजीपुर निवासी सूरजमल अम्बेडर की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि एनसीएल सिंगरौली में कोल माइंस का टेण्डर दिलवाने के नाम पर जीएम कार्यालय में बाबू के पद पर पदस्थ दिलीप कुमार श्रीवास्तव को दस लाख रूपये रिश्वत में दिये थे। उसका कहना था कि अधिकारियों से सेटिंग हो गयी है, टेंडर कंपनी को मिलेगा। रिश्वत की उक्त रकम उसने स्वयं तथा अपने कर्मचारी संतोष कुमार पानकी तथा ड्राईवर बुध्दसेन पटैल के माध्यम से दी थी। टेण्डर नहीं मिलने पर रकम वापस मांगने पर दिलीप कुमार श्रीवास्तव ने उनके खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज करवा दिया। शिकायत में कहा गया था कि बलात्कार तथा पास्कों के अपराध में उनका बेटा जेल में निरूद्ध है। सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीश से सेटिंग कर जमानत दिलवाने के नाम पर दस लाख रूपये लिये है। पुलिस द्वारा धारा 420 तथा 120 के तहत दर्ज प्रकरण में अग्रिम जमानत के लिए उक्त याचिका दायर की गयी है। याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ता के बैंक खाते में पैसे डाले है। इसलिए याचिकाकर्ता का यह दावा गलत है कि उसने शिकायतकर्ता से एक रूपये भी नहीं लिया है। इसके अलावा संजीव शर्मा नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था कि उसने 52 हजार रूपये जमा करवाये थे, जिसकी रसीद उससे खो गयी है। जबकि पुलिस को जांच में रसीद की प्रति मिली है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि लोक सेवक होने के बावजूद भी शिकायतकर्ता ने बेटे की जमानत के लिए रिश्वत दी। एकलपीठ ने पुलिस महानिदेशक को आदेशित किया है कि ऐसी शिकायत पर रिश्वत देने वाले के खिलाफ भी कानून के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए। इस संबंध में वह सभी पुलिस अधीक्षक को निर्देश जारी करें। एकलपीठ ने सीबीआई को निर्देशित किया है कि वह प्रकरण दर्ज की याचिकाकर्ता के आरोपों की जांच करें। एकलपीठ ने झूठा हलफनाम देने वाले संजीव शर्मा सहित सूरजमल अम्बेडकर, संतोष कुमार पानकी तथा बुध्दसेन पटेल के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही के निर्देश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को दिये हैं।

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