तानसेन समारोह : शाम की सभा में अर्जेंटीना और ब्राजील के कलाकारों ने साधे सुर
शाम की सभा में अर्जेंटीना और ब्राजील के कलाकारों ने साधे सुरSocial Media

तानसेन समारोह : शाम की सभा में अर्जेंटीना और ब्राजील के कलाकारों ने साधे सुर

ग्वालियर, मध्यप्रदेश : तानसेन समारोह में दूसरे दिन की शाम बेहद खास और खुशनुमा रही। आज सुबह की सभा में तो मिठास घुली ही थी, शाम की सभा में भी दो तहजीबों के सुर खिले।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। तानसेन समारोह में दूसरे दिन की शाम बेहद खास और खुशनुमा रही। आज सुबह की सभा में तो मिठास घुली ही थी, शाम की सभा में भी दो तहजीबों के सुर खिले। शाम की सभा में भारतीय शास्त्रीय संगीत के फूल तो खिले ही, अर्जेंटीना और ब्राजील से आए कलाकारों ने अपने अपने मुल्क के शास्त्रीय संगीत की ऐसी खुशभू बिखेरी, जिससे मिले सुर मेरा तुम्हारा की भावभूमि साकार हो उठी। ये रासभीनी शाम उस वक्त और खिल उठी जब तानसेन के मंच पर संगीत जगत की तीन विभूतियों को राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से विभूषित किया गया।

संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे ने सबसे पहले प्रख्यात ध्रुपद गायक पंडित अभय नारायण मलिक को वर्ष 2019 के राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से विभूषित किया। इसके पश्चात वर्ष 2016 एवं 2017 के लिए क्रमश: विदुषी अश्विनी भिड़े देशपाण्डे एवं पंडित वेंकटेश कुमार को राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से अलंकृत किया गया। अंत में प्रख्यात संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी को वर्ष 2020 के कालिदास सम्मान से विभूषित किया गया। सम्मान स्वरूप सभी कलाकारों को दो-दो लाख की आयकर मुक्त राशि शॉल एवं श्रीफल प्रदान किये गए। इस अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खा संगीत एवं कला अकादमी के सहायक निदेशक राहुल रस्तोगी भी उपस्थित थे।

सोमवार की शाम की सभा का आगाज शंकर गान्धर्व संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के ध्रुपद गायन से हुआ। राग यमन में चौताल की बंदिश के बोल थे जय शारदा भवानी। प्रस्तुति में पखावज पर मुन्नालाल भट्ट एवं हारमोनियम पर नारायण काटे ने साथ दिया। इसके बाद पहली प्रस्तुति में अर्जेंटीना के देसिएतों आनंदते ने विश्व संगीत की प्रस्तुति दी। एकॉस्टिक गिटार के साथ कई धुनें और सांग्स पेश किए। उन्होंने कई स्पेनिश सांग्स लेटिनो अमेरिकी रिदम पर पेश किए। आपने बोलेरो स्टाइल में सालसा स्टाइल में कई गीत पेश किए।

अगले कलाकार कालिदास सम्मान से विभूषित 85 वर्षीय पंडित अभय नारायण मालिक ने अपने पुत्र एवं शिष्य रंजीत मलिक एवं परिजन रंजीव मलिक अजय पाठक राजन मलिक अभिषेक पाठक के साथ ध्रुपद के सुर लगाए। पहली प्रस्तुति राग विहाग थी। धमार में बंदिश के बोल थे- कहां ते आये हो गोपाल गुलाल लगाए इस बंदिश को उन्होंने पुरजोर तरीके से पेश किया । अगली बंदिश सूलताल में राग मालकौंस की रही। बंदिश के बोल थे आवन कह गए अजहूं न आए। इस बंदिश को भी आपने पूरे मनोयोग से पेश किया। आपके साथ पखावज पर संगीत पाठक एवं रानू मलिक ने संगत की, जबकि सारंगी पर भारतभूषण गोस्वामी एवं आबिद हुसैन ने साथ दिया। तानपुरे पर सुश्री लता मलिक दुबे ने साथ दिया।

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