तानसेन समारोह : तानसेन के आंगन में जले विश्व संगीत के अलाव
तानसेन समारोह : तानसेन के आंगन में जले विश्व संगीत के अलावSocial Media

तानसेन समारोह : तानसेन के आंगन में जले विश्व संगीत के अलाव

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : तानसेन समारोह में एक ओर जहां भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुरलहरियां गूंज रही हैं, वहीं सात समुंदर पार का विदेशी संगीत भी लोगों को अतिरंजित कर रहा है।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। तानसेन समारोह में एक ओर जहां भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुरलहरियां गूंज रही हैं, वहीं सात समुंदर पार का विदेशी संगीत भी लोगों को अतिरंजित कर रहा है। रविवार को सर्द सांध्यबेला में जब सात समुंदर पार स्थित उत्तर अमेरकीय देश मैक्सिको से आए डेनियल रावि रैंजल ने स्पेनिश गिटार से शास्त्रीय संगीत एवं वेस्टर्न म्यूजिक की मीठी-मीठी मिश्रित धुन निकालीं तो एक बारगी ऐसा लगा मानो सुर सम्राट तानसेन के आंगन में विश्व संगीत के अलाव जल उठे हैं।

डेनियल रावि ने मैक्सिको के पारंपरिक लोकगीतों पर आधारित धुनें बजाकर रसिकों की खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने क्यूबन व ब्राजीलियन पारंपरिक सोंग सहित यूरोपियन ला, लिरोना, ला मजा, ओजला व साकुरा सोंग की धुनें भी स्पेनिश गिटार से निकालीं। उनका कहना था कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का आकर्षण उन्हें मैक्सिको से भारत खींच लाया। वर्तमान में वे भारत में (नई दिल्ली) सितारवादन की शिक्षा ले रहे हैं।

डेनियल रावि ने मैक्सिको के पारंपरिक लोकगीतों पर आधारित धुनें बजाई
डेनियल रावि ने मैक्सिको के पारंपरिक लोकगीतों पर आधारित धुनें बजाईRaj Express

सर्द भोर में संतूर के सुर :

सर्द भोर में जब संतूर के तारों से मीठे-मीठे सुर झरे तो माहौल में तपन पैदा हो गई। कश्मीर के सूफियाना घराने से ताल्लुक रखने वाले प्रख्यात संतूर वादक अभय रुस्तम सोपोरी की अँगुलियां संतूर के तारों से खूब खेलीं। फिर क्या था रागों का विहाग आसमान पर छा गया। सूर्य देवता ने तपन पैदा की तो अभय रुस्तम जी ने अपने संतूर वादन से कश्मीर की हसीन वादियों की ठंडक का एहसास कराया। फिर क्या सुधी रसिक ध्यानमग्न होकर राग- रागिनियों संग आनंद के सागर में गोते लगाते नजर आये। उन्होंने राग वसंत बुखारी में आलाप जो झाला से अपने वादन की शुरुआत की। इसके बाद 11 मात्रा में विलंबित गत पेश कर समा बांध दिया। उन्होंने तीन ताल में प्रसिद्ध बंदिश उठत जिया हूक सुनत कोयल कूक का गायन वादन किया। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खां, पखावज पर अंकित पारिख और दक्षिण भारतीय वाद्य घटम पर राजशेखर की संगत कमाल की रही।

युवा अमान खां की ठुमरी की ठुमक :

रविवार को सुबह की सभा की शुरूआत पारंपरिक रूप से स्थानीय शंकर गांधर्व संगीत महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन के साथ हुई। राग भैरव में ताल चौताल भवन निबद्ध बंदिश के बोल थे। जयपुर से आए युवा शास्त्रीय गायक उस्ताद मोहम्मद अमान खां ने जब मिठास भरे कंठ से ठुमरी याद पिया की आए ये दु:ख सहा न जाए हाय राम... का गायन किया तो विरह का सागर हिलोरे लेने लगा। उन्होंने ऐसी सुर वर्षा की कि रसिक श्रोता सराबोर हो गए। उन्होंने तानसेन रचित राग मियां की तो में बड़ा खयाल का एक ताल में गायन किया जिसके बोल थे सगुन विचारो बमना। उनके ठहराव भरे खयाल गायन से ऐसा सम्मोहन रचा कि सभागार बार-बार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंजता रहा। मध्यलय तीन ताल में छोटा ख्याल अब मोरी नैया पार करो रे..। पेश किया उनके साथ तबले पर उस्ताद मुजफ्फर खां व हारमोनियम पर उस्ताद जमीर खां ने बेहतरीन संगत की।

सारंगी की जुगलबंदी से मंत्रमुग्ध :

ग्वालियर घराने के सांगीतिक परिवार में जन्मे उस्ताद अब्दुल मजीद खां एवं उस्ताद अब्दुल हमीद खां ने राग शुद्ध सारंग में माधुर्ययुक्त शहनाई वादन किया। उन्होंने अपने सारंगी वादन में आलापचारी और एक ताल में विलंबित गत से सुरीली धुन निकाली। इसके बाद राग शुद्ध सारंग में ही तीन ताल मध्य लय एवं द्रुत में गत प्रस्तुत की। दोनों भाइयों ने ठुमरी की सुरीली धुन निकालकर अपने सारंगी वादन का समापन किया। तबले पर उस्ताद हनीफ खां एवं शाहरुख खां ने कमाल की संगत कर सारंगी की जुगलबंदी में चार चांद लगा दिए।

देवानन्द ने राग मधुवंती में ध्रुपद :

मायानगरी मुबंई से आए देवानन्द यादव का ध्रुपद गायन हुआ। उन्होंने ग्वालियर को ध्रुपद नगरी की संज्ञा देकर नमन किया और सुर सम्राट तानसेन के आंगन में सुमधुर ध्रुपद गायन किया। उन्होंने अपने गायन के लिए राग मधुवंती चुना। इस राग में देवानन्द ने अपनी खनकदार आवाज में विलंबित एवं मध्यलय आलाप किया। इसके बाद तीव्रा ताल में बंदिश जग वंदन गौरी नंदन का सुमधुर गायन किया। शास्त्रीय संगीत की गायकी के साथ देवानन्द को उप शास्त्रीय संगीत ठुमरी रविवार की सांध्यकालीन सभा का आगाज हुआ। संगीत संयोजन संजय देवले का था। पखावज पर संजय आगले एवं हारमोनियम पर मुनेन्द्र सिंह ने संगत की।

राग मुल्तानी में गोकुल गांव का छोरा :

सभा की तीसरी प्रस्तुति में जबलपुर से आये युवा कलाकार विवेक कर्महे का ख्याल गायन हुआ। उन्होंने संधि प्रकाश के राग मुलतानी में अपना गायन प्रस्तुत किया। उन्होंने तीन बंदिशें पेश कीं। तिलवाड़ा में निबद्ध पारम्परिक विलंबित बंदिश गोकुल गांव का छोरा.... जबकि तीनताल मध्य लय की बंदिश के बोल थे - हमसे तुम रार करोगी..। अति द्रुत लय में एक ताल में निबद्ध पारंपरिक बंदिश नैनन में आन बान तीनों ही बंदिशों को विवेक ने बड़े मनोयोग से गाया। तबले पर श्रुतिशील उद्धव और हारमोनियम पर जितेंद्र शर्मा ने संगत की।

राग मुल्तानी में गोकुल गांव का छोरा
राग मुल्तानी में गोकुल गांव का छोराRaj Express

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