तानसेन समारोह : आसमान से पानी और कंठ से झरे सुर
तानसेन समारोह : आसमान से पानी और कंठ से झरे सुरShahid - RE

तानसेन समारोह : आसमान से पानी और कंठ से झरे सुर

तानसेन समारोह के तीसरे दिन किसी कलाकार ने राग मल्हार तो नहीं गाया, लेकिन जब सुरलहरियों के बीच रिमझिम बारिश हुई तो तानसेन की गायकी की यादें ताजा हो गईं।

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। कहते हैं कि सुरसम्राट तानसेन जब राग मल्हार गाते थे तो बारिश होने लगती थी। मंगलवार को सुबह तानसेन समारोह के तीसरे दिन किसी कलाकार ने राग मल्हार तो नहीं गाया, लेकिन जब सुरलहरियों के बीच रिमझिम बारिश हुई तो तानसेन की गायकी की यादें ताजा हो गईं। शास्त्रीय संगीत के अमर गायक तानसेन की याद में आयोजित हो रहे सालाना महोत्सव तानसेन समारोह में राग-मनीषियों ने जब अपने गायन-वादन से सुरीली राग-रागनियां छेड़ीं तो ऐसा अहसास हुआ कि सर्द मौसम ने सुरों से बनी गर्माहट की चादर ओढ़ ली है। भीगे भीगे मौसम में संगीत रसिकों ने शास्त्रीय संगीत की सुरलहरियों का आनंद उठाया।

युवा गायक राहुल व रोहित मिश्रा की जोड़ी ने जब अपनी दानेदार व बुलंद आवाज़ में राग देशी तोड़ी और तीन ताल में निबद्ध छोटा ख्याल गूंद गूंद लाओ री मालनिया का गायन किया तो बनारस घराने की गायकी जीवंत हो उठी। सुबह की सभा में चौथे कलाकार के रूप में बनारस घराने की इस युवा जोड़ी की प्रस्तुति हुई। राग देशी तोड़ी में सुंदर रागदारी के साथ बड़ा ख्याल पेश किया। एक ताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे चैन न आवे। इसके बाद द्रुत गति में बंदिश गाकर अपने गायन को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। युवा गायकों की जोड़ी ने रसिकों की फरमाइश पर जब बनारस घराने का प्रसिद्ध टप्पा गुलशन में बुलबुल चहकी....गाकर सुनाया तो सभी मंत्रमुग्ध हो गए। प्रसिद्ध ठुमरी गोरी तोरे नैन काजर बिन कारे.. और एक भजन सुनाकर अपने गायन को विराम दिया। हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र, तबले पर अंशुल प्रताप सिंह और सारंगी पर उस्ताद मजीद खान ने संगत की।

ब्राजीलियन संगीत से सुर सम्राट को स्वरांजलि :

ब्राजील के मिस्टर पाब्लो ने अपने गायन- वादन से वही संदेश दिया जो भारतीय शास्त्रीय संगीत में समाया है। वह आध्यात्मिक संदेश है प्रेम, शांति, मानव कल्याण और सुरों के माध्यम से ईश्वर से साक्षात्कार। तानसेन समारोह में प्रस्तुति देने आए पाब्लो ने अफ्रिकन-ब्राजीलियन पारंपरिक संगीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में पश्चिमी बांसुरी, गिटार व सिंथेसाइजर से निकली धुनों ने रसिकों पर जादू सा असर किया।

एक साथ खिले पूर्व और पश्चिम के सुर :

हल्की बारिश की संगीतमयी थाप के साथ व्रह्मनाद के साधकों ने जब स्वर लहरियां बिखेरी तो लगा जैसे गान मनीषी तानसेन का आंगन दिव्य सुरों में सज गया है। फ्रांस से आए संगीतज्ञ मार्टिन डबॉइस ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के रागों के साथ संगत की तो लगा सारे रुके सुर एक साथ बजने लगे। यह नजारा सुबह की सभा में दिखा। मधुर थाप के साथ जैसे-जैसे बारिश का बरसना शुरू हुआ तो मीठे-मीठे सुरों ने भी बूंदों के साथ साम्य बना लिया। मार्टिन ने ताल वाद्य के अलावा कोरा व गायन भी किया। उनके द्वारा प्रस्तुत जैज संगीत सुनते ही बन रहा था। मार्टिन के गायन-वादन में भारतीय शास्त्रीय संगीत की झलक भी दिखाई दी। अफ्रीकन लोक संगीत से भी उन्होंने श्रोताओं को रू-ब-रू कराया।

नज़रिया लागे नहीं कहीं और :

बारिश का संगीत से भी खुशनुमा रिश्ता है। आसमान से झर रहीं बारिश की बूंदों के बीच उदयीमान ख्याल गायिका तृप्ति कुलकर्णी ने अपनी स्वर लहरियों का आकषर्ण बिखेरा। राग विभास में बड़ा ख्याल हो श्याम.. और इसके बाद एक ताल मध्यलय में छोटा ख्याल पिया रैन जागे.. प्रस्तुत कर समा बांध दिया। कर्नाटक संगीत की ख्यातिनाम गायिका सुधा रघुरामन ने संगीत मोहक गायन से अलग ही रंगत बिखेरी। गान महृषि तानसेन को उन्होंने हिदुस्तानी शास्त्रीय संगीत अर्थात कर्नाटक शैली की मिसुरी भरी राग-रागनियों से स्वरांजलि अर्पित की। बांसुरी पर रघुरामन, मृदंगम पर एम व्ही चन्द्रशेखर और तबले पर शम्भूनाथ भट्टाचार्य ने कमाल की संगत की। तानसेन समारोह की पांचवी एवं मंगलवार की सांध्यकालीन सभा की शुरुआत पारंपरिक ढंग से स्थानीय तानसेन संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन के साथ हुई। राग भोपाली में प्रस्तुत ध्रुपद रचना के बोल थे केते दिन गए अलेखे। पखावज पर जगत नारायण की संगत रही।

पं. सुरेश तलवलकर को कालिदास सम्मान :

संगीत की नगरी ग्वालियर में आयोजित हो रहे तानसेन समारोह में मंगलवार की शाम पांचवी सभा में तबला वादक पद्मश्री पं. सुरेश तलवलकर को संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत भिसे ने वर्ष 2018 के कालिदास सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप दो लाख की आयकर मुक्त राशि शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया गया। इस अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां संगीत एवं कला अकादमी के सहायक निदेशक राहुल रस्तोगी और राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो सहित्य कुमार नाहर भी उपस्थित थे।

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