बीएड प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों को ग्रामों में पढ़ाने जाना होगा
बीएड प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों को ग्रामों में पढ़ाने जाना होगाRaj Express

Bhopal : हर संभाग में बीएड प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों को ग्रामों में पढ़ाने जाना होगा

भोपाल, मध्यप्रदेश : भोपाल में पीजीबीटी कॉलेज प्राचार्य द्वारा उठाये गये कदम की पूरे राज्य में सराहना। लोक शिक्षण संचालनालय प्रदेश में चिन्हित कर रहा है शिक्षक विहीन शालाओं को।

भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में शासकीय व्यय पर पीजीबीटी कॉलेजों में बीएड का प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों की अब अग्नि परीक्षा होगी। इन्हें न ग्रामों की शिक्षक विहीन शालाओं में न सिर्फ पढ़ाना होगा, बल्कि अफसरों द्वारा निर्धारित कसौटियों पर खरा भी उतरना होगा। भोपाल में किए गए इस प्रकार के प्रयोग को बच्चों के भविष्य में हितकारी देखकर पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था की जा रही है।

हाल ही में भोपाल पीजीबीटी कॉलेज एवं प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान में प्राचार्य द्वारा यह व्यवस्था की गई है कि यहां बीएड प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों को गांव की उन शालाओं में पढ़ाने जाना होगा, जो टीचर विहीन हैं। इसके लिए बाकायदरा उन्होंने 98 ऐसे स्कूलों की सूची जारी की है। जहां पर सालों से कोई शिक्षक ही नहीं है। उनका यह प्रयोग जहां आला अधिकारियों को बेहतर लगा है, वहीं प्रदेश भर में इस कदम की प्रशंसा हो रही है। जानकारी है कि अब लोक शिक्षण संचालनालय पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था लागू करे रहे हैं। जितने संभागों के अंतर्गत संचालित पीजीबीटी कॉलेजों में शिक्षक बीएड का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन्हें ग्रामों की शिक्षक विहीन शालाओं में पढ़ाने की तैयारियां हो रही हैं। इसके लिए शीघ्र ही संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जेडी को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

इसलिए निकाला जा रहा है यह रास्ता :

भोपाल के निर्णय को फायदेमंद मानते हुए इस मॉडल को अधिकारी पूरे प्रदेश में इसलिए अपना रहे हैं, क्योंकि इसमें बच्चों का सुनहरा भविष्य छिपा हुआ है। अफसरों का कहना है कि शासन के व्यय पर बीएड कर रहे शिक्षक अनुभवी हैं। वह प्रशिक्षण भी ले सकते हैं और आसानी से पढ़ा भी सकते हैं। जिस प्रकार भोपाल संभाग में शिक्षक को उनके घरों के नजदीक की टीचर विहीन शालाओं में भेजा गया है। ठीक इसी प्रकार का रास्ता हर संभाग में निकाला जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षाओं का समय नजदीक है और बच्चों को कक्षाओं में शिक्षकों की सख्त जरूरत है। नतीजतन जल्द ही यह कदम उठाया जाएगा।

संचालनालय का निर्णय स्वागत योग्य :

वरिष्ठ कर्मचारी नेता मुरारीलाल सोनी कहते हैं कि अगर विभाग पूरे राज्य में यह व्यवस्था करता है तो इस निर्णय को स्वागत योग्य कहा जाएगा। सोनी कहते हैं कि शिक्षक शासन के व्यय पर शासकीय पीजीबीएडी कॉलेजों में बीएड और एमएड का प्रशिक्षण लेते हैं। अभी तक इन्हें इंटर्नशिप के नाम पर कॉलेजों के ऐसे नजदीक स्कूलों में भेजा जाता रहा है, जहां इनकी जरूरत ही नहीं है। सोनी कहते हैं कि प्राचार्यों की लापरवाही के कारण ऐसा होता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कॉलेजों में उन्हीं शिक्षकों को बीएड के लिए दाखिला मिलता है जो पहुंच और प्रभाव की दम पर शहर या इसकी आसपास की परिधि में तबादला करवाकर आते हैं। फिर स्कूलों में पढ़ाने से बचने के लिए दो साल का यह बीएड प्रशिक्षण हेतु दाखिला ले लेते हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था बंद होना चाहिए।

पीजीबीटी कॉलेजों में शासन का अनावश्यक व्यय :

मप्र राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसौदिया का कहना है कि इन कॉलेजों में शासन का अनावश्यक धन खर्च हो रहा है। एक ओर शिक्षक शासन से वेतन ले रहे तो उसी के खर्च पर बीएड कर रहे हैं। जबकि दूसरी ओर जिन बच्चों को पढ़ाने के लिए इन्हें वेतन मिलती है। वहां बच्चे शिक्षकों का इंतजार कर रहे हैं। सिसौदिया का कहना है कि प्रायवेट कॉलेज संचालित हैं। शासन को वहां शासकीय शिक्षकों को बीएड-एमएड प्रशिक्षण लेने की व्यवसथा करनी चाहिए।

प्रदेश में डाइट की जांच करना भी जरूरी :

मप्र समग्र शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री नरेन्द्र दुबे का कहना है कि प्रदेश में जितने भी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानि डाइट संचालित हो रहे हैं। उनकी सख्ती से जांच होना चाहिए। यहां भी शिक्षकों को डीएड करवाया जाता है। कागजों में यहां इंटर्नशिप हो रही है। यहां प्राचार्य से लेकर व्याख्याताओं को स्कूलों का निरीक्षण करना चाहिए। वह भी ठप पड़े हैं। दुबे कहते हैं कि इन संस्थानों में शिक्षकों का ज्यादा से ज्यादा शिक्षकों का उपयोग स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए होना चाहिए।

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