आज जैनेन्द्र कुमार और मन्नत्तु पद्मनाभन की जयंती, सीएम ने किया सादर नमन
आज जैनेन्द्र कुमार और मन्नत्तु पद्मनाभन की जयंतीSocial Media

आज जैनेन्द्र कुमार और मन्नत्तु पद्मनाभन की जयंती, सीएम ने किया सादर नमन

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज देश जैनेन्द्र कुमार और मन्नत्तु पद्मनाभन की जयंती पर उन्हें याद कर रहा है। इस मौके पर मध्यप्रदेश के ने भी ट्वीट कर उन्हें सादर नमन किया है।

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार, उपन्यासकार तथा निबंधकार जैनेन्द्र कुमार और भारत के प्रसिद्ध समाज सुधारक पद्मभूषण से सम्मानित मन्नत्तु पद्मनाभन की जयंती है। आज देश जैनेन्द्र कुमार और मन्नत्तु पद्मनाभन की जयंती पर उन्हें याद कर रहा है। इस मौके पर मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर उन्हें नमन किया है।

जैनेन्द्र कुमार की जयंती पर CM ने किया सादर नमन

एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार, उपन्यासकार तथा निबंधकार जैनेन्द्र कुमार जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन। हिंदी साहित्य के विकास और प्रचार में दिया गया आपका अमूल्य योगदान कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता है।

आज के दिन (2 जनवरी, 1905) जैनेन्द्र कुमार का जन्म हुआ था, जैनेन्द्र कुमार हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार, उपन्यासकार तथा निबंधकार थे। ये हिंदी उपन्यास के इतिहास में मनोविश्लेषणात्मक परंपरा के प्रवर्तक के रूप में मान्य हैं। जैनेन्द्र अपने पात्रों की सामान्यगति में सूक्ष्म संकेतों की निहिति की खोज करके उन्हें बड़े कौशल से प्रस्तुत करते हैं। उनके पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ इसी कारण से संयुक्त होकर उभरती हैं।

मन्नत्तु पद्मनाभन को जयंती पर सीएम ने याद करते हुए उन्हें किया नमन

वहीं, मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मन्नत्तु पद्मनाभन को जयंती पर याद करते हुए उन्हें नमन किया है। सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने एवं शिक्षा का प्रकाश फैलाने में दिये गए अमूल्य योगदान के लिए आप सदैव याद किये जायेंगे।

2 जनवरी, 1878 में हुआ था मन्नत्तु पद्मनाभन कान जन्म

बताते चलें कि मन्नत्तु पद्मनाभन केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारकों में से एक थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कई कठिनाइयों का सामना करते हुए इन्होंने मजिस्ट्रेटी की परीक्षा पास की थी, जिससे वकालत शुरू कर सकें। उस समय नायर समाज में जो अंध विश्वास और पाखण्ड व्याप्त था, उसे दूर करने के लिए मन्नत्तु पद्मनाभन ने 'नायर सर्विस सोसाइटी' नामक एक संस्था की स्थापना की थी। केरल का भारत में विलय कराने के आन्दोलन में उन्हें 68 साल की उम्र में जेल भी जाना पड़ा। बहुमुखी सेवा कार्यों के लिए इन्हें 1966 में 'पद्मभूषण' सम्मान प्रदान किया गया था।

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