सिंगरौली : दो लाख लोगों का आवागमन फिर भी रेलवे क्रॉसिंग पर नहीं पुल
कटनी-सिंगरौली रेलखंड रेलवे क्रॉसिंग।संवाददाता।

सिंगरौली : दो लाख लोगों का आवागमन फिर भी रेलवे क्रॉसिंग पर नहीं पुल

कटनी-सिंगरौली रेलखंड के बरगवां रेलवे स्टेशन से पहले पड़ने वाली इस रेलवे क्रॉसिंग में हर आधा घंटे में रेलवे फाटक बंद हो जाता है और लम्बा जाम लग जाता है, जिससे आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। जिले में ग्राम पंचायत बरगवां और डगा के बीच बनी रेलवे क्रॉसिंग आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बन रही है। कटनी-सिंगरौली रेलखंड के बरगवां रेलवे स्टेशन से पहले पड़ने वाली इस रेलवे क्रॉसिंग में हर आधा घंटे में रेलवे फाटक बंद हो जाता है और लम्बा जाम लग जाता है। इन परिस्थितियों में आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोचिंग गाड़ियों को छोड़ दिया जाए तो सिर्फ डेढ़ दर्जन मालगाड़ियों से ही फाटक हर घंटे आधे घंटे में बंद हो जाता है।

दूसरी तरफ हर दिन लगभग 1 लाख 85 हजार से अधिक छोटे बड़े वाहनों के आवागमन वाली इस क्रॉसिंग से जिला मुख्यालय वैढऩ, सीधी, सतना और रीवा मार्ग भी बाधित होता है। तकरीबन एक दशक से इस रेलवे क्रॉसिंग पर प्लाई ओवर ब्रिज बनाए जाने की मांग की जा रही है। लेकिन हालात यह है कि अभी तक क्रॉसिंग पर पुल बनाने के लिए प्रदेश सरकार का कोई विभाग सामने नहीं आया है । जिला प्रशासन के द्वारा प्रस्ताव भेजा जा चुका है लेकिन किसी प्रकार की प्रगति जैसी स्थिति नहीं है। वादा कर के भूल गये जनप्रतिनिधि प्रशासनिक तौर पर प्रयास तो कर रहे है, इसके बावजूद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। लोकसभा के चुनाव हो रहे हो या फिर विधानसभा के चुनाव ए जिला पंचायत के चुनावी प्रतिनिधियों ने भी इस रेलवे क्रॉसिंग पर पुल बनवा देने का वायदा किया था।

इन सबके बावजूद सभी चुनाव जीतने के बाद लगभग अपना कार्यकाल पूरा करने वाले हैं, किसी ने एक प्रस्ताव तक प्रदेश सरकार को भेजा और नहीं, केन्द्र सरकार से आग्रह किया । कोविड .19 में ट्रेन न चल पाने की स्थिति में भी ट्रेन चलवाने के गुजारिश करने का दिखावा करने वाले जनप्रतिनिधि मूलभूत समस्याओं से विरत रहे। दो लाख वाहनों का आवाजाही रेलवे के मुताबिक इस क्रॉसिंग से प्रतिदिन लगभग दो लाख से अधिक दो पहिया, चार पहिया और भारी वाहनों की आवाजाही हो रही है। जिसमें प्रदेश सरकार को आरओबी बनवाने के लिए आगे आना चाहिए। उसके साथ ही रेलवे अपना योगदान कर सकती है लेकिन रेलवे स्वत: इस पुल को अपने खर्च से नहीं बनाएगी। सडक़ मार्ग से अब तक आवागमन करने वाले वाहनों की संख्या दो लाख से अधिक पहुंच गई है।

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