शहडोल : कबाड़ियों की तिकड़ी संभाग भर से बटोर रही कबाड़
कबाड़ियों की तिकड़ी संभाग भर से बटोर रही कबाड़Raj Express

शहडोल : कबाड़ियों की तिकड़ी संभाग भर से बटोर रही कबाड़

शहडोल, मध्य प्रदेश : बुढ़ार से अमलाई मार्ग पर पहुंच रहा चोरी का लोहा। अनूपपुर और शहडोल के कबाड़ियों का ट्रांसपोर्ट नगरी में संगम।

शहडोल, मध्य प्रदेश। शहडोल सहित अनूपपुर और उमरिया जिले के लिए कबाड़ चोरी का कारोबार और इससे होने वाली असीमित आय का मोह कबाड़ी और वर्दीधारी दोनों ही नहीं छोड़ पा रहे हैं। बीते माहों में एडीजी तक का इससे जुड़ा एक ऑडियो वॉयरल हुआ था, बहरहाल पुराने तो नप गये, लेकिन जो बचे उन्होंने नया ठीहा, नये नाम से, नई जगह पर फिर संचालित कर लिया।

जिले के विभिन्न कस्बाई व ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा कालरियों और इनकी कालोनियों से लोहा व अन्य धातुएं, उपकरण चोरी करना और उसे अवैध ठीहों पर बेचना आम हो चुका है। इन कबाड़ ठीहों के कारण ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों में वाहन चोरी व अन्य लूट की घटनाओं का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। बहरहाल बीते दिनों पुलिस द्वारा बुढ़ार में बड़ी कार्यवाही करने के बाद भी यहां कबाड़ का अवैध कारोबार बंद तो नहीं हुआ, सिर्फ ठीहा बदल गया और शहडोल व अनूपपुर के दो नामी कबाड़ी बुढ़ार में ठीहा बनाकर पूरा काम देख रहे हैं।

काम पुराना, जोश नया :

बुढ़ार के साथ शहडोल के अनीस और अनूपपुर के जानू का नया गठजोड़ इन दिनों नये रंग के साथ नजर आ रहा है। बुढ़ार के अमलाई चौक से अमलाई जाने वाले मार्ग पर यह तिकड़ी इनदिनों पुरानी तर्ज पर नये जोश के साथ कबाड़ बटोर रही है। खबर यह भी है कि शहडोल से जबलपुर के साथ ही अब रायपुर के लिए भी यहां से अवैध कबाड़ से लदे वाहन निकल रहे हैं। इन सबकी खबर स्थानीय थाने और अनुविभागीय अधिकारी को है या नहीं, यह तो वहीं जाने, लेकिन कबाड़ियों का नया गठजोड़ पूरे अंचल में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अवैध कारोबार में बच्चों को धकेला :

कबाड़ का कारोबार बिना लाइसेंस और प्रशासन की अनुमति के बिना करोड़ों का कारोबार हो रहा है, कोयलांचल के इस कारोबार में किसी का नियंत्रण नहीं है और अवैध कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, छोटे बच्चों को धंधे में लगा कर अपराध की दुनिया में धकेल रहे हैं। कोयलांलच की तिकड़ी हर दिन बच्चों के माध्यम से बंद कोल माईंसो और कालोनियों से लोहा सहित अन्य धातुओं की चोरी करवा कर चोरी को बढ़ावा देने में लगे हैं। इसके अलावा इस धंधे में घरेलू उपयोग के सामान सहित कई कीमती समान पानी के मोल कबाड़ी अपने दलालों के माध्यम से खरीद कर करोड़ोंं कमाते हैं।

स्टॉक रजिस्टर में पूरा खेल :

कबाड़ के व्यवसाय को करने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है और अनुमति की आवश्यकता होती है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सिर्फ एक स्टाक रजिस्टर की जरूरत होती है। स्टॉक रजिस्टर में खरीद-बिक्री किए गए समान को दर्ज कर इस व्यवसाय को आसानी से किया जा सकता है। इस व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का कोई रोकटोक नहीं होता है। मजेदार बात यह कि कोयलांचल में यह कारोबार खुलेआम संचालित कथित तिकड़ी द्वारा किया जा रहा है, बावजूद इसके पुलिस प्रशासन ने आज तक स्टॉक पंजी की जांच करने की जहमत नहीं उठाई।

औपचारिकता तक सिमटी कार्यवाही :

कोयलांचल में हर दिन कबाडिय़ों की संख्या में बढ़ती जा रही है, कबाड़ी बिना सत्यापन के साइकिल, मोटरसाइकिल एवं अन्य चोरियों के समाना को बेधड़क खरीद रहे हैं। आलम यह है कि पुलिस कबाड़ियों पर नकेल नहीं कस पा रही है। कभी कभार ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी की जाती है। अक्सर सोलर प्लेट, साइकिल बाइक चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। दिन-दहाड़े सार्वजनिक स्थानों से साइकिल और बाइक चोरी हो रहीं हैं। साइकिल चोरी होने पर अमूमन लोग थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते, क्योंकि पुलिस इसे छोटा मामला बताकर ध्यान नहीं देती। बाइक और साइकिल चोरी की रिपोर्ट तो लिखी जाती है, लेकिन अक्सर ये वापस नहीं मिलते। चोरी की साइकिल और बाइक के कलपुर्जे को अलग-अलग कर कबाड़ में बेच दिया जाता है।

इनका कहना है :

समय-समय पर सूचनाएं मिलने पर कार्यवाही की जाती है, इस संदर्भ में भी जांच की जायेगी।

महेन्द्र सिंह चौहान, थाना प्रभारी, बुढ़ार

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