Umaria : न हुई फतेह, न बंधा सेहरा, फिर भी नही छोड़ रहे हठधर्मिता का डेरा
न हुई फतेह, न बंधा सेहरा, फिर भी नही छोड़ रहे हठधर्मिता का डेराराज एक्सप्रेस, संवाददाता

Umaria : न हुई फतेह, न बंधा सेहरा, फिर भी नही छोड़ रहे हठधर्मिता का डेरा

श्री सेहरा ने उच्च न्यायालय में तबादले को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। याचिका खारिज होने के बाद भी नवीन कार्य स्थल पर वे उपस्थित नहीं हुए।

उमरिया, मध्यप्रदेश। डाइट में पदस्थ व्याख्याता फतेह सिंह सेहरा का स्थानांतरण प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 31 अगस्त को डाइट शहडोल से डाइट उमरिया के लिए प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर किया गया था। जिसके फलस्वरूप उन्हें डाइट शहडोल से डाइट उमरिया 10 सितम्बर को कार्यमुक्त कर दिया गया था। गौरतलब है कि श्री सेहरा डाइट शहडोल में वर्ष 1994 से अर्थात विगत 27 वर्षो से डाइट शहडोल में पदस्थ थे, इतनी लम्बी समयावधि के पश्चातत शासन द्वारा नजदीकी जिले डाइट उमरिया में उनका स्थानांतरण किया गया है, परन्तु श्री सेहरा लगभग दो माह व्यतीत होने के उपरांत भी डाइट उमरिया में अपने हठधर्मिता के चलते उपस्थिति नहीं दी है।

हठधर्मिता का परिचायक :

श्री सेहरा द्वारा राज्य शासन के विरूद्ध उच्च न्यायालय में तबादले को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई थी, जिसे उच्च न्यायालय द्वारा 25 अक्टूबर को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। याचिका खारिज होने के बाद भी नवीन कार्य स्थल पर उपस्थित न होना इनकी हठधर्मिता का परिचायक है। गौरतलब है कि डाइट उमरिया में एक भी अकादमिक स्टाफ कार्यरत नहीं है एवं वहां अंग्रेजी विषय का कोई व्याख्याता भी नहीं हैं एवं डाइट उमरिया संस्थान में अकादमिक और प्रशासकीय आपात की स्थिति बनी हुई है।

दो माह से शिक्षक गायब :

प्राचार्य डाइट उमरिया विनोद मिश्रा से संपर्क करने पर ज्ञात हुआ है कि श्री फतेह सिंह सेहरा आज दिनांक तक डाइट उमरिया में उपस्थित नहीं हुए है न ही कोई सूचना दी है, उनका कार्य स्थल पर उपस्थित न होने का कृत्य प्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक एफ-6-1/2021 /एक/9 दिनांक 24/06/2021 स्थआनातरण नीति 2021 की कंडिका 48 एवं मध्यदप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 एवं 7 का उल्लंघन है।

अनुशासनात्म कार्यवाही की मांग :

एक शासकीय कर्मचारी के द्वारा शासकीय आदेशो की अवहेलना करना शासन की कार्यप्रणाली पर उच्च न्यायालय में प्रश्न चिन्ह खड़ा करना दण्ड की श्रेणी में आता है, परन्तु शासन-प्रशासन द्वारा दो माह व्यतीत होने के पश्चात भी संबंधित पर अनुशासनात्म कार्यवाही न किया जाना संदेहास्पद है। ऐसे शासकीय सेवको पर कार्यवाही न होने से उनका मनोबल बढ़ता है एवं समाज में गलत संदेश जाता है और शासकीय कार्यो में व्यवधान उत्पन्न होता है। जागरूक लोगों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि श्री सेहरा पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।

इनका कहना है :

क्या मैं उन्हें ढूंढने जाऊं, अभी तक न उन्होंने आमद दी है और न ही मेडिकल।

विनोद मिश्रा, प्राचार्य, डाइट उमरिया

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