उमरिया : शिव के मान को ठेस पहुंचा रहे अधिकारी
मुरूम का अवैध उत्खननRaj Express

उमरिया : शिव के मान को ठेस पहुंचा रहे अधिकारी

उमरिया, मध्य प्रदेश : जिले में प्राकृतिक दोहन लगातार हो रहा है, लेकिन बेपरवाह बैठे खनिज अमले को जानकरी तक नहीं है या शायद जानकारी होने के बाद भी वे कार्यवाही करने से गुरेज कर रहे हैं।

उमरिया, मध्य प्रदेश। जिले में मुरूम की एक भी स्वीकृत खदान न होने के बाद भी पंचायतों सहित विभिन्न विभागों में लाखों की मुरूम सप्लाई हो रही है और सरकारी खातों से भुगतान हो रहे हैं, निजी प्रतिष्ठान के मालिक के द्वारा पेट्रोल पंप की भूमि समतल के लिए लाखों की मुरूम खोद ली गई और जिम्मेदार आंखे मूंदे बैठे रहे।

जिले में प्राकृतिक दोहन लगातार हो रहा है, लेकिन बेपरवाह बैठे खनिज अमले को जानकरी तक नहीं है या शायद जानकारी होने के बाद भी वे कार्यवाही करने से गुरेज कर रहे हैं। चर्चा है कि अवैध उत्खननकारियों से खनिज अधिकारी की पुरानी यारी रही है, शायद यही वजह थी, जब जिले में खनिज को लेकर गोलीकाण्ड हो गया, किंतु खनिज अधिकारी चिर निद्रा में लीन हैं और माफियाओं के हौसले पस्त होने की बजाय दिनों दिन बुलंद होते चले जा रहे हैं, लेकिन खनिज के रक्षा के लिए बनाए गए विभाग और उसके अधिकारियों ने प्रदेश के मुखिया के मनसूबों पर पानी फेर कर रख दिया है।

मुरूम का अवैध उत्खनन :

जिले में अमहा के समीप पहाड़ी है, जहां से मुरुम का खनन किया जा रहा है, उक्त क्षेत्र से अवैध उत्खनन कर नेशनल हाईवे 43 के निर्माण में भी मुरुमीकरण किया गया, वहीं करकेली में बन रहे पेट्रोल पंप में भी संचालक ने अमहा-किरनताल के इसी डोंगरी पहाड़ी से मुरुम का उत्खनन कर पटाव कराया। जिस तरह से पहाड़ी से अवैध उत्खनन कर मुरुम का परिवहन किया गया और निर्माण कार्य में इसे लगाया गया, वह खनिज नियमों के विपरीत है, जिसमें न तो विभागीय अनुमति है और न ही सरकार को रॉयल्टी अदा की गई।

कागजों में सिमटी जांच :

मुरुम के अवैध उत्खनन को लेकर तहसीलदार के साथ मिलकर खनिज जांच की गई थी लेकिन तब पर भी खनिज अधिकारी की जांच महज कागजों तक सिमट कर रह गई, जिला मुख्यालय से स्थल की दूरी 12-14 किमी ही होगी, सूत्रों की माने तो जिले में अवैध उत्खनन होता रहा और मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार ने कमीशन के फेर में खनिज संपदा लुटती रही।

सुर्खियों में रहे अधिकारी :

खनिज अधिकारी की कार्यप्रणाली पूर्व से ही कटघरे में रही है, सूत्र बताते है कि जब से कथित अधिकारी को जिले की कमान सौंपी गई है, तब से जिले में अवैध उत्खनन सहित खनिज माफिया सक्रिय रहे हैं, चाहे वह कैंप निर्माण के नाम पर रेत चोरी की हो या भण्डारणों और खदानों की स्वीकृति को लेकर कारोबारियों और खनिज अधिकारी के बीच का नाता ने खूब सुर्खियां बटोर चुकी है।

नोटिस के बाद कहां गई फाईल :

जिले में स्टोन क्रेशर संचालक के खिलाफ लाखों रुपये के जुर्माने की नोटिस जारी कर खनिज विभाग ने अपनी पीठ-थपथपाई थी, सूत्रों की माने तो उक्त फ़ाइल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, पूर्व में रेत कारोबारियों को रेत भण्डारण की स्वीकृति दी गई थी, उसमें नोटिस जारी के बाद प्रतिशत में लेन-देन कर निपटाया गया और नोटिस का खात्मा किया गया, जबकि जिन्होंने मंशा पूरी नहीं कि उनके फाइलों को लीगल कर पेशी शुरू कर दी गई।

इनका कहना है :

पेट्रोल पंप संचालक के द्वारा मुरूम कहां से लाई गई, यह उक्त स्थान व कार्यालय के दस्तावेज देखने के बाद ही बता पाऊंगा।

मान सिंह, सहायक खनिज अधिकारी, खनिज विभाग, उमरिया

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