उमरिया : आपसी संघर्ष में बाघिन की गई जान
उमरिया, मध्य प्रदेश : जंगल में मिले नर बाघ के पंजों के निशान। बाघिन के अंगों के सैंपल लेकर प्रबंधन ने किया अंतिम संस्कार।
उमरिया : आपसी संघर्ष में बाघिन की गई जान
आपसी संघर्ष में बाघिन की गई जानAfsar Khan

उमरिया, मध्य प्रदेश। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखकर बफर जोन में आपसी संघर्ष के दौरान बाघिन की मौत हो गई। शव के परीक्षण में यह बात सामने आई है कि बाघिन पर किसी बाघ ने हमला किया था। फील्ड डायरेक्टर विसेंट रहीम के मुताबिक तीन वर्षीय बाघिन के सभी अंग सुरक्षित हैं। पार्क नियमों के मुताबिक बाघिन की अंतिम संस्कार कर दिया गया। पार्क प्रबंधन के मुताबिक धमोखर बफर जोन में यह घटना धरखोह बीट में हुई है। बुधवार रात में घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग का अमला घटनास्थल पर पहुंचा और शव का परीक्षण कराया।

खोजी कुत्ता दलों ने किया निरीक्षण :

फील्ड डायरेक्टर विसेंट रहीम ने बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र में बुधवार की शाम 4:30 बजे धौरखोह बीट के एक नाले में मादा बाघ के मृत होने की सूचना मिली, जिसके बाद वन अमले द्वारा आस-पास के क्षेत्रों का घेराबंदी कर दिया गया। उसके उपरांत खोजी कुत्ता दलों द्वारा स्थल का निरीक्षण किया गया और पास में ही एक नर बाघ के पंजों के निशान मिले। प्रथम दृष्टया मृत बाघिन पर खरोच और घाव के निशान मिले जो दूसरे बाघ के साथ हुए संघर्ष के प्रतीक हैं। इसके उपरांत वन अमले द्वारा क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें कोई संदिग्ध वस्तु या निशान नहीं पाए गए।

बाघ का किया अंतिम संस्कार :

बांधवगढ़ के पशु चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता, डॉ.हिमाशु (डब्ल्यूसीटी) एवं डॉ. अमूल रोकड़े (एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर) द्वारा गुरूवार की सुबह 9:30 बजे शव का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें बाघ की मृत्यु क्षेत्र की लड़ाई होने की पुष्टि की गई। प्रोटोकॉल के अनुसार बाघिन के शरीर के अंग और अन्य सेंपल लिए गए, जिन्हें निरीक्षण हेतु निर्धारित संस्थानों को भेजा जा रहा है। क्षेत्र संचालक विन्सेन्ट रहीम, उप संचालक सिद्धार्थ गुप्ता, सहायक संचालक आर.एन.चौधरी की उपस्थिति में बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। फील्ड डायरेक्टर विसेंट रहीम ने बताया कि बाघिन के सभी पंजे, नाखून, दांत समेत कोई भी अंग क्षतिग्रस्त नहीं पाया गया है, बाघिन की मौत आपसी संघर्ष में हुई है।

कम पड़ रहा जंगल :

द-टाईगर प्रोजेक्ट के नाम से जंगलों में बाघों के संरक्षण के लिए केन्द्र सरकार राशि तो आवंटित कर रही है, लेकिन धरातल पर पहुंचते-पहुंचते यह राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। ग्लोबल टाईगर फंड से भी पैसा आवंटित होता है, प्रदेश में अच्छे वातावरण के चलते यहां बाघों की जनसंख्या में वृद्धि तो हो रही है, साथ ही सघन जंगल के क्षेत्र में कमी आई है। केन्द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समीक्षा रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी, जिसमें उल्लेख किया गया था कि जिसमें देश में कुल 7.08 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है, जिसका लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा अत्यंत कम आच्छादित वन क्षेत्र है, यह बाघ जैसे वन प्राणियों के लिए उचित जगह नहीं है।

क्षेत्र अधिकार के लिए हो रही भिड़ंत :

बाघ के विचरण वाले इलाकों को अगर देखा जाये तो, यहां पर बेतहाशा बंगलों के अलावा रिसोर्ट और होटलों का भी कब्जा हो चुका है। इतना ही नहीं बाघ अपने कोरिडोर मार्ग पर ही चलता है। रसूखदार, सफेदपोशों ने बाघ के रास्ते पर भी कब्जा कर लिया है। बांधवगढ़ में केन्द्रीय मंत्रियों के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई बड़े राजनेताओं ने आलीशॉन रिसोर्ट बना रखा है। जंगलों का इलाका सिकुड़नें की वजह से बाघ वहां से निकलकर या तो आबादी की ओर बढ़ रहे हैं या बाघों की क्षेत्र के लिए लड़ाई में बाघ एक दूसरे को निशाना बन रहे हैं। धमोखर और खितौली रेंज के बीच अप्रैल के महीने में भी दो शावकों की मौत हो चुकी है। पनपथा बफर के कटनी जिले से लगे हिस्से में एक बाघ की मौत मई के महीने में हो गई थी, जबकि एक बाघिन बुधवार को मारी गई। इस तरह पांच महीने के अंदर चार बाघ-बाघिनों की मौत हो चुकी है।

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