सिहोरा : मौसम के बिगड़े मिजाज, अन्नदाता के माथे पर उभरी चिंता की लकीरें
मौसम के बिगड़े मिजाज, अन्नदाता के माथे पर उभरी चिंता की लकीरेंSyed Dabeer Hussain - RE

सिहोरा : मौसम के बिगड़े मिजाज, अन्नदाता के माथे पर उभरी चिंता की लकीरें

मौसम के बदले मिजाज एवं खरीदी केंद्रों की प्रभारियों की लापरवाही के चलते हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे ढेरों में पड़ी है, जिसकी तकवारी करने किसान दिन-रात खरीदी केंद्रों में डेरा डालें हैं।

सिहोरा, मध्य प्रदेश। मौसम की बेरुखी और खरीदी केंद्रों की लापरवाही से अन्नदाताओं की फजीहत बढ़ गई है। खरीदी के लिए अब केवल 9 दिन का समय शेष बचा है और किसान हर हाल में धान के उपार्जन कराने खरीदी केंद्रों में डेरा डाले हुए हैं। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि सिहोरा तहसील के अनेक खरीदी केंद्रों में लगे धान के अंबार के कारण तिल रखने की भी जगह नहीं बची है।

मौसम के बदले मिजाज एवं खरीदी केंद्रों की प्रभारियों की लापरवाही के चलते हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे ढेरों में पड़ी है, जिसकी तकवारी करने किसान दिन-रात खरीदी केंद्रों में डेरा डालें हैं। लेकिन सुरक्षा का कोई इंतजाम खरीदी केंद्र प्रभारियों द्वारा नहीं किया गया है। वहीं जिस धान की तौल हो चुकी है वह भी परिवहन के अभाव में खुले आसमान के नीचे पड़ी है।

केंद्रों में असुरक्षित उपज :

निजी वेयरहाउस में बनाए गए खरीदी केंद्रों मैं किसान दोहरे शोषण का शिकार हो रहा है। इसके बावजूद भी उसके उपज सुरक्षित नजर नहीं आ रही लमकना सोसाइटी अंतर्गत ग्राम पोडा स्थित विजयश्री वेयरहाउस में बनाए गए खरीदी केंद्र में धान खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है, जहां ना तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और ना ही वर्षा से बचाव के साधन उपलब्ध हैं। वहां अनेक किसानों ने बताया कि रात्रि में ढेर से लगातार धान चोरी हो रही है और वहां का प्रभारी सीधे बात नहीं करता है जिसकी शिकायत भी वे एसडीएम से करने की बात कह रहे हैं।

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