ग्वालियर : जब कुंभ का मेला लग सकता है तो ग्वालियर मेला में विलंब क्यों ?
मेला आयोजन को लेकर व्यापारियों का अर्धनग्न प्रदर्शनRaj Express

ग्वालियर : जब कुंभ का मेला लग सकता है तो ग्वालियर मेला में विलंब क्यों ?

ग्वालियर, मध्य प्रदेश : मेला आयोजन की घोषणा में हो रही देरी से मेला व्यापारियों का सब्र का बांध अब टूटने लगा है। मेला व्यापारी संघ ने गतदिवस अर्धनग्न होकर धरना प्रदर्शन किया।

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। देशभर में अपनी पहचान कायम करने वाले मेला आयोजन की घोषणा में हो रही देरी से मेला व्यापारियों का सब्र का बांध अब टूटने लगा है। व्यापारियों का तर्क है कि हरिद्वार के कुंभ मेला सहित देश में जब सभी जगह मेलों का आयोजन हो सकता है तो ग्वालियर मेला के आयोजन में देरी क्यों की जा रही है? इसे लेकर मेला व्यापारी संघ ने गतदिवस मोतीमहल में धरना प्रदर्शन के बाद गुरूवार को अर्धनग्न होकर धरना प्रदर्शन किया। सूत्रों की माने तो सरकार ग्वालियर मेला आयोजन को लेकर गाइड लाइन तैयार करने में जुटी है, जिसके मुताबिक एक फरवरी से ग्वालियर मेला का आयोजन हो सकता है।

बताया जा रहा था कि 5 जनवरी को मेला आयोजन को लेकर निर्णय हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने की स्थिति में मेला व्यापारी एक बार फिर आंदोलन के मूड में आ गए हैं। गुरूवार को मेला दफ्तर के बाहर अर्धनग्न होकर धरने पर बैठे और शासन प्रशासन से सवाल किया कि हरिद्वार में कुंभ के आयोजन की तैयारियां चल रही हैं, जहां ग्वालियर मेला से कई गुना अधिक लोग पहुंचते हैं।

मेला व्यापारी संघ ने इस दौरान स्मरण कराया कि केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा उद्योग मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा सहमति प्रदान कर दी गई, तदनुरूप प्रदेश शासन के उद्योग मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने मेला व्यापारीगण के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में 15 जनवरी से ग्वालियर व्यापार मेला लगाए जाने की सहमति प्रदान की थी, लेकिन अब मेला तिथि घोषित करने में विलंब किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि शीघ्र तिथि घोषित हो ताकि व्यापारी अपने शोरूम और स्टॉल लगाना आरंभ कर सकें।

संभागायुक्त सक्सेना के संज्ञान में यह भी लाया कि ग्वालियर मेला के आयोजन में यदि और अधिक विलंब किया गया तो देश के विभिन्न स्थानों पर लगने वाले मेलों में दुकानें, शोरूम लगाने वाले मेला व्यापारियों का शेड्यूल अव्यवस्थित हो जाएगा। आयोजन में विलंब होने पर मौसम के प्रतिकूल तेवरों का भी सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि फरवरी के आखिर व मार्च माह की शुरुआत में गर्मी अपना असर दिखाना शुरू कर देती है। इस कारण मेला में विलंब किए जाने पर व्यापारीगण व सैलानियों, दोनों को ही असुविधा होगी।

मेला व्यापारियों का कहना था कि जब देशभर में आगरा, सूरजकुंज सहित अनेक स्थानों पर कोरोना काल में भी एहतियात के साथ विभिन्न मेलों का आयोजन हो सकता है तथा ग्वालियर मेला परिसर में भी मप्र सरकार एवं भारत सरकार द्वारा हस्तशिल्प मेले, शिल्पबाजार लगाए जा सकते हैं? तो ग्वालियर मेला के आयोजन में विलंब क्यों किया जा रहा है जबकि मेला व्यापारी कोरोना गाइडलाइन के पालन के लिए तैयार हैं।

उग्र आंदोलन की चेतावनी :

उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद भी ग्वालियर मेला के आयोजन की तारीख घोषित नहीं की जाती है तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा क्योंकि यह उनकी रोजी-रोटी व ग्वालियर की गौरवशाली परंपरा को निर्विघ्न बनाए रखने का सवाल है। इस मौके पर ग्वालियर व्यापार मेला व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेन्द्र भदकारिया, सचिव महेश मुदगल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता अनिल पुनियानी, उमेश उप्पल, संजय दीक्षित महेन्द्र सेंगर, सुरेश हिरयानी, कल्ली पंडित, बब्बन सेंगर, अनुज सिंह, सुरेश गौड़, रिंकू कैन, राजकुमार जैन, चंदन सिंह बैस आदि सहित करीब एक सैकड़ा व्यापारी मौजूद थे।

आयोजन के बीच ट्रांसर्फर की चर्चा :

उधर मेला आयोजन के बीच मेला सचिव पीसी वर्मा के तबादले की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि नए सचिव का आदेश जल्द ही आएगा और उनके चार्ज लेने के बाद ही मेला की तैयारियां जोर पकड़ेगी, लेकिन मेला व्यापारी संघ चाहता है कि पदेन सचिव पीसी वर्मा ही उपयुक्त हैं। संघ के अध्यक्ष महेंद्र भदकारिया ने कहा है कि गतवर्ष उन्होंने शानदार मेला लगाया है, इसलिए मेला आयोजन से पूर्व उन्हें हटाना उचित नहीं है।

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