विधायक विनय सक्सेना
विधायक विनय सक्सेना|Social Media
मध्य प्रदेश

चिरायु भोपाल जैसा नि:शुल्क इलाज जबलपुर में क्यों नहीं : विधायक विनय सक्सेना

जबलपुर, मध्य प्रदेश : पत्रकारवार्ता में प्रदेश सरकार पर कोरोना के इलाज में जबलपुर से भेदभाव के लगाए आरोप।

राज एक्सप्रेस

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जबलपुर, मध्य प्रदेश। कोरोना संक्रमण काल में प्रदेश सरकार ने जबलपुर के साथ भारी भेदभाव की नीति अपनाई है। जिसका खामियाजा जबलपुर में कोरोना से संक्रमित प्रत्येक मरीज को भुगतना पड़ रहा है। एक ओर जहां भोपाल में चिरायु नाम से संचालित निजी अस्पताल में कोरोना का पूरा इलाज, खानपान, दवाइयों सहित सभी कुछ नि:शुल्क किया जा रहा है। तो फिर ऐसी सुविधा जबलपुर वासियों को किसी भी निजी अस्पताल में अब तक क्यों नहीं की गई। उपरोक्त सवाल मध्य क्षेत्र विधायक विनय सक्सेना ने शुक्रवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में उठाए।

विधायक विनय सक्सेना ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि वर्तमान समय में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और शहर में लगभग 1 हजार पूर्ण सुविधायुक्त बिस्तरों की जरूरत है। जबलपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल को भी अभी तक जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार कोरोना मरीजों के लिए व्यवस्थित नहीं कर पाई है। अविवेक पूर्ण निर्णयों के कारण कैंसर अस्पताल में जहां 350 बिस्तर हैं इसको भी कोरोना पीड़ितों के लिए तैयार नहीं किया जा सका। इस लापरवाही का खामियाजा प्रत्यक्ष तौर पर सिफ और सिर्फ जबलपुर की जनता को ही उठाना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि इतना बड़ा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद भी इलाज के लिए लोग दर-दर भटकने मजबूर हैं। अभी तक इस भवन में ऑक्सीजन पाइप लाइन और छोटे-मोटे कार्य भी पूरे नहीं किए जा सके। यही वजह है कि सैकड़ों बिस्तर क्षमता वाले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मात्र 20 से 25 कोरोना मरीज ही भर्ती हो पा रहे हैं। एक बड़ा और चिंतनीय सवाल खड़ा हो गया है कि अब जबकि जबलपुर के सभी शासकीय और अशासकीय अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह ही नहीं है तो ऐसे में आखिर लोग अपना इलाज कराने कहां जाएं।

कोरोना काल में चौपट हुई व्यवस्थाएं :

विधायक विनय सक्सेना ने बताया कि कोरोना की जबलपुर में शुरुआत से ही, सुख सागर हॉस्पिटल में बड़ी संख्या में संदिग्धों, संक्रमितों को प्रशासन द्वारा रखा जा रहा है और यदि वहां आधुनिक सुविधाएं मौजूद है एवं वहां पर पूर्ण रूप से कोरोना का इलाज क्रिटिकल केअर के साथ करना संभव भी है तो फिर भाजपा सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जबलपुर की जनता को राहत देने के लिए इसकी पूर्ण क्षमता का उपयोग क्यों नहीं किया। अगर मार्च से ही प्रदेश सरकार जबलपुर की स्थिति को लेकर गंभीर होती और सुख सागर को भविष्य की कल्पना और आने वाले संकट तो देखकर अनुबंध कर तैयार किया जाता तो अब जब वर्तमान में कोरोना का कहर और मौत का तांडव जबलपुर में शुरू हो गया है तब यह निजी अस्पताल सरकारी उपक्रम के रूप में चिरायु अस्पताल के तर्ज पर 500-600 मरीजों को निशुल्क कोरोना का प्राथमिकता से पूर्ण उपचार क्रिटीकल केयर सेंटर के रूप में कर रहा होता।

सुप्राटेक कंपनी को प्रतिमाह करोड़ों रुपयों का भुगतान क्यों :

पत्रकारवार्ता में विधायक सक्सेना ने बताया कि अहमदाबाद की सुप्राटेक लैब को जबलपुर से प्रतिदिन हजारों सैम्पल भेजे जा रहे हैं और पूरे प्रदेश से भेजे जा रहे सैम्पल्स का परीक्षण करने के बदले अहमदाबाद के सुप्राटेक लैब को करोड़ों रुपयों का भुगतान किया जा रहा है। जबकि सुप्राटेक से बड़ी व उन्नत लैब जबलपुर में मौजूद हैं, लेकिन उसे सैंपल्स का परीक्षण करने की अनुमति देने में हीला हवाली की जा रही है। विगत कई महीने से सुप्राटेक लैब को जितने करोड़ों का भुगतान किया गया है। उतनी राशि से तो जबलपुर में या प्रदेश में कहीं पर भी हजारों टेस्ट प्रतिदिन क्षमता वाली कई आधुनिक लैब स्थापित की जा सकती थी।

दवाओं के अचानक दाम क्यूं बढ़ाये गए, कौन करेगा जांच :

पत्रकारवार्ता में बताया गया कि कोरोना काल में आपदा को अवसर बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। दवाओं की पुरानी एमआरपी बदलकर नई एमआरपी वाले बॉक्स बना दिए गए और लूट का नया सिलसिला चालू कर दिया गया। कुछ दवा और इंजेक्शन तो केवल कुछ चुनिंदा हाथों तक ही पहुंच रहे हैं और सरकारी अस्पताल में भी इनकी सप्लाई नहीं की जा रही है। ऐसी दवा निर्माता कंपनियों की जांच क्यों नहीं हो रही है। मांग की गई है कि कोरोना के उपचार में लगने वाली दवाओं पर नियंत्रण सरकारी निगरानी समिति के अधीन किया जाए।

अन्य बीमारियों-डेंगू, मलेरिया आदि के मरीजों की दुर्दशा :

विधायक की ओर से बताया गया कि वर्तमान में जबलपुर में कोरोना के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया, चिकिनगुनिया का भी प्रकोप बढऩे लगा है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं होने के नाम पर भर्ती नहीं किये जा रहे और निजी अस्पताल कोरोना रिपोर्ट के बगैर भर्ती नहीं कर रहे है। ऐसे में तत्काल रूप से जिला प्रशासन को इस दिशा में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यक्ता हैए ताकि अन्य बिमारियों के शिकार होने वाले आम लोग काल के ग्रास में जाने से बच सके।

ऑक्सीजन तक मुहैया नहीं, सभी मौतों की हो न्याययिक जांच :

पत्रकारवार्ता में विधायक विनय सक्सेना ने बताया कि एक चौंकाने वाला तथ्य है कि जबलपुर के शासकीय एवं प्राइवेट दोनों ही अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी भी खुलकर सामने आई है। पूर्व में संघ से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मौत भी ऑक्सीजन की कमी के कारण ही हुई इसके अलावा अनेक अन्य मौतों में भी ऑक्सीजन की कमी को ही कारण होने की बातें भी सामने आईं है। साथ ही इस बीमारी से हुई समस्त संदिग्ध मौतों की न्यायिक जांच होनी चाहिए और लापरवाही एवं अव्यवस्था से हुई मौतों के पीडि़तों को न्याय मिलना चाहिए।

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