खान नदी के गन्दे पानी को शिप्रा में जाने से रोकने हर संभव प्रयास करेंगे : सिलावट
खान नदी के गन्दे पानी को शिप्रा में जाने से रोकने हर संभव प्रयास करेंगे : सिलावटSocial Media

खान नदी के गन्दे पानी को शिप्रा में जाने से रोकने हर संभव प्रयास करेंगे : सिलावट

इंदौर, मध्यप्रदेश : खान नदी के गन्दे पानी को शिप्रा में जाने से रोकने के लिये सभी प्रयास किये जाएंगे। यह एक बहुत बड़ी चुनौती है, लेकिन इस चुनौती से सफलतापूर्वक निपटा जाएगा।

इंदौर, मध्यप्रदेश। जल संसाधन, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग मंत्री तुलसीराम सिलावट एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव ने साधु-सन्तों से गत दिवस उज्जैन में मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि खान नदी का जो गन्दा पानी शिप्रा नदी में जाकर मिल रहा है, उसके लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गंभीर हैं एवं इसके समाधान के लिये सभी प्रयास किये जा रहे हैं। श्री सिलावट ने साधु-सन्तों से कहा कि आप लोग आन्दोलन करेंगे तो यह हमारे लिये चिन्ता का विषय है। आपकी भावना एवं संकल्प के लिये सरकार सजग एवं संवेदनशील है। खान नदी के गन्दे पानी को शिप्रा में जाने से रोकने के लिये सभी प्रयास किये जाएंगे। यह एक बहुत बड़ी चुनौती है, लेकिन इस चुनौती से सफलतापूर्वक निपटा जाएगा। श्री सिलावट ने बताया कि इन्दौर में 13 ऐसी फैक्टरियों को बन्द किया गया है, जिनका गन्दा पानी खान नदी में जाता था। उन फैक्टरी मालिकों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उज्जियन, देवास एवं इन्दौर के लिये विशेष कार्य योजना बनाई जाएगी। इस दिशा में तीव्र गति से कार्य किया जायेगा। श्री सिलावट ने कहा कि खान नदी के गन्दे पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिये स्थाई हल निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी साधु-सन्त जो भी समस्या है उससे डॉ.मोहन यादव को अवगत कराएं।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव ने साधु-सन्तों को अवगत कराया कि मंत्री श्री सिलावट, सांसद अनिल फिरोजिया एवं कलेक्टर के साथ उन्होंने खान नदी के गन्दे पानी का अवलोकन किया है। उन्होंने कहा कि, इस समस्या पर अस्थाई नहीं स्थाई हल निकाला जायेगा। पूरा प्रयास किया जायेगा कि शिप्रा नदी का पानी नहाने एवं आचमन के योग्य रहे। उन्होंने बताया कि इन्दौर एवं उज्जैन के अधिकारीगण मिलकर योजनाएं बनायेंगे। आने वाले स्नान पर्वों के लिये नर्मदा का पानी छोड़ा जाएगा।

सर्वसंत समाज के महन्त श्री रामेश्वरदास ने कहा कि संत समाज का मुख्य उद्देश्य है कि शिप्रा का पानी स्वच्छ रहे और आचमन के योग्य रहे। शिप्रा नदी का धार्मिक महत्व है। बारह वर्ष में एक बार यहां सिंहस्थ का मेला लगता है। उन्होंने वाटर ट्रिटमेंट का पानी भी शिप्रा में न मिलाने का अनुरोध किया। अन्य संत समाजजनों ने मंत्रीगण से अनुरोध किया कि शनि मन्दिर से लेकर कालियादेह तक 13 किलो मीटर तक लम्बी नदी का तकनीकी अध्ययन करें और शिप्रा शुद्धिकरण का स्थाई हल करे।

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