छत्तीसगढ़ रामनामी मेला : जैजेपुर में रामनामी मेला का आयोजन, मेला परिसर के 3 KM के दायरे में माँस-मदिरा निषेध

Chhattisgarh Ramnami Fair : एक आदिवासी रामनामी ने बताया राम नाम का भजन गाया और बहाव कम हो गया और सब सुरक्षित तट पर लौटे, इसी दिन से मेला भरना शुरू हुआ।
छत्तीसगढ़ रामनामी मेला
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Submitted By:
Deeksha Nandini

हाइलाइट्स

  • सक्ती जिले के जैजैपुर में राम भक्तों का लगा मेला।

  • रामनामियों ने कहा अयोध्या में राम मंदिर बनने से बहुत खुशी।

  • रामनामी के पूर्वजों 150 साल पहले बतया था राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा का मुहूर्त।

Chhattisgarh Ramnami Fair : सक्ती। छत्तीसगढ़ के जैजपुर में रामनामी मेला का आयोजन किया गया है। मेला परिसर के तीन किमी के दायरे में माँस-मदिरा निषेध है। गुलाराम बताते हैं कि जैसे लोग मंदिर में जूता छोड़कर जाते हैं। वैसा ही हम मानते हैं कि हमारे हृदय में राम का वास है। हमने शरीर के हर अंग में राम का नाम लिखा है तो हमने यह संकल्प लिया है कि हम अपने शरीर को दूषित नहीं कर सकते। इसलिए माँस-मदिरा से परहेज करते हैं। इसके साथ ही हम छल-कपट से भी दूर रहते हैं, राम सभी जाति धर्मों से परे सबके हैं।

सरसकेला से आई सेजबना ने बताया कि, मैं बचपन से भजन गाती हूँ। 7 साल से राम नाम गोदवाया है। मेरे माता-पिता भी भजन गाते थे। यह चौथी पीढ़ी है जो भजन गा रही है। राम नाम की महिमा अपरंपार है। जिस परिसर में यह सब भजन गा रहे हैं। उस परिसर में भी उन्होंने राम नाम लिखवा लिया है। अपने घर में राम का नाम लिखा है। वस्त्रों में राम का नाम लिखा है। रामनामी राम के नाम के उपासक हैं। रामनामियों ने कहा कि किसी भी रूप में राम को भजो, चाहे गेरुवा पहन कर भजो, चाहे मुंडन कराओ लेकिन भेदभाव न करो। छलकपट न करो। यही उनका संदेश है।

राम को भजै सो राम का होई

जैजेपुर में भजन जारी है। रामनामी मनहरण गा रहे हैं। जो राम को भजै सो राम का होई। जब उनको सुनते हैं तो भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी का भजन याद आता है जो भजे हरि को, सोही परम पद पायेगा। रामनामी अपनी हर बात में मानस का कोई दोहा अथवा कबीर का कोई दोहा गाते हैं। उन्होंने बताया कि हमने सब कुछ अपने राम को समर्पित कर दिया है।

राम नाम का एक किस्सा बताते हुए मनहरण बताते हैं कि एक बार महानदी में बड़ी बाढ़ आई। इसमें कुछ रामनामी सवार थे और कुछ लोग सामान्य लोग थे। धार बहुत बढ़ गई। नाविक ने कहा कि अब राम नाम याद कर लो, सबका अंत याद आ गया है। फिर राम नाम का भजन गाया। फिर बहाव कम हो गया और सब सुरक्षित तट पर लौटे। ये 1911 की बात हैं, हम सबको यह बताते हैं। इसी दिन से मेला भरना शुरू हुआ।

रामनामी के पूर्वजों 150 साल पहले बतया था राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा का मुहूर्त :

सक्ती जिले के जैजेपुर में चल रहे रामनामी मेला में आये गुलाराम रामनामी ने बताया कि, 150 साल पहले हमारे पूर्वजों ने बता दिया था कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा शुक्ल पक्ष एकादशी से त्रयोदशी के बीच होगी। 22 जनवरी को श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या में हो रही है। उसकी तिथि हमारे पूर्वजों ने पहले ही बता दी थी। हमारा मेला भी इसी तिथि में भरता है और अद्भुत संयोग है कि श्रीराम के भव्य मंदिर में रामलला की प्राणप्रतिष्ठा इस समय हो रही है। पता नहीं क्या है इस तारीख में जो पंडित बता रहे हैं वही हमारे पूर्वजों ने भी बताई। ये राम ही बताएंगे।

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छत्तीसगढ़ रामनामी मेला
Ram Mandir Pran Pratishtha Ayodhya :भक्तों की कहानी, जिन्होंने मंदिर प्रवेश निषेध होने से शरीर पर गुदवाया राम

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