हत्या के मामले में आरोपियों को बचा रही पुलिस
हत्या के मामले में आरोपियों को बचा रही पुलिस|Social Media
क्राइम एक्सप्रेस

आरोप : हत्या के मामले में आरोपियों को बचा रही पुलिस

कोरोना काल में जहां धरना आयोजनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है, वहीं महुआ ग्राम के रहने वाले पीड़ित परिवार ने थाने से न्याय न मिल पाने के कारण पुलिस अधीक्षक कार्यालय में धरना देने का जोखिम उठा लिया।

Afsar Khan

हाइलाइट्स :

  • थाना प्रभारी सहित थाना में पदस्थ बालमुकुंद पर गंभीर आरोप

  • पुलिस अधीक्षक कार्यालय धरना देने पहुंचा था पीड़ित परिवार

शहडोल, मध्य प्रदेश। पिता की हत्या, हत्या करते समय आरोपियों को देखा गया, आरोपी रमेश केवट, नारायण केवट, नाथूराम केवट, सुरेश केवट, सूरज केवट, पूजा केवट, दीनदयाल केवट, मोनू लाल केवट, राम राजिन्द्र केवट निवासी महुआ टोला थाना सीधी द्वारा जान से मारकर पुल के अंदर फेंक देने की सीबीआई जांच एवं आरोपियों की सीडीआर चेक कराने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए धरना देने की कोशिश की।

कोरोना काल में जहां धरना सहित अन्य सामूहिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है, वहीं जयसिंहनगर क्षेत्र अंतर्गत महुआ ग्राम के रहने वाले पीड़ित परिवार ने थाने से न्याय न मिल पाने के कारण पुलिस अधीक्षक कार्यालय में धरना देने का जोखिम उठा लिया, लेकिन उनके धरना देने से पहले ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय व्ही.डी. पाण्डेय ने एसडीएम से अनुमति न होने की वजह से धरने को तो, अनुमति नही दी, लेकिन पीड़ितों को न्याय दिलाने का आश्वासन देकर घर लौटने की समझाईश दी।

घटना के हैं गवाह :

रामदत्त जायसवाल के पुत्र संजय जायसवाल ने अपने पिता को इंसाफ दिलाने की ठान शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच धरना देना चाहा, लेकिन अधिकारियों की समझाईश और न्याय के आश्वासन ने उसके मन में न्याय की आस जगा दी है, संजय ने पुलिस अधीक्षक को सौपें शिकायती पत्र में उल्लेख किया है कि 8 जुलाई की रात लगभग 11.30 बजे सूचना मिली कि तुम्हारे पिता पुल के अंदर मरे पड़े हैं, जिसे उक्त आरोपियों ने मार कर फेंका हैं। जिसे राजू चर्मकार, तुलसी दास जायसवाल पिता रामेश्वर जायसवाल एवं पंकज जायसवाल द्वारा आरोपियों को मेरे पिता को जान से मारकर फेंकते देखा है।

पहुंची थी 100 डॉयल :

संजय ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत में बताया कि, इस संबंध में थाना को उसी रात सूचना दी गई, हत्या करने की रात में उक्त आरोपियों द्वारा पानी निकासी के संबंध में मेरे तथा मेरे पिता के साथ घर में घुसकर मारपीट की गई थी, जिसके बाद मेरे पिता द्वारा 100 डॉयल को सूचना दी गई, जिसके बाद 100 डॉयल आये, उनके सामने भी उक्त लोग लड़ाई कर रहे थे, जिसके बाद 100 डॉयल वालों ने भी झगड़े के लिए मना किया था, केवट समाज के लोग नहीं मान रहे थे, तो 100 डॉयल वालों ने हमें रिपोर्ट लिखवाने की बात कही, जिसके बाद हम दोनो भाईयों को उसी गाड़ी में बैठाकर थाने ले गये, थोड़ी देर बाद केवट समाज भी थाने पहुंचे, वहां अकेले में केवट समाज के लोगों से वहां पदस्थ बालमुकुंद मिश्रा पुलिस वाले से चर्चा की।

पुलिस वाले ने थाने में पीटा :

पीड़ित ने आरोप लगाया कि हम दोनों भाई संजय एवं अजय के साथ जब सीधी में बालमुकुंद मिश्रा द्वारा मारपीट की गई, साथ ही हमारा मोबाइल छीन कर लड़ाई एवं मारपीट के वीडियो डिलीट करके दोनों भाईयों को थाना में बंद कर दिया गया। उसके बाद मां थाने आई तो उसको भी भगा दिया गया।

आज जहां पायेंगे वहीं मार देंगे :

संजय ने पुलिस अधीक्षक को सौंपी शिकायत में बताया कि उसके पिता रामदत्त हम लोगों की जानकारी लेने के लिए थाने जा रहे थे तो, केवट समाज के कुछ लोगों ने मेरे छोटी बहन को घर में बोल आये कि तुम्हारे पिता को आज जहां पायेंगे वहीं मार डालेंगे और इतना बोलकर पीछा किया, इधर जो थाने में केवट समाज था, वह थाने से निकलकर घर की ओर जा रहे थे और रास्ते में घेर कर उसी रात में केवट के लोग मेरे पिता को जान से मारकर पुल के अंदर फेंक दिया।

सबूत मिटाने के चक्कर में प्रभारी :

संजय ने शिकायत में उल्लेख किया कि पिता के साथ हुए हादसे की जानकारी परिवारवालों द्वारा थाना प्रभारी राजेन्द्र मिश्रा को देने जा रहे तो, हम दोनों भाई को थाना प्रभारी द्वारा गाड़ी में बैठाकर घर की ओर ले आये और रास्ते में रूकवा कर बोले रादत्त जायसवाल को केवट समाज ने मारकर फेंक दिया, जिसको हमने देखा है। टीआई साहब ने वहां रात में पहुंचकर लाश को उठावा ली हैं, जो कि मर चुका था और सबूत मिटाने के चक्कर में था, यहां तक कि पंचनामा भी नहीं बनाया और हमें डरा धमका रहे थे, पिता के शव को अपनी टीम सहित उठवा कर जयसिंहनगर ले जाकर पोस्टमार्टम शव घर में रखवा दिया गया, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई।

नहीं दर्ज किया मामला :

पीड़ित पुत्र ने आरोप लगाया है कि हत्या के बाद जब हमारे द्वारा रिपोर्ट लिखाने थाने गये तो, हमें बोला गया कि बाद में आना। किन्तु उक्त आरोपियों को रात में बुला लिया गया और उक्त आरोपियों को उसी रात घर भेज दिया गया। हमें थाना प्रभारी ने कहा कि जब पिता का क्रियाकरम कर लेना तब आना, फिर मेरे को तीसरे दिन बुलाकर साधारण धाराओं के तहत मामला दर्ज कर बोला कि ये जो घर में आये थे, मारपीट करने वो वाला और हत्या कर दी है, वो बद में लिखेंगे, जब पिता के क्रियाकरम कर लेना, तब रिपोर्ट लिखवाने आना।

जान से मारने की दे रहे धमकी :

पीड़ित पुत्र ने बताया कि 24 अगस्त तक हत्या वाली रिपोर्ट नहीं लिखी गई, साथ ही उक्त आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। परिवार के सदस्यों को भी जान से मारने की धमकी दे रहे है। जब हमारे द्वारा शव नहीं जलाया जा रहा था तो, आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही का आश्वासन दिया गया की कार्यवाही की जायेगी, लेकिन 45 दिन बीतने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। पीड़ित पुत्र ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।

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