महाराणा प्रताप पुण्यतिथि
महाराणा प्रताप पुण्यतिथिSyed Dabeer Hussain - RE

पुण्यतिथि : जानिए कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ था महाराणा प्रताप का निधन?

महाराणा प्रताप के निधन की खबर सुनकर अकबर भी दुखी हो गया था। उसे सारी जिंदगी इस बात का मलाल रहा कि वह महाराणा प्रताप को कभी झुका नहीं कर पाया।

राज एक्सप्रेस। जब भी देश के शूरवीरों योद्धाओं और राजाओं की बात होती है तो उनमें मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप का नाम सबसे पहले लिया जाता है। महाराणा प्रताप का पूरा जीवन ही शौर्य और युद्ध कौशल के एक बेहतरीन उदहारण है। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में लगातार संघर्ष किया, लेकिन कभी भी दुश्मन के आगे झुके नहीं। अपनी मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाले महाराणा प्रताप के जीवन और उनकी वीरता की कहानी के बारे में हम सभी जानते हैं। हालांकि हम में से कई लोग ऐसे हैं, जो यह नहीं जानते हैं कि महाराणा प्रताप का निधन कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ था। तो चलिए जानते है –

चावंड में बिता रहे थे समय :

हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने 1585 ई में चावंड में अपनी नई राजधानी की स्थापना की थी। एक लंबे संघर्ष के बाद महाराणा प्रताप ने अपने सभी इलाके हासिल करना शुरु कर दिए, जो कभी उनके राज्य का हिस्सा हुआ करते थे। दिवेर के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने उदयपुर समेत 36 अहम जगहों पर अपना अधिकार कर लिया था। इसके बाद महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के उत्थान के लिए काम किया। इसके लिए वह अपनी नई राजधानी चावंड में ही रहते थे।

शिकार के दौरान हुए घायल :

महाराणा प्रताप की मृत्यु को लेकर कोई स्पष्ठ जानकारी नहीं है लेकिन कहा जाता है कि एक बार वह शेर के शिकार पर निकले थे। इसी दौरान उन्होंने शिकार करने के लिए कमान को जोर से खींचा तो वह सीधा उनके पेट पर जा लगा। यह चोंट इतनी गहरी थी कि महाराणा प्रताप बुरी तरह से घायल हो गए।

अंतिम दिन :

कहा जाता है कि एक दिन सुबह महाराणा प्रताप ने अपने पुत्र अमर सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मंत्री और सामंत को अपने पास बुलाया। इस दौरान महाराणा प्रताप को चिंतित देख सामंत चुंडावत ने इसका कारण पूछा। इस पर महाराणा प्रताप ने कहा कि मेरा पुत्र कमजोर और आरामपसंद व्यक्ति है। ऐसे में मुझे डर है कि मेरी मृत्यु के पश्च्यात मेरा राज्य बिखर जाएगा। इस पर वहां मौजूद सभी सामंतों ने महाराणा प्रताप को आश्वासन दिया कि, ‘मेवाड़ की शान और इसके गौरव की रक्षा के लिए हम अपना शीश कटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।’

महाराणा प्रताप का निधन :

सभी सामंतों की बात सुनकर महाराणा प्रताप निश्चिन्त हो गए। उनकी चिंता अब खत्म हो चुकी थी। इसके बाद 19 जनवरी 1597 को महाराणा प्रताप ने अपने प्राणों का त्याग कर दिया। कहा जाता है कि महाराणा प्रताप के निधन की खबर सुनकर अकबर भी दुखी हो गया था। उसे सारी जिंदगी इस बात का मलाल रहा कि वह महाराणा प्रताप को कभी झुका नहीं पाया।

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