स्मृति ईरानी की बेटी के नाम नहीं है कोई बार, मानहानि के मामले पर हाईकोर्ट का फैसला

स्मृति ईरानी ने बेटी पर लगे आरोपों को झूठा ठहराते हुए कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दो करोड़ का मानहानि का मामला दर्ज करवाया था। वहीं, अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया है।
स्मृति ईरानी की बेटी के नाम नहीं है कोई बार
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राज एक्सप्रेस। भारत एक ऐसा देश है, यहां जिसका जितना नाम होता है लोग उसको उतना ही बदनाम करने की कोशिश में जुट जाते हैं। इसी कड़ी में लोग अब देश की केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता स्मृति ईरानी की बेटी को भी नहीं छोड़ रहे है। दरअसल, शनिवार को खबर आई थी कि, स्मृति ईरानी की बेटी पर गोवा में बार चलाने का आरोप लगा था। जिसको लेकर अब स्मृति ईरानी ने साफ जानकारी दी और इन आरोपों को झूठा ठहराते हुए कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दो करोड़ का मानहानि का मामला दर्ज करवाया था। वहीं, अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया है।

मानहानि मामले में हाईकोर्ट का आदेश :

दरअसल, कांग्रेस नेताओं ने स्मृति ईरानी की बेटी पर बार चलाने को लेकर भद्दे आरोप लगाए थे, जिसे ख़ारिज करते हुए स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दो करोड़ का मानहानि का मामला दर्ज किया था। इस मामले की सुनवाई करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि, 'पहली नजर में ये साबित हुआ है कि स्मृति ईरानी या उनकी बेटी के नाम पर कोई बार का लाइसेंस नहीं है। ना ही वो रेस्टोरेंट और बार की मालिक हैं। स्मृति ईरानी या उनकी बेटी ने कभी भी लाइसेंस के लिए आवेदन भी नहीं दिया है। गोवा सरकार द्वारा दिया गया शो कॉज नोटिस भी स्मृति ईरानी या उनकी बेटी के नाम पर नहीं जारी किया गया है। पहली नजर में ये लगता है कि, याचिकाकर्ता स्मृति ईरानी ने जो कागजात पेश किए हैं वो उनके पक्ष को मजबूत करते हैं।'

कोर्ट ने आदेश में कहा :

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में ये कहा कि, 'अगर कांग्रेस नेताओं द्वारा किये गए ट्वीट/पोस्ट को सोशल मीडिया पर रहने देते हैं तो उससे स्मृति ईरानी और उनके परिवार की छवि को गहरा नुकसान पहुंचेगा।' इसके अलावा इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सिविल सूट दाखिल करते हुए कांग्रेस नेताओं को समन जारी करके 18 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी।

कोर्ट के आदेश का पैरा नंबर 28 :

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के पैरा नंबर 28 में ये लिखा है कि, 'कांग्रेस नेता जयराम नरेश, पवन खेड़ा और नेटा डिसूजा ने अन्य के साथ मिलकर एक साजिश रची और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उनकी बेटी के खिलाफ दुर्भावना के साथ आक्रामक और तीखी बातें कहीं कोर्ट ने कहा कि, तीनों ही नेताओं ने एक साथ मिलकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उनकी बेटी की सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई।

कोर्ट के आदेश का पैरा नंबर 29 :

पैरा 29 में कहा गया है कि, वादी द्वारा दायर किए गए विभिन्न दस्तावेजों और प्रतिवादी संख्या 1, 2, 3 द्वारा किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंशों को देखने के बाद, मेरा प्रथम दृष्टया विचार है कि, वादी के खिलाफ वास्तविक तथ्यों की पुष्टि किए बिना निंदनीय और अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। प्रतिवादी संख्या 1, 2 और 3 द्वारा किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विभिन्न ट्वीट्स और री-ट्वीट के मद्देनजर वादी और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।'

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