Rom Rom Mein Ram Book Launch: राजनाथ सिंह ने कहा, इस समय सारा देश राममय

दिल्ली में 'रोम रोम में राम' पुस्तक के विमोचन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा, इस पुस्तक के लिये इससे बेहतर समय कोई और नहीं हो सकता था।
Rom Rom Mein Ram Book Launch
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Submitted By:
Priyanka Sahu

हाइलाइट्स :

  • दिल्‍ली में 'रोम रोम में राम' पुस्तक के विमोचन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • पाँच सौ के संघर्ष और प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर हम सबके सामने तैयार हो रहा: राजनाथ सिंह

Rom Rom Mein Ram Book Launch: दिल्ली में आज गुरुवार को 'रोम रोम में राम' पुस्तक का विमोचन हुआ, इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 'रोम रोम में राम' पुस्तक के विमोचन में शामिल हुए। इस मौके पर उन्‍होंने अपने संबोधन में कहा, इस समय सारा देश राममय हो रखा है। चार दिन बाद अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा होनी है। यह हम सबके जीवन में संभवतः सबसे ऐतिहासिक क्षण होने वाला है। पाँच सौ के संघर्ष और प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर हम सबके सामने तैयार हो रहा है।

रोम रोम में राम' पुस्तक के विमोचन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “पीएम मोदी की गरीब कल्याण योजना और गरीबों के कल्याण के बारे में सोच की प्रेरणा भगवान राम से मिलती है। दो लोगों ने हमें एहसास कराया कि हमें समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए काम करने की जरूरत है - पहले भगवान राम और दूसरे पंडित दीन दयाल उपाध्याय। उन्होंने (दीन दयाल उपाध्याय) देश में गरीबों के उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।''

आज जिस ‘रोम रोम में राम’ पुस्तक का विमोचन हुआ है, उसमें श्री रामजन्म भूमि आंदोलन के बारे में अश्विनी जी ने जो संपादकीय लिखे हैं और उसके बाद मंदिर निर्माण से जुड़े कई नये लेखों को श्रीमती किरण चोपड़ा जी के सम्पादन में एक नई पुस्तक के रूप में तैयार किया गया है। इस पुस्तक के लिये इससे बेहतर समय कोई और नहीं हो सकता था। मैं किरण जी और उनकी पूरी टीम को इस प्रयास के लिए बधाई देता हूँ, जिन्होंने इस पुस्तक में अपना योगदान दिया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • हर भारतीय के जीवन से भगवान राम किस हद तक जुड़े हुए है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि जीवन की शुरूआत से लेकर मृत्यु तक राम का नाम लिया जाता है। आप भारत के किसी भी कोने में जाते हैं तो राम आपको भारतीय संस्कृति के अनेक स्वरूपों में प्रतिबिंबित होते हैं। हजारों वर्ष पहले, जो भगवान राम महर्षि वाल्मीकि की प्रेरणा थे, वही भगवान राम, तुलसी, नानक, कबीर की भी प्रेरणा है। एक ही राम, अनेक रूपों और स्वरूपों में हमारी संस्कृति में जाने, माने और पूजे जाते है।

  • नर, वानर, आदिवासी, वनवासी, पशु, मानव, दानव सभी से उनका करीबी रिश्ता है। वह अगड़े, पिछड़े, ऊँच-नीच की भावना से परे हैं, उसके  ऊपर हैं। निषादराज हों या सुग्रीव। कोल, भील को साथ लेकर चलते हैं। शबरी हों या जटायु सभी को साथ ले चलने वाले वे अकेले देवता हैं। भगवान श्रीराम सुशासन के प्रतीक हैं। सबका साथ, सबका विकास का भाव उसी रामराज्य की प्रेरणा से निकला है। भगवान राम कुशल प्रबंधक थे। उनमें संगठन की अद्भुत क्षमता थी। जब राम और लक्ष्मण, दोनों भाई, अयोध्या से चले तो महज तीन लोग थे। लौटे तो पूरी सेना के साथ। एक साम्राज्य का निर्माण कर।

  • राम जिस विनय, शील और मर्यादा के लिए जाने जाते हैं,  ‘अयोध्या’ उसकी जननी है। ऐसी अयोध्या में राम जन्मस्थान का मंदिर नए भारत का प्रतीक होगा। जो भारत को एक बार फिर से दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता देगा। और अयोध्या बाकी दुनिया के लिए प्रेरणास्थल बनेगी।

  • मैं मानता हूँ कि, अयोध्या में रामलला का बना नया मंदिर हमारी सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का प्रतीक है, जिसे सैकड़ों वर्षों से विदेशी आक्रांता नष्ट करने का असफल प्रयास करते रहे। सच तो यह है कि श्रीराम के बिना भारत के व्यक्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती।

  • मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अयोध्या को वह स्थान मिल गया है, जो उसे 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के तुरंत बाद मिल जाना चाहिए था। पर उस वक्त ऐसा नहीं हो पाया। जब रामलला की मूर्ति का प्रकटीकरण हुआ, और इससे स्थानीय लोगों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा था, तब किसी भी स्थानीय मुसलमान ने इसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई थी।

  • आज़ादी के बाद देश में रामजन्मभूमि का मामला कोई हिंदू-मुस्लिम तनाव का विषय नहीं था, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा था, जिसका सम्मान तत्कालीन मुस्लिम समाज का एक पक्ष भी कर रहा था। इतना ही नहीं राम जन्म भूमि आंदोलन की पहली FIR भी सिखों पर अंग्रेजों द्वारा दर्ज की गई थी।

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