सुधांशु त्रिवेदी
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कांग्रेस के साथ पता नहीं कौन सी समस्या, जब-जब भारत का इतिहास करवट लेता वे बहिष्कार करते: सुधांशु त्रिवेदी

भाजपा प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, रामराज्य की प्राण प्रतिष्ठा का श्रीगणेश हो रहा, लेकिन कांग्रेस उसके पक्ष में नहीं। इससे साफ है गांधी जी की कांग्रेस और नेहरू की कांग्रेस में बहुत अंतर है।

हाइलाइट्स :

  • नई दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

  • कांग्रेस पार्टी देश में हर अच्छे अवसर पर व्यवधान पैदा करके संतुष्टि प्राप्त करती है: सुधांशु त्रिवेदी

दिल्‍ली, भारत। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आज गुरुवार को नई दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्‍होंने कांग्रेस द्वारा अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण अस्वीकार करने पर कांग्रेस पर ताबड़तोड़ हमले बोले।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा- किसी भी अच्छे से अच्छे अनुष्ठान में विघ्न उत्पन्न करके संतोष प्राप्त करने वाली प्रव्रत्ति की परिचायक कांग्रेस के साथ पता नहीं कौन सी समस्या है कि भारत का इतिहास जब-जब करवट ले रहा होता है, तब-तब वो उस अवसर के साथ खड़े न होकर उसका बहिष्कार करते हैं। अभी कुछ महीने पहले उन्होंने नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार किया। जब GST लागू हुआ तो उसका भी बहिष्कार किया। G20 के समय दुनिया के सबसे शक्तिशाली 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत आए थे, उसमें भी इन्होंने महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा दिए गए भोज का भी कांग्रेस ने बहिष्कार किया।

हमारे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद जी और अब द्रौपदी मुर्मू जी के अभिभाषण का बहिष्कार किया। 2004 के बाद 2009 तक कांग्रेस ने कारगिल विजय दिवस का बहिष्कार किया। मई 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के नेतृत्व में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद 10 दिन तक कांग्रेस ने कोई बयान नहीं दिया था। और तो और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी, जो इन्हीं की पार्टी के थे उनके भारत रत्न समारोह का भी कांग्रेस ने बहिष्कार कर दिया था।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी

  • जब सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तो जवाहरलाल नेहरू जी ने 24 अप्रैल, 1951 को उस समय सौराष्ट्र के प्रमुख को लिखा था कि 'इस कठिन समय में इस समारोह के लिए दिल्ली से मेरा आना संभव नहीं है। मैं इस पुनरुत्थानवाद से बहुत परेशान हूं, मेरे लिए बहुत कष्टकारक है कि मेरे राष्ट्रपति, मेरे कुछ मंत्री और आप सोमनाथ के इस समारोह से जुड़े हुए हैं और मुझे लगता है कि ये मेरे देश की प्रगति के अनुरूप नहीं है, इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे।

  • कांग्रेस के पास इस बार मौका था कि आप अपने को बदल कर दिखा सकते थे। परंतु इन्होंने इस बार भी ये नहीं किया।

  • कांग्रेस पार्टी देश में हर अच्छे अवसर पर व्यवधान पैदा करके संतुष्टि प्राप्त करती है। जब भी भारत का इतिहास करवट लेता है, कांग्रेस उसका बहिष्कार करने के लिए कूद पड़ती है। जीएसटी के रूप में देश की कर संरचना में ऐतिहासिक बदलाव से लेकर 2004-09 के दौरान कारगिल विजय दिवस मनाने तक, कांग्रेस ने इनका बहिष्कार करने के अलावा कुछ नहीं किया।

  • आज रामराज्य की प्राण प्रतिष्ठा का श्रीगणेश हो रहा है, लेकिन कांग्रेस उसके पक्ष में नहीं है। इससे साफ है कि गांधी जी की कांग्रेस और नेहरू की कांग्रेस में बहुत अंतर है।

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