झारखंड के सिंहभूम जिले में भूकंप आने से डगमगाई धरती
झारखंड के सिंहभूम जिले में भूकंप आने से डगमगाई धरतीSocial Media

झारखंड के सिंहभूम जिले में भूकंप आने से डगमगाई धरती

झारखंड के सिंहभूम जिले की धरती आज दोपहर के समय भूकंप आने से डगमगा गई, इस दौरान रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1 दर्ज हुई है।

झारखंड, भारत। देश व दुनिया में कब क्‍या प्राकृतिक आपदा की घटना होने से लोगों की परेशानी हो, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसी बीच भूकंप के कारण कई राज्‍यों की धरती डगमगा रही है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। अब आज रविवार को भूकंप के झटकों ने झारखंड के सिंहभूम जिले को थरथरा दिया है।

भूकंप की तीव्रता :

बताया जा रहा है कि, झारखंड के सिंहभूम जिले में आए भूकंप की तीव्रता की बात करें तो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सीस्मोलॉजी के मुताबिक, झारखंड के सिंहभूम जिले में दोपहर के समय करीब 2 बजकर 22 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए और इस दौरान रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1 दर्ज हुई है। हालांकि, भूकंप की इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन जब भूकंप के झटके महसूस हुए तो लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

भूकंप की स्थिति में क्या करें क्या न करें

  • भूकंप आने पर आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें।

  • भूकंप के झटके महसूस बंद होने तक बाहर ही रहें।

  • यदि आप गाड़ी चला रहे हो तो गाड़ी को रोक लें और गाड़ी में ही बैठे रहें।

  • पुल या सड़क पर जाने से बचें।

  • भूकंप आने के वक्त यदि आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं।

  • यदि आप घर से बाहर नहीं निकल सकते तो, घर के किसी कोने में चले जाएं।

  • घर में कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें।

  • भूकंप के समय लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें।

क्यों आता है भूकंप :

भूकंप के बारे में आए दिन ही खबरें लगातार सामने आ रही हैं, किसी न किसी राज्य में भूकंप के झटके महसूस हो रहे हैं। ऐसे में बार-बार भूकंप के चलते मन में सवाल आता ही होगा कि, आखिर क्‍यों बार-बार भूकंप के झटके लग रहे हैं। दरअसल, धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी होती है। इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है, जिसे टैक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये टैक्टोनिक प्लेट्स अपनी जगह पर कंपन करती रहती हैं और जब यह प्लेट में बहुत ज्यादा कंपित हो जाती हैं, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

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