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भारत

सरकार की नई शिक्षा नीतियों पर क्यों सवाल खड़ा कर रहे हैं शिक्षाविद

देश की नई शिक्षा नीतियों पर इकॉनोमिस्ट और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने सवाल उठाए हैं।

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार हो या प्रदेश सरकार दोनों इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति अपना रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी देश की हालत शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा अच्छी नहीं है। सरकार की इन्हीं शिक्षा नीतियों पर इकॉनोमिस्ट और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर प्रभात पटनायक ने सवाल उठाए हैं।

नई नीतियाँ शिक्षा पद्धति को बर्बाद कर रही हैं

प्रभात पटनायक ने शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि "नई शिक्षा नीतियाँ यदि लागू हुईं तो यह देश की शिक्षा पद्धति को सुधारने की बजाय बर्बाद कर देंगी"। यह नीतियाँ हिंदुत्व मानसिकता को बढ़ावा दे रही हैं। हमारे विद्यार्थियों को इतिहास के सभी विशिष्ट लोगों की कहानी सुनानी चाहिए लेकिन हम सिर्फ स्वामी विवेकानंद की बात कर रहे हैं, जवाहरलाल नेहरू को तो भूल ही गए। मुझे आश्चर्य है कि कैसे कस्तूरीरंगन जैसी वैज्ञानिक इतिहास के विशिष्ट लोगों की सूची में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम जोड़ना भूल गई।

रिपोर्ट बताती है कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में सिर्फ ज्ञान का भंडार बढ़ रहा है, विद्यार्थियों की संवेदानाएं खत्म हो रही हैं। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के अंदर सिर्फ कौशल बढ़ाएगी। देश के जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालयों पर हो रहे हमले भी हिंतुत्व प्रोजेक्ट का हिस्सा ही हैं।