लॉकडाउन में छिना मजदूरों का रोजगार, सरकारी योजनाएं देंगी पुनः रोजगार
लॉकडाउन में छिना मजदूरों का रोजगार, सरकारी योजनाएं देंगी पुनः रोजगार|Social Media
भारत

लॉकडाउन में छिना मजदूरों का रोजगार, सरकारी योजनाएं देंगी पुनः रोजगार

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते भारत में करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। इन्ही मजदूरों के पुनः रोजगार के लिए केंद्र और राज्य सरकार कई योजनाएं बना रही हैं।

Kratik Sahu

राजएक्सप्रेस। कोरोना वायरस की महामारी देश में न सिर्फ स्वस्थ बल्कि आर्थिक संकट भी लेकर आई है, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा निचले तबके के लोगों को उठाना पढ़ रहा है। आंकड़ों के हिसाब से देश में करीब 9.3 करोड़ को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इन्ही मजदूरों की मदद और पुनः रोजगार के लिए केंद्र और राज्य सरकार सामने आई है। केंद्र और राज्य सरकार लगातार मजदूरों का डाटा तैयार करने में लगे हुए हैं। अब तक मिली जानकारी के हिसाब से पूरे देश में 30 लाख प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों से वापस अपने गृह राज्य लौट गए हैं। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से मजदूरों का डेटा निकालने को कहा है और साथ ही यह निर्देश भी दिया है कि राज्य रोजगार सृजन करें और मजदूरों को अलग-अलग योजनाओं के तहत काम दिया जाये।

भारत में लॉकडाउन के चलते मैनुफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड, लघु और सीमांत उद्योग और ऑटो इंडस्ट्री सेक्टर में काम करने वाले मजदूर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं।

कई मंत्रालय में मजदूरों की स्थिति पर मंथन कर डाटा तैयार किया जा रहा है। डाटा के फॉर्मेट को कुछ इस तरह से रखा गया है कि मजदूरों को उनके स्किल, उनके पसंद के काम, और पलायन से पहले वो जो काम कर रहे थे उसके हिसाब से उन्हें काम दिया जा सके।

इस डाटा फॉर्मेट में गांव, तहसील और जिले का भी क्रम अनुसार विवरण होगा। यह डाटा श्रम मंत्रालय राज्य और केंद्रीय मंत्रालयों से भी शेयर किया जाएगा। मजदूरों का डेटाबेस और उनके जॉब कार्ड का विवरण भी जुटाने की कोशिश की जाएगी।

इसमें ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम में काम रहे मजदूर, प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे मजदूर और कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहे मजदूरों का विवरण जुटाया जाएगा। श्रम मंत्रालय का कहना है कि ऐसे मजदूरों को गरीब कल्याण योजनाओं और निर्माण कार्यों में जगह दी जाए।

इसके अलावा पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना और नेशनल हाईवे कंस्ट्रक्शन में भी इन मजदूरों को काम दिया जा सकता है। कौशल ऐप के जरिए राज्यों में प्रवासी मजदूरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। श्रम मंत्रालय प्राइवेट कंपनियों को भी पत्र लिखकर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग करेगा।

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