Exclusive: कोरोना से आगामी शिक्षण सत्र कितना प्रभावित?
शिक्षण सत्र के बारे में फिलहाल तस्वीर साफ नजर नहीं आ रही। Neelesh Singh Thakur – RE

Exclusive: कोरोना से आगामी शिक्षण सत्र कितना प्रभावित?

"राज खास में जानिये कोविड-19 के कारण एकेडमिक कैलेंडर 2020-21 में कितना परिवर्तन आया है? साथ ही महामारी कोरोना संकट के बीच अगले सत्र के लिए स्कूलों की क्या तैयारी है?"

हाइलाइट्स

  • शिक्षण सत्र पर कोरोना संकट

  • सेशन शुरू होता है 15 जून से

  • प्राइवेट स्कूल जुटे तैयारियों में

  • स्कूलों को सरकारी आदेश नहीं

  • अब लगेंगी सैनिटाइज़र डिवाइस

राज एक्सप्रेस। कोरोना वायरस बीमारी संक्रमण ने रस्म-रिवाज को बदल कर रख दिया है। अब तक लाइलाज साबित वायरस से आर्थिक-सामाजिक बुनियाद हिल गई है। एक और खास पहलू प्रभावित हुआ है “शिक्षा” का। राज खास में जानिये कोविड-19 के कारण एकेडमिक कैलेंडर 2020-21 में कितना परिवर्तन आया है? साथ ही महामारी कोविड के बीच अगले सत्र के लिए स्कूलों की क्या तैयारी हैं...

शैक्षणिक सत्र :

नया एकेडमिक कैलेंडर आम तौर पर सभी शैक्षणिक मंडलों में जून से शुरू हो जाता है। माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश को ही लें तो एमपीबीएसई का सत्र नियमानुसार 1 जुलाई से 15 मार्च तक रहता है। परीक्षाओँ के बाद 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक कक्षा 6 से 12 तक के स्टूडेंट्स के लिए एक माह के लिए स्कूल लगते हैं। तदुपरांत 1 मई से 15 जून तक शिक्षक और विद्यार्थियों के लिए अवकाश की व्यवस्था रहती आई है।

लेकिन इस बार :

कोरोना वायरस डिजीज संक्रमण (covid-19) के कारण एजुकेशनल कैलेंडर गड़बड़ा गया है। देश-दुनिया के सब्र की परीक्षा ले रहे कोरोना के कारण स्टूडेंट्स के इम्तिहान तक बीच में रोकने पड़ गए। स्कूल एवं बोर्ड स्तरीय कई कक्षाओँ की परीक्षाएं अब तक लंबित हैं जबकि ग्रीष्मावकाश कोरोना लॉकडाउन की भेंट चढ़ गया।

इनकी परीक्षा निरस्त :

आपको याद होगा कोरोना महामारी संक्रमण रोकने देश भर में एहतियातन लागू लॉकडाउन के पहले तक एमपीबीएसई की कक्षा 8वीं के चार पेपर हो चुके थे। 20 मार्च को कक्षा आठवीं का पांचवा पेपर था लेकिन बाद में सभी पेपर निरस्त कर दिये गये। इसी तरह छठवी-7वीं की भी 16 मार्च से होने वाली परीक्षाओं को एहतियातन स्टूडेंट्स के हित में निरस्त कर दिया गया।

15 जून के बाद? :

आपको ज्ञात हो, एमपी बोर्ड में 15 जून तक गर्मियों की छुट्टियों के बाद 16-जून से शासकीय स्कूलों में शिक्षकों को मोर्चा संभालना होता है। इन टीचर्स के हवाले नए प्रवेशार्थी, पुस्तक वितरण, गणवेश की उपलब्धता/आवश्यकता सुनिश्चित करने के साथ ही प्रवेशोत्सव का जिम्मा होता है। ताकि 1 जुलाई से अध्ययन कार्य निर्विघ्न रूप से शुरू किया जा सके। लेकिन इस बार कोरोना के कारण ऐसा संभव नजर नहीं आ रहा।

पोर्टल अपडेशन :

हाल-फिलहाल मध्य प्रदेश में शासकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार समूहों के माध्यम से मध्याह्न भोजन बंटवाने, राशन के पैसे (22 मार्च से 30 अप्रैल तक के) 222 रुपये छात्रों के खाते में जमा करवाने के निर्देश हैं। स्टूडेंट्स के खातों में छात्रवृत्ति पहुंचाने के लिए जरूरी जानकारियां भी जनपद पंचायत के साथ साझा करने में शिक्षक सरकारी कड़ी की खास भूमिका में हैं।

प्राप्त आईडी/पासवर्ड से टीचर्स छात्र हित में जुड़ी जानकारियों के संशोधन और पोर्टल अपडेशन का कार्य भी कर रहे हैं। टीचर्स ने बताया कि; आदेश आया है कि शिक्षकों को 7 जून तक घर से काम करना है।

प्राइवेट तैयार, सरकारी लाचार :

संभावनाओं पर यदि विचार किया जाये तो फिलहाल आगामी 2 से 3 महीनों तक शिक्षा जगत को रफ्तार मिलती नहीं दिखती। यदि जुलाई के बाद सितंबर से स्कूलों में सुचारू पढ़ाई के निर्देश जारी भी किये जाते हैं तो स्टूडेंट्स की संख्या के मान से कक्षाओं के लिये कमरों और स्कूल बसों के संचालन जैसे कई मुद्दों से स्कूल और जिला प्रशासन को जूझना पड़ सकता है।

नियमानुसार संचालित निजी स्कूलों में तो नये निर्देशों की स्थिति में समस्या कम होगी लेकिन सरकारी (खासकर ग्रामीण/आदिवासी अंचल) स्कूलों में परेशानी ज्यादा बलवती हो सकती है।

इस मुद्दे पर टेलिफोनिक चर्चा में रतलाम पब्लिक स्कूल की प्राचार्य एवं सीबीएसई की सिटी कोआर्डिनेटर संयोगिता सिंह का कहना है कि; 15 जून से सत्र शुरू करने का निर्णय सरकार पर निर्भर है। स्कूल में शासकीय एडवाइजरी के मुताबिक नियमों का पूर्णतः पालन होगा।

“जरूरत पड़ने पर एक दिन छोड़कर एक दिन वाला ऑड ईवन फार्मूला अपनाया जा सकता है। नर्सरी से लेकर सभी कक्षाओं के बच्चों के स्वास्थ्य का आगे भी विशेष परिस्थितियों में विशेष ख्याल रखेंगे। स्कूल प्रबंधन छात्र संख्या के बारे में पहले से सजग रहा है। कक्षाओं और खेल परिसर का आकार विद्यार्थी संख्या के मान से पर्याप्त है। हम बच्चों के सिटिंग अरेजमेंट में एक मीटर का दायरा कवर करते हैं। स्टूडेंट्स हित में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।”

संयोगिता सिंह, प्राचार्य रतलाम पब्लिक स्कूल एवं सिटी कोआर्डिनेटर, CBSE

एजुकेशन पैटर्न पर नजर :

प्राचार्य सिंह बताती हैं कि स्कूल प्रबंधन कोरोना की परेशानी से पटरी पर लौट रहे देशों में अपनाये जा रहे एजुकेशन पैटर्न पर भी ध्यान दे रहा है। ताकि भारतीय परिवेश में उसे सरलता से ढाला जा सके। कोरोना संकट के बाद शासकीय आदेशों पर जब भविष्य में नियमित स्कूल संचालन शुरू होगा तब सामूहिक प्रार्थना और लंच ब्रेक जैसे विशेष कालखंड के दौरान स्टूडेंट्स के स्वास्थ्य हित में खास सतर्कता बरती जाएगी।

स्कूल बस परिवहन संचालन के मामले में शासकीय गाइड लाइन को फॉलो किया जाएगा। वे बताती हैं कि“कोरोना संक्रमण काल में भी बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए रोजाना ऑन लाइन क्लासेस के जरिए पढ़ाया जा रहा है।”

“ऑन लाइन क्लासेस रोज चलती हैं। बच्चों का फीडबैक बढ़िया मिल रहा है। पढ़ाई के लिए प्रेरित करने कैलिफोर्निया की कंपनी की मदद से मल्टी लेवल ई-लाइब्रेरी बनवाई गई है। अधिक से अधिक स्टडी मटेरियल नेट पर उपलब्ध करवा कर स्टूडेंट्स की जिज्ञासा का समाधान करने का हमारा प्रयास है।”

संयोगिता सिंह, प्राचार्य रतलाम पब्लिक स्कूल एवं सिटी कोआर्डिनेटर, CBSE

सेफ्टी डिवाइस :

मध्य प्रदेश में आदिवासी बहुल जिला कहे जाने वाले झाबुआ के इंदौर पब्लिक स्कूल ने जरूरी हो चलीं सेनेटाइजिंग डिवाइस को स्कूल में इंस्टॉल करने की तैयारी की है। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक फिलहाल तो आगामी कैलेंडर के लिए कोई सरकारी सर्कुलर जारी नहीं हुआ है। लेकिन बच्चों की सेफ्टी का खास ख्याल रखा जाएगा। भविष्य को ध्यान में रखकर स्टडी मटेरियल तैयार करने की भी बात प्राचार्य ने चर्चा में कही। सोशल डिस्टेंसिंग के परिपालन के बारे में उन्होंने कहा कि;

“कुछ प्रेक्टिकल प्रॉब्लम हो सकती हैं। कुछ स्टूडेंट्स 60 किलोमीटर दूर से भी आते हैं। एक शिफ्ट में अभी 20 से 25 बच्चे होते हैं। आगे ऑड ईवन फॉर्मूला अपना सकते हैं। स्टूडेंट्स को सेफ्टी प्रिकाशन के लिए अवेयर करेंगे। ओके प्ले एवं महिंद्रा एंड महिंद्रा ने स्कूलों के लिहाज से कुछ सेफ्टी मेजर डिवाइस/प्रॉडक्ट लॉंन्च किए हैं। जरूरत के हिसाब से सेनिटाइजर जैसे इन सुरक्षा साधनों को स्कूल में लगवाया जाएगा।”

दीप्ति सरन, प्रिंसिपल, इंदौर पब्लिक स्कूल, झाबुआ, मध्य प्रदेश

स्टार परफॉर्मर ऑफ दे डे :

आईपीएस में जारी ऑनलाइन स्टडी प्रक्रिया के बारे में प्राचार्य सरन ने बताया कि अभिभावक भी खासे जागरूक हैं। साथ ही प्रत्येक दिन की ऑन लाइन पढ़ाई में अव्वल रहने वाले स्टूडेंट्स का नाम समूह में बतौर स्टार परफॉर्मर ऑफ दे डे घोषित करने से भी स्टूडेंट्स खासे उत्साहित हैं।

“ऑन लाइन स्टडी विकल्प मात्र है। किताबें हमेशा जरूरी थीं और भविष्य में भी इनकी उपयोगिता कम नहीं होगी।”

दीप्ति सरन, प्रिंसिपल, इंदौर पब्लिक स्कूल, झाबुआ, मध्य प्रदेश

स्टेट बोर्ड एजुकेशन :

माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध निजी स्कूलों में व्यवस्थाएं आगामी परिस्थितियों से निपटने के लिए ठीक हैं। इन स्कूलों में ऑन लाइन स्टडी से लेकर कमरों, खेल मैदानों के प्रबंध व्यापक दिख रहे हैं।

“देखिये आगामी सेशन के लिए बोर्ड से अभी तो कोई आदेश नहीं मिले हैं। लेकिन 11 तारीख से दूरदर्शन पर कक्षा 9 से 12 तक के स्टूडेंट्स के लिए पाठ्यक्रम आधारित कार्यक्रमों का प्रसारण होगा। इसके अलावा स्टूडेंट्स का ग्रुप बनाकर ऑन लाइन स्टडी से भी बच्चों की जिज्ञासाओं के समाधान के लिए स्कूल प्रबंधन तत्पर है। जरूरत पड़ने पर दो शिफ्ट में कक्षाओं का संचालन किया जाएगा क्योंकि कोविड-19 से सुरक्षा के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी है।”

वंदना व्यास, उप प्राचार्य, मदर मेरी स्कूल, नागदा, मध्य प्रदेश

नज़र सरकारी स्कूलों पर :

लेकिन सरकारी स्कूलों में अगला सत्र शुरू करने में शिक्षकों की उपलब्धता और कमरों की कमी के अलावा पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। शासकीय स्कूल में पदस्थ शिक्षक ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि; “ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के कई स्कूलों में कक्षों की कमी के कारण दर्ज स्टूडेंट्स की संख्या के मान से कक्षा संचालन में दिक्कत होगी। साथ ही शिक्षकों की कमी के कारण भी शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। पेयजल की समस्या से जूझ रहे इलाकों के स्कूलों में स्वच्छता की अनिवार्य कड़ी प्रभावित होने से सोशल डिस्टेंसिंग के नियम टूटने की भी आशंका है।”

सुझाव यह भी :

सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर ऑन लाइन स्टडी फिलहाल अभी तक दूर की कौड़ी नजर आ रही है। हालांकि सरकार ने दूरदर्शन के जरिए पाठ्यक्रम ज्ञान कराने की कवायद जरूर की है लेकिन यह लर्निंग की टू-वे प्रोसेस न होकर वन-वे प्रक्रिया होने से ज्यादा प्रभावकारी नहीं है। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की समस्याओं पर नजदीक से नजर रखने वाले सोशल एक्टिविस्ट पुरुषोत्तम पारवानी ने व्यवस्था में सुधार के कुछ विकल्प सुझाए हैं।

“परेशानी तब तक रहती है जब तक उसे समस्या माना जाये। दूरदर्शन और सोशल मीडिया मददगार जरूर हैं लेकिन खास तौर पर पढ़ाते वक्त स्थानीय भाषा-बोली अहम हो जाती है। ऐसे में सीनियर स्टूडेंट्स को जोड़कर भी शिक्षण कार्य को पटरी पर लाकर अध्यापन कार्य सतत जारी रखा जा सकता है। सहयोग करने वाले स्टूडेंट्स को विशिष्ट प्रमाण पत्र प्रदान कर नैतिक शिक्षा के संकल्प को भी दोहराया जा सकेगा।”

पुरुषोत्तम पारवानी, सोशल एक्टिविस्ट, शुजालपुर, मध्य प्रदेश

स्थिति अब तक :

फिलहाल न तो सरकार ने निरस्त की गईं परीक्षाओँ के बारे में कोई नई तारीखें घोषित की हैं और न ही अगले सत्र के बारे में ही कोई दिशा-निर्देश जारी किये हैं। गौरतलब है इस बार सरकारी स्कूलों में कक्षा 8 की परीक्षाएं भी बोर्ड थीं। खास तौर पर कक्षा 12वीं के स्टूडेंट्स प्रतियोगी परीक्षाओं और कॉलेज में दाखिले को लेकर पशोपेश की स्थिति में हैं। स्कूल स्तरीय कक्षा 5, 6, 7, 9, 11 के बाकी पेपर के बारे में भी स्थिति अस्पष्ट है।

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