केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक|Social Media
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Exclusive : केंद्रीय एचआरडी मंत्री निशंक से नई शिक्षा नीति पर खास बातचीत

भारत के नव निर्माण में नई शिक्षा नीति मजबूत आधार शिला बनेगी - केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस

राज एक्सप्रेस। भारत की शिक्षा नीति में 34 वर्ष बाद शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद जगी है। नई शिक्षा नीति से क्षेत्रीय भाषाओं और प्रबंधन शिक्षा को भी बल मिलेगा। विद्यार्थी पहले की तुलना में ज्यादा विविध विषयों में पारंगत होकर प्रबंधन की पढ़ाई करने आएंगे। इससे शिक्षा संस्थानों व देश को बहुत लाभ होगा। भारत के नव निर्माण के लिए शिक्षा नीति मजबूत आधार शिला बनेगी। पेश है केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से नई शिक्षा नीति पर खास बातचीत के प्रमुख अंश।

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पांचवी कक्षा तक स्थानीय भाषा, मातृ भाषा में पढ़ाने का निर्णय लिया गया है, इसके पीछे क्या सोच है?

A

जो प्रारंभिक शिक्षा है उसे तो मातृ भाषा में होना चाहिए। जो कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में जो कि बहुत बड़े वैज्ञानिक हैं, इसरो के चेयरमैन रह चुके हैं, उनकी कमेटी और वैज्ञानिकों ने अनुशंसा की है। उनकी राय के बाद यह निचोड़ आया है कि 03 से 06 वर्ष के बच्चों का 85 प्रतिशत मस्तिष्क का विकास इस आयु में होता है, इसलिए वह अपनी मातृभाषा में ज्यादा अभिव्यक्त कर सकता है और वह ज्यादा सामाथ्र्यवान होता है। वैसे भी जो दुनिया के शीर्ष देश हैं, वह सभी देश अपनी मातृभाषा में अपने बच्चों को पढ़ाते हैं और वह श्रेष्ठ और शीर्ष देशों में हैं। यूनेस्को ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरसंभव बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में ही होनी चाहिए। इस निर्णय के बाद पूरे देश में उत्साह है, उमंग है, क्योंकि जो हमारे देश की 22 भाषाएं हैं जो हमारे संविधान की अनुसूची आठ में सम्मिलित हैं, वो 22 भारतीय भाषाओं को भी सशक्त होना है, ये तभी जिंदा रहेंगी जब उस राज्य के लोग उसको पढ़ेंगे। हम सब चाहते हैं कि जो 22 भारतीय भाषाएं हैं वह सुदृढ़ हों। सारी भाषाएं हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और हम सभी भाषाओं को विकसित करना चाहते हैं और इसलिए बच्चा अपनी प्रारंभिक शिक्षा का अध्ययन अपनी मातृभाषा, स्थानीय भाषा में करे, यह प्रस्ताव आया है जिसका पूरे देश ने बहुत स्वागत किया है।

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क्या भारत की नई शिक्षा नीति व्यवहारिक है? और क्या लगता है इससे टी. शैप्ड लोगों की संख्या बढ़ेगी?

A

भारत की नई शिक्षा नीति में हमने कोशिश की है कि आने वाले समय में विद्यार्थी का पढ़ाई के साथ कौशल विकास भी हो। आज कारपोरेट की दुनिया में टी. शैप्डश लोगों की वरीयता बढ़ रही है, टी शैप्ड लोग वो होते जो एक से अधिक योग्यता वाले होते हैं। नई शिक्षा नीति द्वारा कोशिश की जाएगी की भारत में एकाधिक योग्यता वाले लोगों की संख्या बढ़े। भारत की शिक्षा नीति में 34 वर्ष बाद शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद जगी है। नई शिक्षा नीति से प्रबंधन शिक्षा को भी बल मिलेगा, छात्र पहले की तुलना में ज्यादा विविध विषयों में पारंगत होकर प्रबंधन की पढ़ाई करने आएंगे तो खुद शिक्षा संस्थानों व देश को बहुत लाभ होगा। आज हमारे सामने तमाम प्रकार की दिक्कत हैं, जैसे हमारा शिक्षा तंत्र कई हिस्सों में बंटा हुआ हैए सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच सीमित है, शिक्षकों की कमी है, संस्थागत स्वायत्तता सीमित है। नई शिक्षा नीति में शोधकर्ताओं के लिए प्रतिस्पर्धा व योग्यता आधारित अनुसंधान के लिए धनराशि की व्यवस्था करते हुए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना होगी। इससे शोध की संस्कृति को बढ़ावा मिल सकेगा। यह एक अच्छा अवसर होगा जब सभी स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थान अपने विजन डाक्यूमेंट को नई शिक्षा नीति के अनुसार तैयार करेंगे।

Q

नई शिक्षा नीति को बनाने में लोगों की राय ली गई है? कितनी व्यवहारिक है ये नीति?

A

यह नीति एक महत्वपूर्ण रास्ता प्रशस्त करेगी, ये नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस नीति पर देश के कोने-कोने से राय ली गई है और इसमें सभी वर्गों के लोगों की राय को शामिल किया गया है, देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इतने बड़े स्तर पर सबकी राय ली गई है। अब बच्चों का रिपोर्ट कार्ड नहीं होगा, उसकी जगह उनको प्रोग्रेस कार्ड मिलेगा। अब ये छात्रों पर निर्भर करता है कि वो क्या विषय लेना चाहते हैं। अब वो इंजीनियरिंग के साथ संगीत भी ले सकते हैं। नई शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा में बहुत बदलाव होंगे। नई शिक्षा नीति में आनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। हमने उच्च शिक्षा के लिए एक आयोग बनाया है। इसके लिए चार काऊंसिल भी बनाई गई हैं। हमनें मानव संसाधन विकास मंत्रालयका नाम नहीं, नीति भी बदली है। नई शिक्षा नीति को हम संस्कारयुक्त शिक्षा नीति बनाएंगे, इससे हम विश्व स्तर की शिक्षा नीति की तरफ आगे बढ़ेंगे। यह शिक्षा नीति विश्व के सबसे बड़े नवाचार परामर्श के पश्चात आई है जिसका मुख्य लक्ष्य भारत को ज्ञान आधारित महाशक्ति बनाना है। यह नीति पहली बार पूर्णत: भारतीय नीति है जो नवाचार युक्त गुणवत्तापरक प्रौद्योगिकी युक्त होने के साथ भारतीय मूल्यों पर आधारित है। जनसंख्या लाभांश का पूरा लाभ उठाते यह नीति, युवा भारत को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने हेतु कृतसंकल्पित है। नीति समावेशी समानता सर्वभौमिकता के आधार पर समाज के सबसे पिछड़े विद्यार्थी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। क्रियान्वयन की चुनौती को समझ कर शिक्षा मंत्रालय ने व्यापक तौर पर परामर्श की प्रक्रिया शुरू की है। देश के सभी वर्गों द्वारा नीति का दिल खोलकर स्वागत इस बात को उजागर करता है कि नई शिक्षा नीति में सबकी आशाओं, अपेक्षाओं का ध्यान रखा गया है।

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आप देश की संस्थाओं की रैंकिंग, गुणवत्ता को बढ़ाकार शिक्षा का आकर्षक गंतव्य बनाने की जो बात करते हैं, मौजूदा समय कैसे संभव होगा।

A

मूलत: मैं एक अध्यापक रहा हूं। मैंने अत्यंत विषम परिस्थितियों में शिक्षा हासिल की है, इसलिए शिक्षा के महत्व को मैं भली भांति समझ पाता हूं। हम शोध, अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित कर शिक्षा को बहुआयामी बनना चाहते हैं। हम भारतीय संस्थाओं के उन्नयन के प्रति संकल्पित हैं, हमारा लक्ष्य है कि हमारे संस्थान विश्व के शीर्ष संस्थाओं में शुमार हों, उसके लिए हम आधारभूत सरंचना एवं मानव संसाधन विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देने के तहत हम सवा सौ से ज़्यादा शीर्ष शैक्षिक संस्थाओं के साथ काम कर रहे हैं। विदेश से विद्यार्थियों को आकर्षित करने हेतु हम स्टडी इन इंडिया के तहत कई कदम उठा रहे हैं। हमने आसियान देशों को आईआईटी में एक हज़ार छात्रवृतियां दी हैं। ज्ञान और ज्ञान प्लस के माध्यम से हम विदेशी फैकल्टी के साथ सहयोग कर रहे हैं, हम इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स, की स्थापना कर शोध और शिक्षा के सर्वोत्कृष्ट संस्थान बनाने के लिए प्रतिबंध हैं। कुल मिलाकर नव भारत निर्माण के लिए शिक्षा नीति मजबूत आधार शिला बनेगी।

Q

नई शिक्षा नीति के पांच सबसे महत्वपूर्ण बिंदु क्या हैं और इनसें छात्रों का क्या लाभ होगा?

A

मुख्य रूप से निवेश में पर्याप्त वृद्धि और नई पहल के साथ 03 से 06 वर्ष के बीच के सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा तय करना है। मेरे लिए पांच प्रमुख बातों में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम, स्कूली शिक्षा के लिए 100 प्रतिशत नामांकन अनुपात प्राप्त करना। लॉ और मेडिकल एजुकेशन के अलावा समस्त उच्च शिक्षा के लिए सिंगल रेगुलेटर, विज्ञान, कला, मानविकी, गणित और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए एकीकृत शिक्षा और वर्ष 2025 तक 50 प्रतिशत छात्रों को वोकेशनल प्रदान करना शामिल है। इनमें भी सबसे महत्वपूर्ण मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम है। अभी यदि कोई छात्र 06 सेमेस्टर इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाता है तो उसको कुछ भी नहीं मिलता। अब एक साल के बाद पढ़ाई छोड़ने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा व 3-4 साल के बाद पढ़ाई छोड़ने पर डिग्री मिल जाएगी। देश में ड्राप आऊट अनुपात कम करने में इसकी बड़ी भूमिका होगी। शिक्षा नीति से देश में रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा व रटकर पढ़ने की संस्कृति खत्म होगी।

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