गंगा नदी के पानी का रंग बदलने से बढ़ी जिला प्रशासन की टेंशन,DMने गठित की टीम
गंगा नदी के पानी का रंग बदलने से बढ़ी जिला प्रशासन की टेंशन, DM ने गठित की टीमSocial Media

गंगा नदी के पानी का रंग बदलने से बढ़ी जिला प्रशासन की टेंशन,DMने गठित की टीम

इन दिनों गंगा नदी के पानी का रंग बदलता हुआ सा नजर आ रहा है और ऐसा घाटों के किनारों से लेकर मध्य धारा तक देखने को मिला है। जिससे जिला प्रशासन की टेंशन काफी बढ़ गई है।

वाराणसी, उत्तर प्रदेश। आपने कई बार देखा होगा कि, नदियों या तालाबों के पानी का कलर आपको कुछ बदला हुआ सा दिखाई दिया होगा। ऐसा ही कुछ इन दिनों वाराणसी में मोक्षदायिनी गंगा के साथ होता नजर आरहा है। जी हां, इन दिनों गंगा नदी के पानी का रंग बदलता हुआ सा नजर आ रहा है और ऐसा घाटों के किनारों से लेकर मध्य धारा तक देखने को मिला है। गंगा का पानी इन दिनों काफी हरा होता नजर आरहा है। जिससे जिला प्रशासन की टेंशन काफी बढ़ गई है।

बढ़ी जिला प्रशासन की टेंशन :

दरअसल, पिछले कुछ दिनों में वाराणसी से होकर निकलने वाली गंगा नदी का पानी का रंग काफी हरा नजर आरहा है। जिससे जिला प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है। इस टेंशन की वजह से गंगाजल के बदलते रंग की सचाई जानने के लिए वहां के DM कौशल राज शर्मा ने मजिस्ट्रेट की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया। DM शर्मा द्वारा गठित की गई टीम द्वारा मंगलवार से गंगाजल के बदले हुए रंग की जांच शुरू कर दी हैं। गंगा का यह पानी 21 मई को पहली बार हरे रंग का देखा गया था। यह पानी वाराणसी के खिड़कियां घाट से लेकर मिर्जापुर तक देखा गया है।

लिए गए गंगा जल के सैम्पल :

बताते चलें, जिन-जिन जगहों पर गंगा का पानी हरा पाया गया है, वहां से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा जल के सैम्पल लिए है। अब इन सैम्पलों की जाँच की जाएगी। इस मामले में जानकारी देते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया है कि, 'इसके तीन-चार दिनों बाद स्थिति सामान्य हो गई थी लेकिन उसके कुछ दिनों बाद फिर से गंगाजल का रंग बदल गया। इस दौरान हमने पहले वाराणसी के इंड्रस्ट्रियल एरिया से गिरने वाले नालों की जांच की लेकिन जांच में ये बातें सामने आई कि नाले के किसी केमिकल के कारण ऐसा नहीं हुआ है।'

2 दिन में आएगी रिपोर्ट :

अधिकारी ने बताया है कि, गंगा जल से लिए गए सैम्पल की जांच दोबारा की कराई जाएगी। दोबारा होने वाली इस जांच की रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दो दिन यानि 10 जून तक सौंप दी जाएगी। गंगा से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि, 'गंगा के बदले रंग की वजह गंगा जल में ठहराव है। वाराणसी में गंगा किनारे हो रहे निर्माण के कारण ऐसा हो रहा है। गंगा का बदला रंग जलीय जीवों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।'

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