अच्छी पत्रकारिता लंबे समय तक जिंदा रहेगी : राष्ट्रपति
अच्छी पत्रकारिता लंबे समय तक जिंदा रहेगी : राष्ट्रपति |Social Media
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अच्छी पत्रकारिता लंबे समय तक जिंदा रहेगी : राष्ट्रपति

देश में पत्रकारिता जगत के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड "रामनाथ गोयनका" से कई पत्रकारों को सम्मानित किया गया। अवॉर्ड राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों दिया गया।

Rishabh Jat

राज एक्सप्रेस। रामनाथ गोयनका सम्मान से उन पत्रकारों को नवाजा जाता है, जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम किए हो। अवॉर्ड राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति ने अवॉर्ड जीतने वाले सभी पत्रकारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि,

सभी पत्रकारों के लिए महात्मा गांधी एक अच्छे गाइड हैं। जिन्होंने हमेशा सच को सामने रखा। ब्रेकिंग न्यूज के सिंड्रोम में ‘फाइव डब्ल्यू’ का प्रचलन लगातार खत्म होता जा रहा है। जिसे पुराने लोग किसी भी स्टोरी के एक न्यूज रिपोर्ट के तौर पर पेश करने के लिए काफी जरूरी मानते थे। फेक न्यूज काफी बढ़ रही हैं। लोग खुद को पत्रकार बताकर ऐसी खबरों का चलन बढ़ा रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने एक नए तरह की पत्रकारिता को जन्म दिया है। जिससे जर्नलिस्ट तथ्यों को खुलकर सामने रख सकते हैं। साथ ही तस्वीर के हर पहलू को सामने रख सकते हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वरिष्ठ पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को भी याद किया। उन्होंने कहा,

जैसा कि आपको पता है कि, मेरा जन्म कानपुर में हुआ था। जिसे पत्रकारिता के काफी उच्च मानकों के लिए जाना जाता है। गणेश शंकर विद्यार्थी एक महान पत्रकार थे। जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी कानपुर में हुए सांप्रदायिक हिंसा की आग को बुझाने में लगा दी। बतौर पत्रकार उनके लिखे गए शब्द समाज के दबे कुचले वर्ग के लिए सोचने को मजबूर करने वाले थे। उन्होंने प्रताप नाम से अपना अखबार भी शुरू किया था।

राष्ट्रपति ने कहा कि,

मीडिया का एक खास तबका न्यूज के नाम पर एंटरटेनमेंट दिखा रहा है। समाजिक असमानता की तस्वीर दिखाने वाली खबरों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी जगह ट्रिविया ने ले ली है, लेकिन मुझे विश्वास है कि अच्छी पत्रकारिता लंबे समय तक जिंदा रहेगी। जिस तरह की पत्रकारिता को आज हम यहां सेलिब्रेट कर रहे हैं। मैं जानता हूं कि आज एक पत्रकार को अपनी नौकरी में कई तरह रोल अदा करने होते हैं। कभी वो एक खोजी पत्रकार की भूमिका निभाते हैं तो कभी खुद फरियादी बनते हैं और कभी-कभी खुद जज की भूमिका भी निभाते हैं। लेकिन पावर होने के बाद ये सारी कवायद जवाबदेही के साथ होनी जरूरी हैं?"

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