केंद्र सरकार ने किसानों को पत्र लिखकर रखा बातचीत करने का प्रस्ताव रखा
Government written letter to agitating farmersSyed Dabeer Hussain - RE

केंद्र सरकार ने किसानों को पत्र लिखकर रखा बातचीत करने का प्रस्ताव रखा

गुरुवार को एक बार फिर केंद्र सरकार ने किसानों को पत्र लिखकर बातचीत करने का प्रस्ताव रखा है। यह पत्र कृषि मंत्रालय की तरफ से लिखा गया है। इस पत्र से सरकार का संकेत है कि, बातचीत मामला सुलझा सकता है।

राज एक्सप्रेस। देश में कृषि कानून को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान अपनी मांगे सरकार के सामने रख चुके हैं। हालांकि, सरकार हर बार इस मामले पर बातचीत करके मामला सुलझाने की कोशिश कर रही है। वहीं, अब गुरुवार को एक बार फिर केंद्र सरकार ने किसानों को पत्र लिखकर बातचीत करने का प्रस्ताव रखा है। बता दें, यह पत्र कृषि मंत्रालय की तरफ से लिखा गया है। इस पत्र के माध्यम से सरकार किसानों को संकेत देना चाहती थी कि, बातचीत करके मामला सुलझाया जा सकता है।

कृषि मंत्रालय का पत्र :

दरअसल, अपनी मांगों पर अड़े किसानों ने पिछले कुछ दिनों में धरना प्रदर्शन तो किया ही साथ ही भारत बंद का ऐलान किया था। इन ममलों पर काबू पाने के लिए सरकार ने बात करने की पेशकश की है। इसी के तहत कृषि मंत्रालय द्वारा किसानों को एक पत्र लिखा गया है। जिसमें कहा गया है कि, 'सरकार किसानों की हर मांग पर चर्चा करने के लिए तैयार है और वह चर्चा करने के लिए तैयार है। सरकार आपके द्वारा उठाए गए मुद्दों के तार्किक समाधान तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।' इसके अलावा किसानों को लिखे गए इस पत्र में किसानों से बातचीत के अगले दौर के लिए तारीख और समय तय करने को कहा है।

किसान आंदोलन का 29वां दिन :

बताते चलें, किसानों द्वारा कृषि बिल के खिलाफ चलाए जा रहे इस किसान आंदोलन का गुरुवार को 29वां दिन है। किसान अभी भी थकने का नाम नहीं ले रहे हैं वह अपनी मांगे रख कर अभी भी बैठे हैं। इस मामले के चलते ही सरकार और किसान संगठनों के बीच गतिरोध बना हुआ है। दोनों ही पक्षों की तरफ से बातचीत के लिए सहमति बन गई है और दोनों ही पक्ष किसानों की समस्याओं का हल करने की दिशा में वे बातचीत करेंगे। हालांकि क्या बात होगी यह बात अभी तक साफ नहीं हुई है। इस पर किसान संगठनों ने कहा है कि, 'अगर सरकार कोई ठोस प्रस्तान दे तो वार्ता हो सकती है।'

सरकार का कहना :

सरकार का कहना है कि, 'किसान संगठन कानून में संशोधन के जो भी प्रस्ताव लेकर आएंगे उस पर विचार किया जाएगा। लेकिन, प्रदर्शनकारी किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर कायम है जबकि सरकार उनकी मांग को मानने को तैयार नहीं है।'

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया :

बताते चलें, सरकार कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विवादों को शांत करना चाहती है और इसके लिए उस दिशा में काम भी कर रही है। सरकार वार्ता के लिए तैयार हो गई है, लेकिन ये बील वापस लिया जाएगा या नहीं इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता हैं। इस ममले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया है कि, 'सरकार सुप्रीम कोर्ट के रुख के अनुरूप समिति गठित करने की तैयारी कर रही है। समिति के लिए सदस्यों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दिसंबर की शुरुआत में सरकार की ओर से किसान संगठनों को एक छोटी समिति बनाने का सुझाव दिया गया था ताकि बातचीत से समाधान निकाला जा सके।'

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